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  • 2 minutes ago
भुवन ऋभु बाल तस्करी, बाल श्रम और बाल विवाह के खिलाफ दो दशक से रहे अथक प्रयास.

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00:00भारत में मिसिंग, बाल विवा, चाइल्ड सेक्शूल अव्यूस कई तरह की डाटा हैं, किस तरीके से ये कहानी शुरू हुई
00:09आपकी इस पर काम करना की?
00:13मैं लगभग बाईस साल पहले एक ऐसे रेस्क्यू आपरेशन में था, जहां पे कुछ बच्चीयों को छुडाते हुए, हम लोगों
00:20पे हमला हुआ, और ये देखा गया कि पुलिस की कोई जवाब देही भी नहीं थी और पुलिस को कोई
00:27मजबूरी नहीं थी कि वो F.I.R. काट
00:40सामाजिक संगठन सभी इसी तरह से काम करते थे, मेरी सोच थोड़ी सी अलग थी, मुझे लगा कि यदि एक
00:48बच्चा किसी जगह शोषन का शिकार हो रहा है, तो उसको बहां लाने वाला तो कोई और है, तो जब
00:54तक उस पूरी प्रक्रिया के ऊपर घात नहीं होगा, तब त
01:00ट्राफिकिंग पे काम करने के लिए 2004 में मैंने एक संगठन बनाया, Safe the Childhood Foundation, और उसके पश्चात धीरे
01:09धीरे करके वो यात्रा यहां तक पहुंची, कि इश्वर की कृपा से जब ट्राफिकिंग के कानून बन रहे थे, तो
01:17सरकार ने मुझे ये जम्मेदारी सौपी, जस्ट
01:30आप्टिम कोड के केसिस फाइल करने में और उनकी जज्जमेंट वगएरा बाद में आई, तो यह एक पूरी यात्रा यहां
01:37तक पहुंची, जहां मुझे ऐसा लगा कि कोई र्यक्ति, कोई संगठन अकेले, किसी समस्या का समाधान नहीं कर सकता, मैं
01:45यह कह सकता हूं, मैंने �
01:46चार बच्चे चुड़ा दिये, मैं यह कह सकता हूं, मैंने चालिस बच्चों को पनरवासित कर दिया, उससे समस्या नहीं खत्म
01:51होगी, समस्या को खत्म करने के लिए वो लोग जो की इस विशय पे आपके साथ, आपके मुल्यों के साथ
02:00खड़े हैं, उनको अपनी जमीनी इ
02:03की जरूरत है, तो हमने जस्ट राइट्स फॉर चिल्डरन नाम का ये नेटवर्क पिछले चंद वर्शों में खड़ा किया, और
02:10आप सभी लोगों के सहयोग से ईश्वर के आशिरवाद से, पिछले तीन वर्शों में जितने बाल विभार होके गए हैं,
02:16साड़े पांच ला
02:31नहीं हुआ, कहीं नहीं हुआ, तो भारत आज इन सामाजिक संगठनों के बदौलत नकेवल जैसे ग्यान का या एक तरह
02:43से धर्म का विश्वगुरू माना जाता था, वैसे ही बच्चों की सुरक्षा और न्याईक प्रणाली के तहर बच्चों की सुरक्षा
02:50में भी भारत आ
02:54तब तीन वर्षों में 272 के आसपास हमारे पार्टनर हैं और इस वर्ष हम सोचते हैं कि ये संग्या बढ़के
03:01साड़े तीन सो हो जाएगी, एक लाख गाउं को हम सुरक्षित बाल ग्राम बनाने की दिशा में काम कर रहे
03:07हैं और इस साल हमें उम्मीद है कि यदि सब ठीक रह
03:14तो 750 से जादा जिलों में हम बच्चों को ट्राफिकिंग से और बाल श्रम से मुक्त करा पाएंगे
03:20प्राफिकिंग की चैन प्रक्रिया एक होती है बच्चे जहां से गायब होना शुरू होते हैं, उसकी पूरी चैन होती है
03:41और पूरी चेन में कानूनी प्रक्रिया का अनुपालन जरूरी है
03:45और दूसरी चेन है जो डिमांड की है कि बच्चा काम किसके लिए कर रहा था
03:50पैसा जेनरेट होके कहां जा रहा था
03:52तो follow the money and look beneath the surface
03:55यह दो principles हैं ट्राफिकिंग को combat करने के
03:58एक organized crime है इसके लिए इस organized approach की जरुवत है
04:01एक तरफ पैसे का पीछा कीजिए और दूसरी तरफ बच्चा कहां से आया
04:05और कहां से पहुंचा शोशन की जगे उस चीज़ का पीछा कीजिए बहुत आसान हो जाता है
04:09यदि trafficking रुकी और गाउं देहाद से जो बच्चों को गायब कर रहे हैं
04:15वो लोग identify होके arrest हुए तो देखिए एक तो उसका सर तो कट गया
04:19अब लेके आना recruitment अपने आप में मुश्किल है
04:24दूसरा जैसे जैसे एक जगह सकती बढ़ती है वैसे वैसे वो अपना स्वरूप पदलती है
04:30दिल्ली में जरीकार खानों में सकती बढ़ी तो बच्चे रामपुर चले गए
04:34पहले मिर्जापूर में सकती बढ़ी कालीन में तो बच्चे को trafficking दिल्ली आ गई
04:39तो ये सकती जितनी जगह अलग-अलग geography में बदलती है अलग-अलग sector में बदलती है उतना या बढ़ती
04:47है उतना ये अपना स्वरूप बदलता है
04:49इसलिए मैंने कहा पूरे देश में व्यापक रूप से समग्र दिश्टिकोंड के साथ साड़े साथ सो जिलो में एक साथ
04:56इसक पर प्रहार कलने की जरूरत है कि सर चुपाने की किसी trafficker को जगई ना मिले
05:02बच्चा एक जगह से निकला एक आदमी ने फोन किया द्रास्ते में ट्रेन में बच्चे को बचा लिया गया नहीं
05:07बचा पाए तो जहां पर शोशन हो रहा है वहां पर किसी और ने बचा लिया पूरी चेन में कहीं
05:13कोई बच्चा असुरक्षित न रहे इस प्रक्रिया के सा
05:17so you think we have to do this
05:192004
05:192006
05:22what happened
05:24in what happened
05:24in bharat
05:27in a very good vision
05:28in a
05:29a
05:29a
05:31philosophy
05:32and
05:36today
05:36five years
05:37you can
05:39or
05:41one
05:41I am going to say that, I am going to say that,
05:43I am going to say that,
05:44all the people who were in the country with trafficking,
05:47who were leaving the trafficking in the country,
05:48are now reaching the thousands of people.
05:55Our 51-51 partners are here,
05:57who you are seeing here.
05:59They are all 20-25 activists,
06:04who are rescuing children in the village.
06:07They are going to go to the village.
06:15। । ।
06:39। ।
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