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वारदात: हरीश राणा के आखिरी दिनों की दर्दनाक कहानी, परिवार की जुबानी

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00:06नमस्कार मैं हूं शम्स ताहर खान और आप देख रहें वारदात
00:09देश की सबसे बड़ी अदालत में उसे इज़त की मौत देने का हुप में सुनाया था
00:15देश के सबसे बड़े अस्पताल में धीरे धीरे उसकी सांसों की रफतार थामी
00:21फिर 24 मार्च को हरीश राना की आँखे और दिल की धड़कने दोनों बंध हो गए
00:28लेकिन सिर्फ कुछ वक्त के लिए क्योंकि अब हरीश की आँखे किसी और की अंधेरी दुनिया में रोशनी ला चुकी
00:36है
00:36हरीश का दिल अब किसी और के सीने में धड़क रहा है यानि हरीश मर कर भी जिन्दा है
01:12भूले तो नहीं न याद तो अब भी होगा आपको
01:20वैसे भी हरीश राना को भूलना वो भी इतनी चल्दी मुम्किन भी नहीं
01:32जो नौजवान अपनी मौत का रास्ता खोल कर खुद जैसे न जाने कितनी ही जिन्दा लाशों के लिए
01:39इस्जत की मौत का रास्ता खोल गया हो उसे भुलाया भी नहीं जा सकता
01:53तेरा सालों तक हरीश एक लाश बनकर बिस्तर पल पड़ा रहा पर इसके बावजूद उसकी आँखें अपने आजपास की हर
02:01चीज़ देख रही थी
02:06लाश बनकर भी जिन्दा यू था क्योंकि उसके दे की धड़कने तब भी धड़क रही थी
02:13देश की सबसे बड़ी अदालत के हुक्म पर देश के सबसे बड़े अस्पताल में पूरे 11 दिन तक हरीश की
02:21मौत का इलाज हुआ
02:22इलाज काम्याब रहा और 24 मार्च को हरीश की याँखी और दिल की थड़कत दोनों बंध हो गए
02:43लेकिन हरीश की इनी बोलती आँखों से हमारे इसी देश के किसी कोने में कोई है जो अब भी दुनिया
02:51देख रहा है
02:54कोई है जिसकी अंधेरी दुनिया में जाते जाते हरीश रोशनी भर गया
03:05हरीश की इनी आँखों से जिस शक्स की अंधेरी दुनिया रोशन हुई वो कौन है? क्या नाम है? किस धर्म
03:13या जात का है? कहां रहता है? क्या करता है?
03:16ये खुद हरीश के माबाप और छोटे भाई को भी नहीं बता
03:21उन्हें सुगून है कि उनके बेटे और भाई की आँखें अभी किसी की आँखें बनी हुई है
03:30उसमें बेसिकली एक इवेंट होता है उसमें सारे ऐसे डोनर्स को रिसीवर्स को बुलाया जाता है
03:34उसमें कोई यह ऐसे स्पेसिफिकली नहीं बताएंगे कि कौन है उन में से कोई एक होगा अगर वो आई होंगे
03:39तो आप ऐसे ही देख सकते हैं बट ऐसे नहीं बताते हैं कि वो कौन है क्योंकि हमारा एक एमोशनल
03:45टच हो जाता है हम भी उवीद रहेगी कि हम भी अपने भाई क
03:48कि आपके दुबारा देख पाएं जिस किसी को भी लगी है उनका भी सही है मानना कि अगर हम ऐसे
03:53जाएंगे तो सामने वाले हम तो अगर नहीं बोड़े हैं आजकल बहुत चीज़े हैं दुनिया में कोई कहते है कि
03:59कुछ भी चीज़े आगे बढ़ सकती हैं इसकलेट हो सकती
04:18चुकि हरीश के दिल की धड़कन कानून और मेडिकल साइंस की रजामंदी से बंद की गई थी डॉक्टर जानते थे
04:25कि हरीश की धड़कने कब रुकेगी लिहाजा ये भी साफ था कि अगर हरीश के घरवानों की मर्जी हो तो
04:33धड़कन रुकने के बाद भी हरीश का दिल किस
