00:00स्वतंत्रता के बाद भारत ने केवल राजनीतिक संगहर्शी नहीं देखा बलकि एक साइलेंट डेमोग्राफिक चेंज को ही अनुभव किया है।
00:08ये परिवतन धीरे धीरे भारत के सीमावर्ती क्षितनों से शुरू हुआ और आज सामाजेक, सांस्कृतिक और गाजनीतिक बिमर्श का हिस्सा
00:19बन चुका है।
00:20जनसंख्या केवल आकड़े नहीं होती। जनसंख्या सत्ता ते करती है, संस्कृति ते करती है, भाशा ते करती है और आने
00:28वाली पीडियों का भविश्य भी ते करती है।
00:32इतियास गवा है कि जिन समाजों ने अपनी जन संख्या संरशना पर ध्यान नहीं दिया, वे धीरे धीरे अपनी ही
00:39भूमी पर बिलुप्त होगी।
00:41भारत के उत्तर पूव और पश्यम बंगाल जैसे क्षेतर आज इसी ही चिंता के केंदर में खड़े दिखाई देती है।
00:48सीमाओं की कमजोरी, राजनीतिक तुष्टी करण, अवैद घुसपैट और असंतुरित जन संख्या बृद्धी ने इन क्षेतरों की सामाजिक संरशना को
00:58बदल दिया है।
00:58यही कारण है कि भारत की डेमोग्राफी को लेकर हमें अखंड साबधान रहना चाहिए क्योंकि डेमोग्राफी ही डेस्टिनी है।
01:07पूरे देश भर से हम एक एक घुसपैटियो को चून चून कर निकालेंगे और देश को घुसपैटिया मुख निकालेंगे।
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