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  • 3 days ago
भरतपुर जेल में चप्पल निर्माण का कार्य डेढ़-दो वर्ष पहले शुरू किया गया था. अब लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं. पढ़िए श्यामवीर सिंह की रिपोर्ट...

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00:07केंद्रिये कारागार भरतपुर का चपल निर्मार उद्ध्योग आज पूरे राज्य के लिए एक सफलता का मॉडल बन चुका है
00:15यहाँ बनी चपलों की मांग लगातार बढ़ रही है
00:18पिछले एक साल में भरतपुर जेल से राज्य की विभन केंद्रिये और जिला जेलों में करीब 1500 जोडी चपलों की
00:26सपलाई की जा चुकी है
00:27जबकि 1000 जोडी से अधिक चपलों के ओरडर अभी लंबित है
00:31जेल विभाग ने भी कैंटीनों में बिकने वाली चपलों की खरीद भरतपुर जेल से करने के निर्देश दिये हैं
00:38ऐसे में आने वाले समय में राजस्थान की करीब 40 से 50 जेलों की जरूरतें भरतपुर जेल की उद्योगशाला से
00:46पूरी होने की संभावना है
00:48हमने जेल के दूवचाला में चपल बनाने का जो कार चालू किया उसका बहुत अच्छा रिस्पॉंस मिला है
00:53और हमारे हेड़कोर्टर ने ओडर किये हैं जो रास्तान की जेलों में और केंटीन में जो चपले बिकती हैं वो
01:00बल्कपुर जेल के मार्जम से ही जाएंगी
01:23केंद्रिय कारागार भरतपुर के अधिक शक परमजीत सिंग बताते हैं कि चपलों की सबसे बड़ी विशेषता
01:29उनकी गुर्वत्ता और किफायती कीमत है जेल प्रिशासन के अनुसार यहां निर्मित चपले मजबूत उपयोगी और दैनिक इस्तमाल के लिए
01:38उपयुक्त हैं
01:39वर्तमान में पुरुशों की चपल की कीमत 74 रुपय और महिलाओं की चपल की कीमत 62 रुपय निर्धारित की गई
01:46है
01:46कम कीमत और अच्छे गुर्वत्ता के कारण जेल कैंटीनों में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है
02:37परमजित सिंग बताते हैं कि यह कारे केवल उतपादन तक सीमित नहीं है
02:42बलकि कैदियों को विवसाइक प्रसिक्षर देने का भी माध्यम है
02:45जेल में रहते हुए वे एक ऐसा कौशल सीख रहे हैं जो भविश्य में उनके रोजगार और आत्मे निर्भरता का
02:52आधार बन सकता है
02:54इससे रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा में लोटने में उन्हें मदद मिलेगी
03:00भरतपूर से ETV भारत के लिए शाम विर सिंग की रिपोर्ट
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