जिला स्थाई लोक अदालत में दायर परिवाद में सच्चाई आई सामने
सवाईमाधोपुर. जिले का सबसे बड़ा राजकीय सामान्य चिकित्सालय आज जनहित की बजाय लापरवाही और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुका है। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का अभाव, एंजियोग्राफी जैसी बुनियादी सुविधा का न होना, करोड़ों की मशीनें वर्षों से धूल खा रही हैं, महिला और बाल वार्डों में गंदगी व बदबू का आलम है, नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है और बायो मेडिकल वेस्ट खुलेआम सड़कों पर फेंका जा रहा है। मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है, गंभीर रोगियों को रैफर कर दिया जाता है और एम्बुलेंस तक अक्सर खराब रहती है। अस्पताल की यह अंदरूनी सच्चाई जिला स्थाई लोक अदालत में दायर परिवाद के दौरान उजागर हुई है।
हृदय रोगियों की हो रही दुर्दशा
अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। एंजियोग्राफी जैसी सुविधा तक नहीं है। गंभीर मरीजों को बाहर रैफर किया जाता है और कई मौतें इसी कारण हो रही हैं। यह स्थिति जिले के नागरिकों के लिए जीवन और मौत का सवाल बन चुकी है। इसी प्रकार लाखों रुपए की एक्सरे मशीनें वर्षों से अनुपयोगी पड़ी हैं। घायल मरीजों को बेड पर एक्सरे सुविधा देने के बजाय परिजन उन्हें बाहर खींचकर ले जाने को मजबूर हैं। यह लापरवाही सीधे मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है और करोड़ों की लागत धूल में पड़ी है। स्टाफ की कमी और लापरवाही डॉक्टर और नर्स समय पर नहीं आते, ड्रेस कोड का पालन नहीं होता। महिला वार्ड में सफाईकर्मी और नर्सिंग स्टाफ बेहद कम हैं। मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है और इलाज के लिए भटकना पड़ता है। यह लापरवाही सीधे मरीजों की पीड़ा को बढ़ा रही है। महिला और बाल वार्डों में गंदगी व बदबू का आलम है। घटिया सीवरेज पाइप और सफाई ठेके की लापरवाही से मरीजों को संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। अस्पताल के भीतर ही मरीजों को बीमारी का नया खतरा मिल रहा है और यह स्थिति बेहद शर्मनाक है। ...............
इनका कहना है...राजकीय सामान्य चिकित्सालय की बदहाल व्यवस्था को लेकर जिला स्थाई लोक अदालत में परिवाद पेश किया था। जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से आधा-अधूरा जवाब दिया गया है। जबकि हकीकत है कि टेलिमेडिसन सेंटर चालू नहीं है जिसके अभाव में मरीजों को रैफर किया जाता है, वहीं मोर्चरी के पीछे खुलेआम बायो मेडिकल वेस्ट खुले में डाला जाता है, जिससे लोगों का निकलना मुश्किल होता है, जबकि अस्पताल प्रशासन की ओर सबको ठीकठाक बताया गया है। ऐसे में अगली पेशी पर लोक अदालत के सामने जनहित में पूरे तथ्य रखे जाएंगे। इससे की अस्पताल की व्यवस्था में सुधार हो सकें।
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