04:36किसी और को अपनी धड़कन दे सकता है हरीश के परिवार ने आखों के साथ साथ किसी और के दिल
04:45में जगा बनाने के लिए उसका दिल भी उसे दे दिया
05:02किसी और किसी और किसी और किसी और किसी और रखते हैं तो उसका कुछ दूरेशन बढ़ जाता है
05:32हरीश की मौत के बाद पहली बार हरीश के माबाप और चोटे भाई ने आज तक से बात जीत की
05:39पहली बार हरीश के परिवार ने बताया कि क्यों हरीश के लिए मौत मांगने परिवार कोट पहुँचा था
05:46कैसे हरीश की जिंदगी के आखरी तेरा साल और एम्स में वो एक ग्यारा दिन भी थे
05:59हरीश की आखरी घड़ी में क्या कुछ हुआ
06:01कैसे धीरे धीरे आखरी वक्त में हरीश का खाना और पानी पंद किया गया
06:06कैसे हरीश के छोटे भाई के सामने हरीश ने आखरी सांस ली
06:18कैसे हरीश को पूरी इज़ट के साथ एक शामिर्टी देने के बाद देश भर थे अब उन्हें फोना दे
06:26कैसे हरीश के बाद देश के अलग अलग हिस्सों में बरसों से लाश बन कर ठीर है लोगों के हिस्से
06:33ठीक वैसी ही इस्जत की मौत आई जैसे हरीश के हिस्से आए थी
06:38और हरीश के जाने के बाद अब इनकी जिन्दगी में क्या कुछ बदला है
06:43तो सुझी खुद हरीश के पिता छोटे भाई और हरीश की माँ की जुबाने
06:54एक लंबा अरसा हुआ था हरीश को इसी घर में रखाता है याद चल रहा था आपने अपने सारी जमाप
07:00को भी रगा दे ठीक होनी के उमीद महीं थी
07:03तो जब आप कोट पहली बार इस अरजी के साथ आप लोग पहुँचे कि उसे इक्षा मिर्थी दी जाए तब
07:09बहुत सारे लोगों ने शायद ये भी का होगा कि ये कैसे माबाब है
07:12सबसे पहले इस माँ के मन में ये संकल्प उठा कि आप रधान मंतरी को बोलो या राष्ट पती को
07:20बोलो
07:23मैं थोड़ी देर चुप रहा है मैं नहीं का भी ऐसा होना संबब नहीं है कोशिश करते हैं जो वहान
07:28करेंगे अच्छा करेंगे
07:30जब आप सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे और सुप्रीम कोर्ट ने जब ये कहा था कि हम बंद कमरे में सुनवाई
07:35करेंगे जो आखरी दी दिन फैसला होना था विसे तो उस कबरे में क्या बात हुई थी आपसे अईसा है
07:40बाते तो क्या हुए उन्हों ने जो हम चाह रहे थ
07:56देखा वो उन्होंने आंसू भी बहा दिये वहां मैंने अंतमे उनको ये बोला फल फ्रूट ले आई वो हमें बहुत
08:02सारा मैंने कहा जी आपकी अंतरात्मा आपकी जो रू बोले वो आप जज्जमेंट दे देना आपने इसको देख लिया ये
08:11ना बोल सकता है ना हमारी बात
08:12सुन सकता है ना ये कह सकता है ना अपनी दुख दर्द को हमें आदे तक पहुंचा सकता है वस
08:18इसकी हर घंटे कर बढ़ दो और नाली निकल जाए तो छे-छे बार भी इसकी बेट सीट चेंज करना
08:24पड़ती है और देख लो ये ट्रॉक्समी टूब बलगम निकालने के लि�
08:41कि जो होगा वो अच्छा होगा हम इस पोजिटिव थोट को ले करके चल दिये वो चलेंगे स्टेटमेंट की तेरा
08:48जनवरी को जजमेंट होगी तेरा जनवरी को हमें बुलाया था हम तीन हो गए थे जब साब नहीं है बहुत
08:53अच्छी बात कही जो हम चाह रहे थे कि यह मान
09:11यह मार्ग खुल जाता है रास्ता खुल जाता है वो आर्थिक संकट भी जहल रहे होंगे हमें पता है कि
