00:00कहानी की शुरुवात में महा माय का ये प्रभाव होता है कि अधु कहेटा प्रसंद हो जाते हैं और उनको
00:05लगता है कि अच्छा है विश्ण तो बड़ा अच्छा है और एहंकार में कहते हैं हम इसे वर्दान देंगे तो
00:11मैं ये दिख रहा था कि हमारे पूपर जो एक तरह से
00:28गुरु गंभीर हो जाना चाहिए उन दिनों में आप उत्यजित हो जाते हो और ज्यादा पशुवों वाली हरकते शुरू कर
00:35देते हो एक आदमी शायद साल के अन्य दिनों में फिर भी थोड़ा सयमित रहता हो उसकी समझ में कुछ
00:43गहराई रहती हो लेकिन हम पाते हैं कि ज
00:55प्रकट होने लग जाती है नहीं तो ऐसा कैसे होता कि शराब की खपत नौदुरगा में दो गुनी चार पांच
01:03गुनी हो जाती हैं तो आते हैं हमें होश देने के लिए हमें शानते शील संयम देने के लिए और
01:10हम तोहरों का उप्योग कर रहे हैं अपनी पशुता की आग मे
01:15और घी डालने के लिए माया ही है इसी त्योहार में जो दुरगा सब्तशती को सुनेगा समझेगा गहलेगा जीलेगा मुक्त
01:27हो जाएगा
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