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  • 31 minutes ago
महेंद्र सोनगरा के पूर्वज पाकिस्तान से आकर जोधपुर बसे थे. उनकी चौथी पीढ़ी इस काम को कर रही हैं. पढ़िए मनोज वर्मा की स्पेशल रिपोर्ट.

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Transcript
00:11राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को संब्रिध करने वाली मारवाडी जूतियों में जोत्पुर के मेहंद्र सुनगरा का नाम खासा उभरता है
00:20सदियों पुरानी कशिदाकारी की इस पारंपरिक कला को उन्होंने न केवल संरक्षित किया है बलकि नई पहचान भी दी है
00:30उनके हाथों से बनी बारिक कशिदाकारी वाली जूतियां देश-विदेश में लोगप्रिये हैं
00:37मेहंद्र सुनगरा उन चुनिंदाकारी गरों में शामिल हैं जिन्होंने कशिदाकारी जूति का पेटेंट हासिल किया है
00:45मेरे दादा जी तो पाकिस्तान साहे थे उसके बाद मैं यहीं काम सुरू किया था
00:54तो काम सुरू करने के बाद मैं फिर वापस नहीं गए
00:58फिर 14 सार की उमर में मेरे पापा जी वो भी साथ मैं काम करने लग गए
01:03Same
01:05Yeah
01:15Yeah
01:32We
01:33foreign
01:49foreign
01:50foreign
01:50foreign
01:51foreign
02:05ुपिता के साथ हाथ बटा रहे हैं चमड़े और कपड़े दोनों प्रकार की जूतियां बनाने वाले सोनगरा परिवार ने समय
02:14के साथ डिजाइन में बदलाव किये हैं लेकिन परंपरा को कभी नहीं छोड़ा
02:22हमने मतलब अभी दो साल पहले एक नया आर्टिकल बनाया था और ऐसे भी बनाते रहते हैं जैसे जैसे हमको
02:28कोई नई डिजाइन सुझती है या देखते हैं कि आज के ट्रेंड में क्या चल रहा है उसके मिलता जुलता
02:33जैसे तो कुछ हम अपने हिसाब से भी जोड़ोड के कु
03:08इस परिवार की सबसे खास रचना है बिच्छु जूती चलने पर खनकती ये जूती पुराने जमाने में जागिरदारों की पहचान
03:18हुआ करती थी
03:20केरोसीन में भिगो कर बनाई जाने वाली इस जूती में मेहनत के कई चरान लगते हैं
03:26मशीनों के युग में भी हाथ से बनी ये जूतियां आज भी लोग प्रिये हैं
03:32जोदपुर से मनोज वर्मा की रिपोर्ट
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