09:17हमारी रात रात बर नीद नहीं आती थी कैसे कैसे उस मस्या का सामना करना पहले जब इसको आर्टी डली
09:26हुई थी तो तो हमें हर हवते में दो बार तीन बार एंस भा�
09:41जाता है वो यहां infection हो जाता है chest by chest हो के फिर नीचे जाता है तो ऐसे ऐसे
09:47करके फिर वो जो supreme court में ऐसे हम पहुंचे और वकीलों ने आगे process चलता रहा जज़ साब ने
09:56हमें जो हम चाह रहे थे वह यह उन्हें ने दी जब supreme court ने फैसला सुनाने से पहले आप
10:01तीन पहले जब �
10:02यह statement आई थी तो मेरे को तो सारी रहात ने दी आए कि ऐसे-एसे क्योंकि दो मेंने बाद
10:09अब जज़मेंट आई कि ऐसे-एसे वह हो गया हरी इसका जो है इस्चामरित्यू का प्रंतु इससे पहले हमने कई
10:17प्रसंद किया बे इसको ऐसा ना बोले कोई कि एक्टिव यूथ �
10:22नेसिया और हमने ही माननी है जो अदालत में बैठे थे परदी वाला नियाएधी जी हमने उनको भी कही कि
10:29मैं तो बोल रहा हूं कि इसको हम प्रकर्ति की गोद में छोड़ रहे हैं कि नेचरल डैथ ही मानी
10:34जाएगी उसका जैसे जब इनसान खाना मतलब मौत होती है तो वह �
10:41छोड़ता है तो मैंने का इसको ये ने किया जाए कि एक सक्रीय मरित्यू है इसको निस्क्रीय मरित्यू बोलेंगे जैसे
10:50कि आम आदमी छोड़ता है वो तो वह हो गई जैसे पागल कुते ने किसी इनसान को काटा और फिर
10:54वह उसके बाद वह इनसान भी पागल होता है तो उ
10:59जैसे नहीं बोला जाना चाहिए, क्योंकि ये मीडिया वाले भी सारे वही बोल रहे हैं, तो वो एक हमारी वी
11:05अंतरात्मा उसमें एक अलाउड नहीं करती है, हाँ जैसे आम आदमी छोड़ता है, वो भी अनुभवीच किछ सकों की देख
11:11रेक में, तो वो उसको रखा जाए, �
11:15और उसके बाद उन्होंने बैसे ही किया, जब तीनों को आपको बुलाया, कोट में, तो बाकाइदा जजेज बैठे हुए थे,
11:23आपकी राय उनके लिए बहुत कीमती थी, तो मैं जाना जाता हूँ कि उस वक्त उन्होंने क्या कहा था आपसे,
11:31ये जो केस है, वो तो हाई को�
11:35चली रहा है, तो I think उन्हें सारी रिपोर्ट्स अलड़ी पता ही थी कि क्या है इस केस में, और
11:39उसके पहले भी दो बार लॉक्टर्स की टीम आके चेक करके गए थी, CMOs भी आये थे, तो सब कुछ
11:45उन्हें medically, they were already ready कि ये तो हो नहीं है, बट they just wanted to be sure कि
11:51जब, क्योंकि एक medical term है
11:54कि हाँ, ये चीज होनी चाहिए, बट उसके बाद आती है family, क्योंकि वो हैं जिनका main decision है, तो
11:59बस हमसे जानने ही चाहते थे कि आप जो भी हम decision देना है, क्योंकि उन्हें पता थे हूने क्या
12:03decision देना है, बट जो हमें देना है कि आप उसमें सहमती और आप ये ही चाहते हैं, त
12:23तो बस वो आशीश एक चीज जाना चाहता हूँ, चुकि ये हाई court में पहले मामला था, reject हुआ, फिर
12:30supreme court गया, एक लंबा वक लगा इसमें, और आप लोग इसके लिए court में जा बेरे तो उदर अलग
12:36परेशानी थी, लेकिन जिस दिन ये फैसला आया, इस फैसले के बाद पह
12:53कि यहाँ ठीक है, अभी होने वाला है, तो फिर आप लोगों का पूरे परिवारगा क्या रहेगा.
