00:24हजर पर अर्दो गजल रात बेह
00:28तेरी आदों का धुआ रहता है
00:35दिल के विरान मका में एक समा रहता है
00:44हजर की आग में जलते हैं खाबों के चराग
00:51आँख नम हो तो भी चहरा कहां रहता है
00:58तेरा मिलना भी मकदर में नहीं शाया दग
01:04धिर भी दिल तेरे ही कदमों पे रौवा रहता है
01:11चांद तनहा है फलक पर में जमी पर तनहा
01:17दर्द दोनों के मगदर में जवां रहता है
01:35वक्त बदला तो कई लों बदल कर बच्छडे
01:45एक तेरा ही तसूर है यहां रहता है
01:54हजर की रात सही खत्म तो हो जाएगी
02:00दिल को इस बात का बस अकर गुमा है रता है
02:08तेरा मिलना भी मकदर में नहीं शायद अब
02:14धिर भी दिल तेरे ही ददमों पे रावा रहता है
02:20चाद तन्हा है फलक पर में जमी पर तन्हा
02:27मेग दोनों के मगदर में जवान रहता है