00:04शाम का वक्त था
00:06कस्बे से दूर बसे
00:08पुराने गाउं भैरबपूर की कलियां
00:11हर रोज की तरह
00:12सुन्सान हो चुकी थी
00:14आस्मान में
00:16खलके पादल थे
00:17और ठंडी हवा के जोंके
00:20पुरानी हवेली की
00:22तूटी खिड़कियों से
00:23संसनाहट पैदा कर रहे थे
00:26ताओं के लोग
00:28इस हवेली के पास से भी
00:30नहीं गुजरते थे
00:31कहते हैं यहां अजीब अजीब
00:34आहटें सुनाई देती है
00:36जैसे कोई अंदेखा
00:38इंसान आसपास
00:40घूम रहा हो
00:41रीना अपने दोस्तों के साथ
00:44गाउं घूमने आई थी
00:45सबने मजाक मजाक में कहा
00:48चल रीना तू तो बहुत भादूर बनती है
00:51अगर सच में हिम्मत है तो फिर
00:53हवेली के अंदर चल
00:56मुझे किसे रर लगेगा
00:57भूत वो जैसी कोई शीज नहीं होती
01:00रीना
01:01अकेली हवेली के अंदर चली गई
01:04टार्च की रोशनी
01:06टूटी दिवारों पर पड़ते ही
01:08डरावनी परचाईयां
01:10बनने लगी
01:11वो चौक कर पलटी
01:13वहाँ कोई नहीं था
01:16इशायद मेरे दोस्तों
01:18ने भुजार किया होगा
01:19लेकिन अगले हिपल
01:21उसने टार्च की रोशनी में देखा
01:24दिवार पर उसके अलावा
01:26एक और पर चाई हिल रही थी
01:29रिना की सांसे
01:31तेज हो गई
01:33उसने धीरे से पुकारा
01:35को ने वा
01:37पर कोई जवाव नहीं मिला
01:40बस धीरे धीरे कदमों की आहट
01:43पास आने लगी
01:45वो भाग कर बाहर निकली
01:48दोस्त हस पड़े
01:52क्या हुआ
01:53रंग उड़ गया चेहरे से
01:55रिना कापती आवाज में बोली
01:59नहीं अंदर कोई था
02:01दोस्तों ने मजाक उड़ा दिया
02:04लेकिन उस दिन के बाद से
02:05रिना के साथ
02:07अजीब खटनाए होने लगी
02:09कभी रात में उसके कमरे में
02:12किसी के चलने की आवाज आती
02:14कभी शीशे में
02:16उसके पीछे कोई धुंदली
02:19परचाई दिखाई देती
02:20गाउ का नाई
02:22रखू रोज रात को
02:25देर तक दुकान बन करता
02:26एक दिन
02:28जब वो तालाब के किनारे से
02:30खर जा रहा था
02:31तो उसे लगा
02:32कोई उसके पीछे पीछे चल रहा है
02:38पर कोई जवाब नहीं
02:41वो तेज कदमों से चलने लगा
02:44लेकिन नाहट भी
02:46उतनी ही तेज हो गई
02:48अचानक
02:49उसके सामने एक सफेद साया
02:52खड़ा हो गया
02:53आँखे गहरी हरी चमक रही थी
02:56रगू
02:58तेरा समय आ गया है
03:00तो बच नहीं पाएगा
03:02रगू
03:04जोर से चलाया
03:06और भाग खड़ा हुआ
03:07अगली दिन गाउवालों ने देखा
03:10रगू पागल सा हो गया था
03:13वो बार बार कहता
03:17आठ
03:17आठ मुझे ले जाएगी
03:20आठ मुझे ले जाएगी
03:23अनिरद गाउव के
03:24स्कूल में मास्टर था
03:26वो भूत प्रेत में
03:28बिश्वास नहीं करता था
03:30लेकिन एक रात
03:31जब वो हवेली के बास से
03:34लोट रहा था
03:35तो उसने साफ साफ सुना
03:37जैसे भारी जूदों की आवाज
03:40उसके पीछे से आ रही हो
03:42अरे ये कैसी आवाज है
03:44यहां तो कोई और नहीं है
03:46वो मुड़ा
03:48लेकिन पीछे
03:49सिर्फ खाली सड़क थी
03:52फिर अचानक
03:53उसके कान में किसी ने फुस फुस आया
03:56तो बच नहीं पाएगा
04:00रीना, रगू और अनिरुद
04:02तीनों अलग-अलग लोग थे
04:04लेकिन सब ने
04:06एक ही चीज
04:07महसूस की
04:09और वो थी
04:10आहट
04:11गाउं में धीरे धीरे डर फैलने लगा
04:14लोग कहने लगे
04:16कि हवेली में दबे
04:18किसी रहसे की वज़ा से
04:20ये सब कुछ हो रहा है
04:22गाउं भैरपुर में
04:24अब हर कोई
04:25हवेली का नाम लेते ही
04:28सिहरुटा
04:29रीना का चहरा
04:31अब पीला पड़ चुका था
04:33रगु पागल बन की हद तक
04:36डर चुका था
04:37और अनिरुद मास्टर भी