13:02अजय को अजय करें, बॉद्वा कुछ चीज़े ऐसी होती है ना लाइफ में जिनका आपको समझ नहीं हाता है कि
13:06रेक्शन क्या है, या वो फीलिंगी नहीं पता होती है कि आप क्या फील करना चाते है उस टाइम पर
13:11आप जो जिस चीज के लिए आपने इतने सालों से मैनत कर
13:16आज जोसी इसका एक सही तरीके, सही उसका उटकम निकल रहा है, कि आप उसके लिए खुश हैं, या अब
13:26जो आपका बड़ा भाई है, आपका बेटा है, जिसके साथ आपने बच्पन गोजा रहा है, इतने साल आप रहे हैं,
13:32अब हमारे बीच में वो आने वाले कुछ टाम में
13:35नहीं रहे हैं, तो मैं तो चाहके भी एकस्प्लेश नी कर पाऊंगे, वो बहुत कठीन, बहुत मुश्किल, उस समय पर
13:44एक तरह आँसू भी आ रहे थे, बट उन्हें देखके लग रहा था कि शायद इनके लिए ये ठीक हो
13:50रहा है, क्योंकि हम तो उनकी सेवा करतने के बा�
14:05एक शरीर में हैं, बट वो एक जेल में हैं, और वो आपको कोई इंसान नहीं समझ सकता है।
14:49सबसे मुश्किल समय भी मैं कह सकता हूँ और मैं कही नहीं, मैं बस चाहता था कि मैं अखरी समय
14:58जो भी है भी है के साथ उसमें रहूं और इसी वज़े से मैं 11 दिन मैं वही रहा रात
15:02दिन था कि मुझे
15:05कल को यह नहीं कि जो मैंने 13 साल करा हूँ आखरी के 11 दिन मैं नहीं कर पाया और
15:09वो उससे बहुत मुश्किल था हर चीज समझाना एक ही चीज को में क्योंकि अफकॉर्स इतना पहला केस है इंडिया
15:17का उस सारी चीजों का डिसकुर्शन डॉक्टर्स के साथ
15:19को सारे मोमिर्स रिलिव करना उसके बाद फिर देखना भाया को रात दिन की मैंसी लिए चुके पहला केस था
15:25तो बहुत सारे लोग हैं जिनके सवाल दे जाना जाते जब आप एम्स ले गए तो हरीश को एक अलग
15:32कमरे में रखा गया था और शायद
15:34आप लोग महीं पर अलग कमरे मते हैं तो डेली एक मीटिंग होती थी क्या हो पूरा प्रोसिजर क्या होता
15:40था
15:41मीटिंग तो डेवन पर ही उन्होंने सबकुछ अलमोस आई डीटेल्स बट अगयां क्योंकि हम पिछले 13 सालों से कर रहे
15:46हैं तो हर उनके लिए भी यह चीज अब इसको कैसे प्रोसेस करना है मेडिकली यह प्रूवन है कि आसा
15:52ही करना है बट प्रैक्टिकली यह फर्स टाइ
16:06कि अब यह क्या हो रहा तो यही सारे डिस्केशन रहते थे कि Aaj आज हमने इनको बेट पर पत्टी
16:13प्यारा करी है अब करवग दिया है मोटव लेभल
16:16प्राज इतना है कल उतना है तो ये सारी चीजों के डिसकेशन रहें के इसारी डिसकस करके फिर वो आगे
16:21बिसी कली हमारे बिना किसी कंसेंट के या हमें बिना बताए अशा वहां पर कोई काम नहीं कोई काम नहीं
16:28कि एक पैसिफ यूतनेशिया था इसलिए उसुरू में उनने �
16:33बताया था है इसकी तरफ से भी कि कैसे वो खाना पानी ये सब कम करें तो ये गैरा दिनों
16:39में किन चर्लों में ये सारी चीजें पूर हो गी थे तक्लीव दे है लेकिन
16:55सर स्टेप्स तो सारे अल्रेड़ी अवैलिबल हैं ये सारी चीजें डिसकस करना
17:03मैं इंडिकली ऐसे ही है कि आप जब आते हैं पेशन तो उनको डे वन पे तो चैंजू जैसे घर
17:09पर आपको कैर होती है जितना खाना जाते है वैसे जाते है फिर ग्रैजुली वो उसको कम करते जाते हैं
17:17और ऐसे ही इसका अगे प्रसुस्स रहता है दस दिन वाद आप लोग
