00:00गांधी जी को अंग्रेजों ने ट्रेंस बहार पिका था तो उन्होंने नाखो पत्थर चला है शांतिक मुन करीते थे अहिन
00:07साथ को अपनाते उए प्रिडम फाइट करा थे सही था तो गांधी जी पढ़े लिखे थे बैरिस्टर थे रुपया पैसा
00:14खूब था उनके पास और
00:27यह जो दो अंग्रेज थे जन्होंने फिकवाया है इनको कहीं से फिकवा दो यह प्रतिक्रिया होती है यह बदला होता
00:32पर उन्होंने विक्तिकत को विक्तिकत नहीं रखा उन्होंने देखा कि यह पूरी बात क्या चल रही है यह मेरे साथ
00:38नहीं चल रही है सब के साथ चल र
00:59जितनी उचाई से वो देख सकते थे उतनी उचाई से उन्होंने मुद्दे की व्यापक्ता को देखा।
01:22लिए आहितकारी है। मैं विवस्था बदलूँगा।
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