04:39अब रात को अकेले निकलने से
04:42कत्राने लगा था
04:44लेकिन
04:45ये डर यही नहीं रुका
04:48सविता रोज रात को
04:49अपने आंगन में तुलसी को
04:52दिया चलाती थी
04:53उस रात भी
04:54उसने वैसा ही किया
04:57लेकिन जैसे ही दिया चलाया
04:59उसे लगा
05:01मानो आंगन में कोई खड़ा है
05:03कौन है वहाँ
05:05अंधेरे में
05:07कुछ भी नहीं दिखा
05:08लेकिन हवा का एक देश जोका आया
05:12और दिया बुझ गया
05:14सविता ने माचिस चलाई
05:16तब ही देखा
05:18आंगन के कोने में
05:20एक आरत खड़ी थी
05:21काली साड़ी में
05:23बाल बिखरे हुए
05:25हे बगबान
05:27वो आरत धीरे धीरे आगे बढ़ी
05:29और उसके कान में फुस फुस आई
05:32आर सुनो
05:34आर सुनो
05:36तुमें कोई लेने आरा है
05:39सविता चीक पढ़ी
05:42घरवाले दोड़े
05:44लेकिन
05:45वहां कोई नहीं था
05:47अगर यहां कोई आत्मा है
05:49तो आज मैं उसे शांती दूँगा
05:52वो मंत्र पढ़ने लगा
05:54तब ही हवेली की सीडियों पर
05:57धीमे धीमे कदमों की आवाज आई
06:00कोने वहां?
06:02कोई जवाब नहीं
06:04लेकिन अचानक
06:05उसके सामने लोही की चंजीर
06:08अपने हाप हिलने लगी
06:10मोहन
06:12खबरा गया
06:13लेकिन हिम्मत करके
06:15मंत्र पढ़ता रहा
06:17तब ही दिवार पर
06:19खोन से लिखा उभर आया
06:22आड़ से बचना ना मुम्किन है
06:25मोहन के हाथ से माला गिर गई
06:28वो भागते भागते
06:30गाउं लोटा
06:31ये जगा अशुब है
06:33वहाँ कोई अंदेखी शक्ती है
06:36अमर गाउं और कस्बे के बीच
06:39बस चलाता था
06:40एक रात उसकी बस में
06:44कोई भी यात्री नहीं था
06:46बस सुनसान सडक से गुजर रही थी
06:49अचानक उसने देखा
06:51बस की पिछली सीट पर
06:54कोई बैठा है
06:56उसने शीशे में देखा
06:58सफेद कपड़े पहने एक आदमी
07:01जिसका चहरा धुंदला था
07:04अरे कौन है
07:05टिकर तो लो
07:07कोई जवाब नहीं
07:09अमर बस रोक कर पीछे गया
07:12सीट खाली थी
07:14वो लोट कर ड्राइवर सीट पर बैठा
07:17तभी
07:18उसके कान में आवाज आई
07:20बस चलते रहो
07:22आखरी मंजिल तो मेरे पास है
07:25अमर की हालत
07:27खराब हो गई
07:29उस दिन के बाद उसने रात में
07:32बस चलाना ही छोड़ दिया
07:34गाउवालों की तहशत सुनकर
07:36पुलेस ने जाच के लिए
07:39DCP अरविंद को भेजा
07:41अरविंद
07:42बहुत तरक संगत इंसान था
07:45भूद प्रेद की बातों पर
07:48हसता रहता था
07:49अरे ये सब अनविश्वास है
07:51मैं खुद हवेली जाऊंगा और दिखूंगा
07:54रात को वो डॉच लेकर
07:56हवेली पहुचा
07:58दिवारें
07:59खंडार हो चुकी थी
08:01लेकिन अचानक
08:02सीडियों पर भारी कदमों की आहट गूँजी
08:06रुगो
08:07कौने वाँ
08:08उसने टौर चलाई
08:10सामने कोई भी नहीं था
08:13लेकिन अगले ही पल
08:15उसे लगा जैसे किसी ने
08:17उसके कंधे पर
08:18हाथ रखा हो
08:20वो पल्टा
08:22वाँ सिर्फ हवा थी
08:24फिर उसने कानों में साफ सुना
08:27तू सच जानना चाहता है
08:29तो तैखाने में होता है
08:32अब तक
08:33अलग अलग लोगों ने
08:34अलग अलग तरीके से
08:36आहट सुनी थी
08:38सब खटनाएं
08:40अलग अलग थी
08:41लेकिन एक ही बिंदू पर जाकर चुड़ती थी
08:44आहट
08:45मुझे लगता है
08:46हवेले में कुछ राज शिपा है
08:48जब तक पता नहीं चलेगा
08:50ये सब हमें चैन से नहीं चीने देंगे
08:53अरे तू पागल होग ये क्या
08:55तू फिर से वहाँ जाना चाती है
08:57हाँ अगर सचाई सामने नहीं आई
08:59तो ये आहटे हमें ऐसे ही डराती रहेगी
09:02गाउं भैरपुर
09:04अब तहशत का पर्याई बन चुका था
09:07लोग रात को घर से बाहर निकलना बन कर चुके थे
