00:28।
00:36ुशादी के शुरुवाती 6 महिने तो बहुत अच्छे बीते लेकिन फिर पारिवारिक अन्बन और गलत फेहमियों के कारण निर्मला देवी
00:44रूटकर अपने माई के चली गई और फिर कभी लोटकर नहीं आई
00:48शुर्द के पार जांन इन के तो फिर अफिर गाहते कहा थे आप अच्छा नहीरा मेरा रहाते कहा थे आप
01:31इधर पत्नी के जाने के बाद ललन मिश्रा ने उन्हें ढूडने के लिए दिन रात एक कर दिया.
01:36आसपास के कई गाउं की खाक्चानी और इसी चक्कर में उनकी नौकरी भी जूड़ गई.
01:41दूसरी तरफ निर्मला देवी के पिता ने उन्हें नागपुर के एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका बनवा दिया.
01:49निर्मला देवी ने अकेले अपने दम पर नागपुर में जिन्दगी काटी.
01:53अपने दो बेटों की परवरिश्की, जिनमें से एक आज पुणे में नामचीन इंजीनियर हैं.
02:00कितना बेटा बेटी, पुता पुती हैं, हमको कस्दी आया चाहिए, इसको कस्दी हुआ है, तो दू बच्चा है, हम रही
02:08की जल्बादी, तो दू बच्चा क्या करता है इजाने, वो लो कहां है, बच्चे लोग?
02:17बड़े वाले इंजीनियर हैं, सते वाले पॉड़ रहे हैं, पुसादी के तैयारी कर रहे हैं, इन नाम है, एक इंजीनियर
02:28है.
02:28लेकिन कहते हैं न, कि जोडियां आस्मान में बनती हैं, जीवन के आखरी पड़ाफ पर, 48 सालों बाद, किस्मत, निर्मला
02:37देवी को वापस ससुराल ले आई, बुढ़ापे में हुए इस अनोखे मिलन को देख, पूरा परिवार और पूरा गाउं भावखो
02:45उठा.
02:46ETV भारत के लिए महमूद आलन की रिपोर्ट
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