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  • 11 minutes ago
पानी के लिए मीलों का पैदल सफर, वो भी मैला और प्रदूषित... देखें छत्तीसगढ़ से ग्राउंड रिपोर्ट

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00:00बिस्तर पर लेट कर या सोफे पर बैठे बैठे कभी मोबाइल पर रील स्ट्रॉल करते होंगे तो जंगल, जहरना, पहाड़ी,
00:06रास्ता, उंचे, पेड़, सब कुछ देख कर लगता होगा कि यार क्या जिन्दगी है
00:10लेकिन यहां रहने वालों की जिन्दगी नकसल मुक्ती के बाद भी क्यों एक जंग लड़ने जैसी है
00:16यही आज आज आप देख सकें, जान सकें इसलिए आज तक समबाददाता सुमी के वल पटेल कांकेर से बालोत तक
00:22उस हिस्से में पहुँची है
00:24जहां साफ पानी का विकास अब भी बहुत दूर है
00:31कांकेर के मास्पुर में पहाडी रास्तों से निकल कर महिलाएं जहां से पानी भरती है
00:35एक बार आप उस जगा को जा कर देखिए और बताईए कि क्या आप ये पानी पीना तो छोड़िए छूना
00:41पसंद करेंगे
00:45जब हमें पहली बार यहां के बार में बताया गया कि भारत में ऐसा भी गाउ है
00:49जहांके सौ लोग एक नाले पर आशृत है पानी को लेकर और वो भी बिल्कुल पच्चास साल से
00:55क्योंकि यहां पर मस्पूर हम आप पहुँचे हैं अंतागर से लगभग 25 किलोमेटर दूर
01:00यहां पर 20 घर हैं और कुछ 100 लोग यहां पर रहते हैं
01:04और इनके लिए पानी का सुरोत पच्चास सालों से यह एक नाला है जो आप देख रहे हैं यहां पर
01:09और यहां पर आने के बाद पहले तो विश्वास नहीं हुआ कि ऐसी भी कोई जगा है भारत में
01:15क्योंकि हम बड़े-बड़े दावे करते हैं कि हम 3rd largest economy है 5th largest economy है
01:21लेकिन जब ऐसे किसी जगहों पर आए तो ऐसे सारे दावे धरे के धरे रह जाते हैं
01:52पानी का रंग बताता है इसे साफ नहीं कहा जा सकता
01:54पानी जहां से लिया जा रहा है इसे देखकर आप सोच नहीं सकते कि यह पानी पीने के लिए इस्तमाल
02:00होता हो
02:00लेकिन जहां पानी ही ना हो वहाँ साफ और गंडा आम आदमी नहीं देख पाता
02:05चटानों के बीच से निकला पानी, जिसे नहीं पता और कितने जानवर भी पीते होंगे, इंसान भी पीने को मजबूर
02:12है
02:16यह पानी एक तरफ का यह जो नाला है एक तरफ का पानी इसमें बहुत ही जादा गंदा है जिसमें
02:21मेंधक तो बहुत सारे हैं और यही पानी आगे चलके ऐसे थोड़ा सा साफ हुआ है और यह वहां का
02:29जो पानी वो भी मतमेला ही लग रहा है जिसको आप लोग इस्तिमाल करते
02:32बीमार हमीशा ही रहते हो तो बताई हैं वेमार रहते ही हो आप जी जी बिलकुतूर जी जी कब तक
02:37चलेगा इसे क्या लग रहा है या तो हम लोग वेगत 30-35 सालों से यहां बोर के लिए अवेदन
02:47कर चुके हैं लेकिन हमेशा है जाते हैं आउसासन आउसासन से ही हम लोगो द�
03:04बुजूर्ग महिला बताती है कि 50-55 साल से यही पानी का स्रोत है तो साफ पानी क्या नहीं मिल
03:09सकता तुशासन से आवेदन होता रहा है अभी तक फिलहाल आश्वासन मिला है
03:16कुछ गाहों पर अभी मांग आ रहे थी जो अभी एक सुचना मिले उसके तारतम्मे में अगामी दो-चार दिन
03:23के भी तर सेंक्शन होते हुए बाड़िश के पहले ने 15 जुन के पहले किसी भी हालत में वह गाहों
03:29में भी पाने पीने की व्युस्ता की जाएगी
03:34आज तकी मांग है कि तुरंत अगर 27 समाधान नहीं हो सकता तो कम से कम अस्थाई साफ पानी का
03:41साधन तो दिया जाए ताकि बच्चे, बुढ़े, महिला हर नागरी को कम से कम साफ पानी तो मिले
03:47लेकिन यह समस्या केवल कांकेर की नहीं है, आपको हम बालोद लेकर चलते हैं, यहां का दल्ली राजहरा गाउं, बालोद
03:5436 गड़ की आईरन कैपिटल कहा जाता है, यहां से लोहा निकलता है, वहां पर लोगों को पानी पीने के
04:00लिए लोहे के चने चवाने पड़ते हैं, �
04:14पीने और खाने बनाने के लिए यूज कर रहे हैं, क्योंकि नगर में पानी के समस्या है, पेजल के लिए
04:20नल में परियापता पानी नहीं आ रही है, इसलिए जहरन पानी के ही इस्तमाल नहाने से लेकर पीने और खाने
04:28बनाने में कर रहे हैं, हमार साथ माताराम है, जो यहां
04:31पानी लेने आई हुए इस तरी की समस्या है उनिंनीस जाने कर प्रयाश करते हैं यह पानी कफिए बनाने
04:36के लिए धीने का लिया इंट से पानी is नहीं नहीं नुह पूरा होगा
04:52झाल

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