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FIIs की वापसी के साथ बाजार में नई उम्मीदें नजर आ रही हैं। Donald Trump और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते ने ग्लोबल सेंटिमेंट को मजबूत किया है, जिससे भारतीय बाजार को भी सपोर्ट मिला है। लेकिन सवाल अभी भी कायम है—क्या ये तेजी टिकाऊ होगी या फिर पहले की तरह सिर्फ शॉर्ट टर्म रिएक्शन साबित होगी? जानिए इस रिपोर्ट में कि FIIs की मूवमेंट बाजार की दिशा कैसे तय करती है और क्या वाकई अब एक नए बुल रन की शुरुआत हो सकती है।

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00:28। विदेशी निवेशको की वापसी हुई है।
00:43विदेशी निवेशको की वापसी है।
01:12विदेशी निवेशको की वापसी वापसी वापसी वाजार को नई दिशा देगी।
01:21सवाल इसलिए क्योंकि पहले भी विदेशी निवेशको ने खरीदारी की थी लेकिन बाजार में कोई बड़ी तेजी नहीं आई थी।
01:57थोड़ी तेजी के बाद फिर से गिरावट देखने को मिली।
02:01पहले की डेटा के मुताविक अगर देखें तो इतनी खरीदारी के बावजूद बाजार में बड़ा उच्छाल क्यों नहीं आया।
02:06तो इसका सीधा सा जवाब है सेंटिमेंट टिकाउन नहीं था। उस समय खरीदारी सिर्फ खबरों और कयासों पर अधारित थी।
02:12अमेरिकी राष्टपती ट्रंप जब भी इरान के साथ समझोते की बाथ करते थे वाजार में पोचेटिव मखौल बनता था और
02:18विदेशी निवेशक खरीदारी करते थे।
02:20लेकिन जैसे ही इरान के तरफ से इन बयानों को खारिज किया जाता था तुरंट बिक्वाली शुरू हो जाती थी।
02:27यानि वाजार में इस्थिर्ता नहीं थी। सिर्फ रियक्सन था। लेकिन इस बार कहानी थोड़ी अलग है। अब सिर्फ बयान नहीं
02:33बलकि ठोस प्रगत
02:34हुई है। ट्रंप ने पहले सोचल मीडिया पोश्ट के जरिये जानकारी दी उसके बाद इरान ने भी हामी भरी। फ्रेमवर्क
02:40तैयार हुआ और अब खबरे हैं कि दोनों देशों ने इस समझोते पर डिश्टली साइन कर दिये हैं। 19 जुन
02:46को जिनेवा में इससे आपचा
03:01जैसे भारत में पैसा डालते हैं और जब यह पैसा लगतार आता है तभी असली बूल्टरन की निउपरती है। अब
03:08आते हैं इस सवाल पर कि विदेशी निवेशक भारत के लिए इतने इंपोर्टेंट क्यों है और विदेशी निवेशक ही अक्सर
03:14वाजार की दिशाग क्यो
03:30दाम मायने रखता है किसी भी मार्केट में दिशा उस पैसे से तै होती है जो तेजी से अंदर और
03:35बाहर होता है और विदेशी निवेशक इसी में सबसे आगे रहते हैं एफाई आई के पास बहुत बड़ा फंड होता
03:41है जिससे वे एक साथ बड़ी मात्रा में निवेश या
04:00सिर्फ भारत को देखकर निवेश नहीं करते बलकि ग्लोबल इंट्रेस्ट रेट्स, यूएस फेडरल डिजर्ब पॉलिसी, डॉलर की मजबूती और जियो
04:08पॉलिटिकल घटनाओं जैसे फैक्टर्स को भी ध्यान में रखते हैं जैसे ही बैश्विक इस्तर पर जोखिम ब�
04:27इसलिए उनके खरीदने या बेशने का स्टीधा असाय निफ्टी-फिप्टी और सेंसेक्स जैसे इंडेक्स पर पड़ता है, हाला कि अब
04:34तस्बीर धीरे-धीरे बदल रही है, घरेलू निवेशा क्यानी दी आई आई आई और रिटेल निवेशकों की भागिदारी बढ़
04:40रही है, जिससे बाजार कुछ हद तक FII पर कम निर्भर होता दिख रहा है, लेकिन फिर भी शौर्ट टर्न
04:46में बाजार की दिशा तैक करने में FII की भूमी का आज भी सबसे ज़्यादा प्रभाव शाली बानी जाती है,
04:52यही वज़ा है कि जब भी FII बड़ी खरीदारी या
05:07साइन हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सरकार बिदेशी निवेशकों पर से टैक्स कम करने की जोजना पर भी काम
05:13कर रहा है, ऐसे में अगर लगतार बिदेशी निवेशक भारतिये मार्केट में पैसा डालते हैं, तो एक बड़े और बुल
05:19रन की शुरुवात हो सकती है, ह
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