17:26कि ऐसे करते है कि अगर आप देखेंगे तो पंदरा जादा से जादा कोई एक महीने तक चल सकता है
17:36बिना खाने भीने के अधर्वाइस पांच शे दिन एक हफता दस दिन
17:39मैक्सिमम में हो जाता है उसमें क्योंकि जब इंटेक नहीं है और बॉड़ी को अंदर एनर्जी चीए काम करने के
17:46लिए और कुछ एनर्जी नहीं जा रही है तो दीरे दीरे आपके जो अर्गन्स है और आटमेटिकली शुटण होते हैं
17:53तो ऐसा नहीं था कि एक स्पेसिफिक �
17:54पर यह था इट कुड़ गों लिटल लॉंगर की वह आगे पांच-छे दिनों के लिए चला जाए लास्टे सब्से
18:03बहले डॉक्टर ने आप लोंगों को बताया था यहां महीद है नोक्टर उसने मैं था वहां पे तो उन्होंने बोला
18:09कि आप अभी थोड़े देर के लिए �
18:14अभी सुबह उन्हें बुखा राया था उसके बाद उनने बोला कि आप आज ही है अभी अपने लाट्स मोमेंट्स पे
18:21ही है तो फिर मैं गया मैंने उनका हाथ पकड़ा और उस बीच में ही फिर वो चरहिए आपके अभी
18:31पापा ने मुझे बताया था कि आपने बहुत सेवा
18:34की थी अपने बड़े भाई की सुबह उठकर उसको नहलाना धुलाना बागी देख भाल
18:42अब जाने के बाद आपकी जिन्दगी में क्या परिवर्तना है
18:56मैं पर्पसलेस हो गया हूँ लाइफ में मुझे ऐसा लगता है पहले मुझे मेरे पास कुछ थास हुग उठके शुरू
19:04में तो मुश्किल था बट उसके बाद लगा कि शायद ऐसा ही है और फिर वो इतने सालों से करा
19:09है कि वो बहुत नॉमलालाइज होने लगा तो लगा कि
19:13कि शायद बड़े बाई की सेवा करना ही मेरा करतव यह और जो मैंने कारा अब ऐसा लगता है कि
19:19अब लाइफ में परपस कुछ बचानी है कि अब मुझे आगे क्या करना है कि मुझे लगता है शायद लाइफ
19:24यही है कि उतना है करना है और फिर तो मुझे लगता है अब ही त
19:41तब इतनी चीजे हुई है
19:43I don't know
19:45मैं अभी still figure out कर रहा हूं इस चीज को
19:48जब यह पढ़ने कहते तब आप दोनों की ओम कितनी थी?
19:52मैं 12th में था
19:53जब भया पढ़ने कहते तब तो मैं 9th या 10th में था
19:57तब दोनों के एक में कितना difference था?
20:00तीन साल भया, 90
20:01तो तब तक आप लोग यहां होंगे तब तो एक फ्रेंड कितरा ही?
20:06Actually, भया तो पापा जैसे ही थे, सच बता हूंगा
20:09मेर को इतना डर पापा से नहीं लगता है
20:11आज भी इतना भया से लगता था उस समय भी
20:14यह एक टाइम था जब तक भया भी गए नहीं थे चंडीगर
20:17उस समय तक भया बहुत डरता
20:19बहुत ऐसा कि कुछ भी हो अगर सुपह नहीं भी उठ रहे हैं
20:23तो मम्मी फोन करके बोल रहे हैं
20:25कि यह उठ नहीं रहे हैं
20:26तो फोन पे बोलते रोड जाओ
20:28तो इतना डरता कि हम पोन से डर के उठ जाते थे
20:30बटो इवेंचली जब भाहर गए उन्होंने लाइक देखी तो वो चेंज वाओ
20:34फिर आने के बाद वो दोस्तों की तरह रहते थे
20:36एकदम जाना चिल करना
20:38बता कैसा चल रहा है
20:39क्या है बताना की
20:41प्लान करना की
21:01तेरा साल बना में ग्यारा दिन
21:04वो तेरा साल जो हरीश ने जिन्दा लाश बन कर काटी
21:08और वो ग्यारा दिन
21:09जो हरीश ने एमस में बिताए
21:12हरीश की मा की पूरी सिंदगी
21:14अब इनी तेरा सालों
21:16और ग्यारा दिनों में सिमट कर रह गई हरीश के
21:20पिता और भाई के बाद, अब हरीश की मा की जस्पात.
