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  • 8 hours ago
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00:02बक्त कहते हैं जब किसी घर के भीतर दर्म डगमगाने लगता है तब वही अद्रिश्य रूप से द्वार पर खड़ा
00:11रहता है क्योंकि नागडो बेदाल निराबरन है और अडिक भी और अपने सर्वोच अर्थ में सक्त्य है छल से मुक्त
00:23है
00:23नागडो बेदाल लोकताओं में भतक्ती कोई साधारन प्रितात्मा नहीं है वह चंचल बेदाल भी नहीं है जो राजदरबारों में पहेलिया
00:37पूश्ता फिलता है वह भूमी और वन्ष का रक्षक है
00:46आदिम जनजातिये शद्धा का वह प्रतीक है जो बात की उपासना परंपराओं में आकर भी अपनी जनों से जुड़ा रहा
00:57बैरव के समान उग्र किंतु शास्त्रों से अधिक मिट्टी में प्रतिष्ठित वह जटल अनुष्ठानों की मांग नहीं करता बहा केवल
01:08सामनजस्य मांगता है
01:10बीतर और बहार के सत्य का सामनजस्य
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