00:00भाई तक अपने खेट गिल्गी कर दिया
00:02तो मेरी बेटी आजया इसी कुछ ना लिखना जिसको पैसे चाहिए तो जहा माले
00:10छोटे शेहर में बेटी की बड़ी उमीदे दब न जाए
00:13इसलिए नाखपुर की निजी कोचिंग में जाकर परिवार बेटी को तयारी कराने लगा
00:18किसान पिता बेटी को पढ़ाने के लिए नाखपुर में रसोये की नौकरी करने लगे
00:22ताकि बेटी को वहां रहकर साथ दे सके
00:26लेकिन नीट पेपर लीग के बाद आकांखशा ठूपने लगी
00:29कहां तो उसे परिक्षा देने के बाद लगा था कि साड़े छे सो नंबर आ जाएंगे
00:33बढ़िया कॉलेज मिलेगा
00:34आम आदमी महंती जितना भी होता है अपनी किसमत से बस डरता है
00:39हमारी लड़की पढ़ने में अच्छी है उसका यह था कि रूपको जांटर पढ़ना है
00:45और उसने पढ़ाई के रही उसकी अच्छी माल दिया आए थे
00:49साड़े छे सब के उखरे की कम नहीं थी
00:52पेपर देने के बाले लिए को लिए तियार किये थे और उसका भी सपना था कि मैं डाक्टर होनूंगी
01:11हम लोग का भी था और उसने अच्छे नंबर भी हमेशा लाती थी
01:16तो सिर्फ यही दूख है कि ना यह डाक्टर ही ता ना यह पीसी जन उसका होता साए
01:23इस हाल पर लाकर छोड़ दिया है कि एक माँ को लगने लगा कि काश बेटी ने डॉक्टर बनने का
01:29सपना ही ना देखा होता
01:30भले सरकार कहे कि उसने सक्त एक्षन लिया पेपर लीक वालों को छोड़ा नहीं जाएगा
01:34लेकिन चतुरवेदी परिवाद आकांखा की मौथ का जिम्मेदार केवल सरकार को मानता है
01:41इसमें मुख करूप से जिम्मेदार आप लोग किसको मानते हैं?
01:44हम जिम्मेदार सरकार को मानते हैं
01:46अगर हम अपने बच्चों को कुछ बोले होते, कुछ पिसर दिये होते
01:50तो उसका जिम्मेदार हम थे
01:52लेकिन लीक हुआ तो सरकारी हुआ जिम्मेदार है
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