21:51जो लगे रहते थे पूरा दिन, शेवा गनना, खाना देना, कभी करवड़ देनी, कभी कुछ करना, आप कुछ है ही
21:58नहीं हमारे पास करने के लिए है.
22:00जितन हरीश को यहां से लेकर गए, जितन इस घर में आखरी दिन था, वो रात जब एक बची होगी,
22:07तो वो तो बड़ी काट रही होगी, कैसे क्या होगा?
22:30जितने निकल गए, आप नहीं आएगी, जिजमेंटर नहीं आएगी, पर उसको दुखों को देख के लगता था भी, बगवान जज
22:36के मुह से ऐसा फैसला है, जो मतलि स्केत में हो, तो कि हाल है, तो देखो आप इतनी गर्मी
22:42पड़ी है, इतनी गर्मी में पुरा हाल, बजली
22:45चली जाए तो पुरा यहां तो चलो, फिर भी यह था, बिजली जाती है, तो जिन्रेटर चलता है, पर कई
22:50बार ऐसे होता था, बिजली नहीं आती थी, तो उसकी जो लगाया हो था, एर मैटरस बंद हो जाता था,
22:57उसकी जखम में बले डाने लग पलता था, चादरें खराब
23:01बज़त की दी, पुरा हाल होता है, तो उस दुख को देखे तो ऐसे लगता है, बगवान बास साब, जो
23:0811 दिन होस्पिटल में रहे थी हरिश, और उस हर 11 दिन में एक दूआ ये भी थी कि जल्दी
23:14कुबूल हो जाए, और हरिश चला जाए, और दुख ये भी था कि जब चला
23:29था में, हम खुद खा रहे थे, उसको पानी के जरी रखा हुगा था, और बजारा ना बोल सकता, ना
23:36स्वाज शारी चीजे बंद कर रहे थे, कई लोग तो बोले थे, पाई पे निकाल दी थी, पर पाई पे
23:42बोले थे, कुछ नहीं निकाला होगा था, सब कुछ बैसे था, द
23:59चाई पी लो रोटी कालो, वह मन ही नहीं करता था, जो हम कुछ खाएं इसके सामें, नहीं जाता था,
24:04वह हमें ग्यारा दिन तेरह साल से भी जादा लगे, ऐसे लग रहा था था, इतना दो तेरह साल में,
24:10इथा भी हम टाइम से खाना देते थे, टैम से उसकी के वहां तो हम �
24:15गए, और कुछ अपनी मर्जी से कारवनी सकते थे, और ऐसे लग रहा था, जैसे उसको जब भूखा था, जैसे
24:22लग रहा था, जब आप लाओ और दे दो उसको, यह नहीं देखा जा रहा था, जब डॉक्टर उने वो
24:28आखिरी सांस ली होगी है रिश ने और कहा आपको किया
24:32जब आपको एक ख़वर मिली पर बताया नहीं बच्चों ने, हमें नहीं बताया, मैंने जाना था, सुबह जाना था, जैसे
24:40नहीं मना कर दी थी, मैंने करे मम्मी आपना दुपहर के बाहद आना, पर मेर को लग रहा था, वही
24:45बासा जादा नहीं है, एक दो दिन का मैंवाने
25:02तो वारदात की इस खास पेशकर्स में फिलहाल इतना ही, देश और दुनिया की बागी खबरों के लिए, आप देखते
25:08रही आज तक
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