00:00।
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00:02।
00:02।
00:03।
00:08।
00:09कला के छेतर में अपनी
00:11विशिष्ट पहचान बनाने वाले
00:12राइगणर्ाजगराने के पदमसरी
00:15पंडित रामलाल बरेट को
00:16संगीत नाटक अकादमी की
00:18सरवच फेलोशीप अकादमी
00:20रत्न से सम्मान इत किया जाएगा
00:25ये सम्मान
00:26UNKI SAHDHNA OR KALA KAHE CHHETR MEN SHAMARPAN KO DEEKTAY HUGE DIA JARA RAH HAY
00:32IS MAUKAY PAR PADMASRI PANDİT RAMLAL BAREED SE HEMARES SANWADATA NEN UNKES SAHFAR KIN SHURUVAT KO LAYKAR CHERCHA KI
00:40CHATIS GAAR KE GOWRO PADMASRI BAREED JIA ABHI HEMARES BICC MAUJUD HAY
00:46UNSE JANNA CHAHAENGAY Kİ SAHDHNA MEI CHUNAUTAY A YEI HAYA
00:58in the future.
00:59How good about this event?
01:02How long is this event in the future?
01:04When did you start the event?
01:05I was saying that the event of my childhood was the event.
01:09There was a conference in Thailand.
01:11There was a concert in my father.
01:13My father was starting to learn how to teach.
01:18As soon as my father was born,
01:23foreign
02:16Thank you very much.
02:21The country and the Delhi people have said that they were not living here in Delhi.
02:27They were called to call the old-daughter of Bhavapal.
02:32They called us for the first time.
02:35They said that they want us to be here.
02:38I said that they want us to be the Lord's work of the Lord.
02:42He said that the name is Chakra-da-Nitkentia.
02:46Then we go to the old-daughter of Bhavapal.
02:48that we are going to have to say that we are all children in the country that we are all
02:56children.
02:56We are all children, children, families, even though we are all children,
03:01we have to be friends. We are all children,
03:02They say that they have to be a good teacher.
03:02They say, okay, what is their education?
03:06We are all children that we are all children.
03:09They tell how we are all kids,
03:10I am teaching them as a guru.
03:12In the guru's education,
03:14they have been teaching five children.
03:16foreign
03:28foreign
03:29foreign
03:41foreign
04:00। । । । पंडित रामलाल बरेट को सम्मान मिलने पर पुर्वराजभाशा आयोग अध्यक्ष एवं सहतेकार ने भी अपनी खुशी
04:11जाहिर की है।
04:29अधित राम बिलासपुर वाले को चत्तिजगर कला घराना जो रायगर का है उसको बलकि प्रदेश सहीत पुरे देश को गवरों
04:38की बात है।
05:04यह सम्मान केवल पंडित रामलाल बरेट का नहीं बलकि रायगर कतक घराने बिलासपुर और पुरे चत्तिजगर की संस्कृती असमीता का
05:14सम्मान है।
05:15राश्टपती के हाथों मिलने वाला यह प्रतिश्ठित सम्मान आने वाली पिढ़ियों को भारतिय सास्तिय कला और प्रप्राओं के समक्षन के
05:23लिए पिरना देगा।
05:25वहीं सम्मान मिलने की खबर पाकर उनकी सिस्चा भी काफी खुस हैं।
05:30पन्नित रामलाल बरेट की सिस्चाओं का कहना है कि नित्य कला को सीखना और उसकी प्रस्तुती किसी साधना से कम
05:37नहीं है।
05:40अभी वर्तमान में मौडन जमाना चल रहा है। इसके बाद भी यहां कुछ यूतियां हैं।
05:47वह सास्ति संगीत के तरफ रूख किये हैं।
05:50और अभी हमारे भी 36 गड़ के सम्मानी पदमस्री रामलाल बरेट जी के सिस्चा भी मौजूद है।
05:57उनसे जानना चाहेंगे कि इस विधा को ही क्यों चुला, क्योंकि अभी के समय डिजिटल रावर है।
06:02इसके साथ ही अभी वर्तमान के युवाप भी हैं।
06:04नएने संस्कृतिक अपनाते हैं।
06:06तो आप लोग पुराने संस्कृतिक को क्यों अपनाना चाहें।
06:09सभीबर मेरा नमश्कार।
06:11सबकतम तो जो कथक शेत्र हैं।
06:14और सिफ कथक नहीं जो भी कला की जितने भी शेत्र हैं।
06:17खुद में एक साधना है।
06:18जो कि एक तरीके से हमारी भार्तिय संस्कृतिक को भी सामने लाता है।
06:23हमारे कल्चर को प्रोटेक्ट किया हुआ है अभी तक।
06:26और मैं बहुत गौर्वानमित महसूस करते हूं कि मैं इस छेत्र से जुड़ी हूं
06:30क्योंकि मैं कहीं ने कहीं अपनी पिछली पीडी के जो भी संसकार है।
06:35उनको मैं आज भी अभी नई पीडियों को मैं आगे बता पा रही हूं।
06:39और वो सब मतलब मेरे गुरुओं के कारण ही हो पाया है।
06:42चुनौती की बात करें तो आप कुछ भी साधना करते हैं कुछ भी प्रैक्टिस करते हैं
06:47तो चुनौतिया कुछ आती है।
06:49सबसे चुनौती वाली बात में ये कहूंगी कि जो हमारे अकैडमिक से डेडी लाइफ है।
06:54उसके साथ साथ इसमें भी उतनी ही मेनत करना इसमें भी उतना ही फोकस करना ध्यान लगाना।
06:58क्योंकि ये जो कला है ये बहुत ही डिसिप्लिन बहुत ही मेहनत मांगती है।
07:19हम उनकी शिश्या होते हमें तो ये बहुत ही जादा खुशी महसूस हो रहा है तकि हम भी इस चीज़
07:25को आगे बढ़ा पाएंगे।
07:26हम भी बहुत प्राउड के साथ ही बता सकते हैं कि हम उनसे सीखे हैं और हमारे लिए तो बहुत
07:32खुशी का अपसर है।
07:40कला सदेव जिवीत रहता है। इसके माध्यम से आप अपना फ्यूचर भी बना सकते हैं।
07:46अलग-अलग जगों में इनका महत्व है आप भविश में इसको प्लान कर सकते हैं और अपने जो परंप्रा है
07:55उसको लगातर आगे बढ़ा सकते हैं।
07:57संजाय आदो, ETV भारात भीनास पोल्चर त्रिजगार।
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