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  • 3 hours ago
पिछले 17 सालों से केवलादेव के जलाशयों के लिए मांगुर चुनौती बना हुआ है. पढ़िए श्यामवीर सिंह की रिपोर्ट...

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00:08दुनिया जिसे पक्षियों का स्वर्ग कहती है और जहां हर साल हजारों मील दूर से दुल्लपक्षी आते हैं
00:14उसी भरतपुर के केवला देव रास्ट्रे उध्यान में पिछले 17 सालों से एक खामोश जंग चल रही है
00:21एक ऐसी आकरामक प्रजाती जिसने इस पूरे इकोसिस्टम को खत्रे में डाल दिया है
00:26ये है अफ्रिकन कैट फिश यानी मांगूर
00:29अब तक एक लाख से अधिक मांगूर मशलिया जीलों से निकाली जा चुकी है
00:34लेकिन इसकी तेज प्रजनन छमता की कारण खत्रा पूरी तरह टला नहीं है
00:39ऐसे में पक्षियों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले इस विश्व प्रसिध आद्रशेत्र में
00:44मांगूर आज भी वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है
00:48कुछ exact date नहीं है पर ये लेट 2010 में इसका farming शुरू हो आता इंडिया में
00:55कल्टिवेशन पिश कल्टिवेशन तो उसी टाइम पर यहां भी आसपास के
01:01farmers ने इसकी खेती शुरू की तो हो सकता है उसी टाइम पर ये पार्ट में आगया
01:06ये काफी invasive होता है African catfish में प्रीजन से ही होता है कि ये बहुत fast growing है और
01:15बहुत जल्दी
01:16multiply भी करते है में ये है कि इनकी डाइट ओम्निवरोस रहती है मतलब ये दूसरे मश्लियों को भी काते
01:25है
01:25है चोटे मश्ली जो हमारे बर्ट के लिए में फीड भी रहता है तो इस तरह देखे थो पास्ट मुल्टिप्लाइंगे
01:31फास्ट ग्रोइंग है और ओम्निवरोस डाइट रहने के कारण ये पार के लिए बहुत बड़ी समस्य है घना के डियपो
01:38चेतन कुमार ने बताया कि
01:39अफरीकन कैट फिश एकत्यंत आक्रामक प्रजाती है यह तेजी से बढ़ती है बहुत जल्दी प्रजनन करती है और इसकी भोजन
01:47आदतें सर्वाहारी होती है यही कारण है कि यह स्थानिय जलिये जीवों और पक्षियों के लिए प्रतिस परधा और खत्रा
01:55दोनों पैदा क
02:06पिछले सालों में यह अभियान एक विवस्थित कार्ययोजना के तहत संचालित किया जा रहा है डियोफो नों बताया कि वर्ष
02:142009 से 2026 तक करीब एक लाख से अधिक मांगुर मचलियां केवलादेव की जीलों से निकाली जा चुकी है इसके
02:22बावजूद कुछ जलाशियों मे
02:24इनकी मौजूदगी अभी भी दर्ज की जा रही है एक्चुली यह टेनियर्स का प्लान था 2016 से एक स्ट्रीम लाइन
02:32तरीके से टेनियर एक्शन प्लान बना है 2026 तक है एक्जैक नंबर्स तो साल बर में देखकर ही बता पाऊंगा
02:39पर हर साल जिस साल में पानी कम मात्रा में �
02:44लेती है तब यह और्गनेश्ट तरीके से किया जा रहा है अभी भी प्रक्विया देगी है जैसे कि मैंने बताया
02:49दस साल पहले जब यह शुरू किया था कैट्रिश ऑपरेशन तब रेकॉर्ड है 40,000 वैसे मश्ली निकालने का ओवर
02:57दी येर्स यह नंबर कम हुआ है इस साल
02:59जो हम कर रहे हैं अलग-अलग ब्लॉक्स में हमें कमी मांगोर मश्ली मिल रहे है इसका मतलब यही होगा
03:04कि हमारा इंटर्वेंशन पॉजितिव रहा है
03:07विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त केवला देवरास्ट्रियों ध्यान में हर साल साधे तीन सौ से अधिक प्रजाती के हजारों पक्षी
03:15आते हैं
03:15यहां प्रवास, प्रजनन और भोजन के लिए आने वाले पक्षियों का पूरा जीवन चक्र जलाशियों की सेहत पर निर्भर करता
03:23है
03:23ऐसे में मांगुर जैसी आक्रमक प्रजाती केवल एक मचली नहीं, बलकि पूरे पारिस्थित की तंत्र के लिए चुनौती बन चुकी
03:30है
03:30वन विभाग की मुहिम से इसके प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है
03:36लेकिन विशेशग्य मानते हैं कि यदि निगरानी और निशकासन अभियान रुके तो यह शिकारी मचली फिर से जीलों पर कबजा
03:43जमा सकती है
03:45भरतपूर से ETV भारत के लिए श्यामविर सिंग की रिपोर्ट
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