00:03कभी कभी जिन्दगी किसी इंसान को बचा तो लेती है, लेकिन उस बच जाने की कीमत इतनी भारी होती है
00:09कि इंसान हर दिन खुद से यही सवाल पूछता है.
00:13मैं क्यूं बच गया? एहमदाबाद एर इंडिया AI-171 प्लेन क्रैश को आज एक साल पूरा हो चुका है. 12
00:21जून दो हजार पचीस को एहमदाबाद से लंडन गैटविक जा रही एर इंडिया की फ्लाइट AI-171 टेक ओफ की
00:28कुछ ही सेकिंड बाद हादसे का शिकार हो गई थी.
00:31इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें पैसेंजर्स, क्रू मेंबर्स और ग्राउन पर मौजूद लोग भी शामिल
00:38थे. इस पूरी त्रासदी में सिर्फ एक यात्री जिन्दा बचा, विश्वास कुमार रमेश. लेकिन विश्वास के लिए ये बच जाना
00:46किसी
00:46मिरिकल से कम नहीं था, और शायद किसी दर्द से भी कम नहीं था, क्योंकि उसी फ्लाइट में उनके भाई
00:53अजय रमेश भी मौजूद थे, जो इस हादसे में अपनी जान गवा बैठे. विश्वास उस दिन सीट 11A पर बैठे
01:00थे. हादसे के बाद उनकी कुछ तस्वीरें �
01:03और विडियोस सामने आये थे, जिनमें वो इंजर्ड हलत में क्रैश साइट से बाहर आते दिखाई दिये थे. पूरी दुनिया
01:09ने उन्हें लोन सवाईवर कहा, लेकिन एक साल बाद विश्वास के दिल में सवाईवर होने से ज्यादा भाई को खोने
01:16का दर्द है. निउस र
01:29कहना है कि शरीर के जखम तो समय के साथ भर गए, लेकिन मन के जखम आज भी वैसे ही
01:34है. हादसे के बाद विश्वास को सिवियर साइकोलोजिकल ट्रॉमा और फाइनशल डिफिकल्टीज का भी सामना करना पड़ा. सबसे पेनफुल पल
01:43वो था, जब हादसे में बचने के कु
01:57जाने जैसा खा. एक साल बाद भी विक्टिम्स के परिवारों के मन में कही सवाल है. हादसे की फाइनल इन्वेस्टिगेशन
02:04रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है. प्रिमिमिनरी रिपोर्ट में एरक्राफ्ट के फ्यूल स्विचेस कट ओफ होने की बात सामने
02:10आई थी,
02:11जिससे engine thrust पर असर पड़ा. लेकिन हादसे की पूरी और final वजह को लेकर अब भी families clarity चाहती
02:18है. विश्वास भी यही मांग कर रहे हैं. सिर्फ compensation नहीं, बलकि truth, transparency और answers. उनका कहना है कि
02:26जब तक सच सामने नहीं आएगा, तब तक ना तो उन्हें closure मिलेगा और ना ही उन परिव
02:41इंसान पूरी उम्रिध होता है. आप देख रहे हैं One India Hindi.
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