09:11हर कोई वही संता
09:14धीमे कदमों की आहट
09:16रीना का डर
09:18अब जिग्यासा में बदल चुका था
09:20उसने दय किया
09:22कि वो हवेली के दैखाने तक जाएगी
09:25लेकिन अकेले जाना
09:27मुमके नहीं था
09:29उसने अंकित
09:31मास्टर अनिरुद
09:32और पुलिस अधिकारी अर्विंच से मदद वांगी
09:36हमें सच को पता लगाने होगा
09:38वरना यह आहटे
09:39हमें सिंदा खाजाएंगी
09:41ठीक है
09:42मैं पुलिस वाला हूँ
09:44पीछे हटना मेरे बस का रही
09:45चलो
09:46आज रात तहकाने में उतरते हैं
09:49रात के बारा बजे
09:51चारोन लोग हवेली पहुँचे
09:54अंदर सनाटा ऐसा था
09:56कि अपने दिल की धड़कन तक सुनाई दे रही थी
10:00अचानक सीडियों पर वही आवाज गोंजी
10:04रीना का हाथ कांपने लगा
10:06अरे डर्मत हम सब साथ हैं न
10:09सब लोग तहकाने की तरफ चलो
10:11हवेली के पीछे एक पुराना लोहे का तरवाजा था
10:15जिस पर जंग लगी थी
10:18अर्विंद ने जोर से ठका दिया
10:20तरवाजा चर्मरा देंवे खुला
10:23और बदबू का एक तेज जोका आया
10:27सेडियां नीचे अंधेरे में उतर रही थी
10:31चारों लोग नीचे उतरे
10:33तैखाना ठंडा और सीलन भरा था
10:37दिवारों पर काई जमी थी
10:40और बीचों बीच एक टूटी चौकी रखी थी
10:43देखोगा
10:44दिवार पर खोन से लिखा था
10:54ये सब किसने लिखाओगा
10:56तभी तैखाने के कोने से
10:58एक सफेद धुंदला साया उपरा
11:01सब के काउनों में
11:04वही आहट गोंजी
11:06मैं सवेली की माल के ललिता हूँ
11:09सो साल पहले
11:10मेरे पतीने लालश में मुझे
11:13यही जिन्दा दफरा दिया था
11:15मेरे चीके
11:17मेरे कदमों के आहट
11:18सबी ही गोंज दी रही
11:21रीना की आँखे
11:22फटी की फटी रह गई
11:24तो ये सारी घटना है
11:26वही आहट
11:28हाँ
11:29अचानक तैखाने की दिवारें
11:32हिलने लगी
11:33छट से मिट्टी किरने लगी
11:37यह क्या हो रहा है
11:39मेरे श्राप अरंध है
11:41जो सच चालता है
11:43वो भी आहट से बच नहीं सकता
11:50अचारों बाहर भागने लगे
11:52लेकिन
11:53हर तरफ से आहट की आवाज आने लगी
11:57कभी पास
11:58कभी दूर
11:59कभी उपर
12:01कभी नीचे
12:02सभी हवेली से बाहर आने लगे
12:05तभी अर्विंद ने
12:07सब से कहा
12:09अगर हम इस हवेली को ही चला दें
12:11तो शायद
12:12लालिता का दफन शरीद भी चलकर
12:14मुक्ति पालेगा
12:15और आहट का ये पूरा किस्सा ही खतम हो जाएगा
12:18उसके बाद सबने मिलकर
12:20पूरी हवेली में आँख लका दी
12:23और सभी
12:24हवेली से बाहर निकला आए
12:27हमने सुना
12:29भी था कि हवेली की
12:31माल के नचानक गायब हो गई थी
12:34असल में उसे मार दिया कया था
12:37फिर अगले दिन
12:38लोगों ने हवेली में सामोहित पूजा करवाई
12:42उस दिन पहली बार कई सालों बाद
12:45गाउ में रात शांती से पीती
12:49लेकन
12:50कुछ दिनों बाद
12:52रिना अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी
12:55खिड़की से
12:56थंडी हवा आई
12:58अचानक उसे लगा
13:00जैसे कमरे के कोने से
13:03धीरे धीरे कदमों की आहाटा रही है
13:06उसने कापते हुए कहा
13:08कोई जवाब नहीं मिला
13:11बस
13:13वही आवास
13:14रिना की आखों में
13:17डर फिर से उतराया
13:19भेरपूर गाउं में
13:21हवेली का रहस्य तो खुल गया
13:23लेकिन आहाट
13:25अब भी सिंदा है
13:27कहते हैं
13:29जो एक बार ये आवाज सुन लेता है
13:31उसकी सिंदगी
13:33कभी पहले जैसी नहीं रहती
13:35आहाट सिर्फ एक आवाज नहीं
13:38बलकि एक अंधे का साया है
13:41जो हर जगा आपके
13:43पीछे पीछे चलता है
13:44बस कभी वो आहाट सुनाई देती है
13:47और कभी नहीं सुनाई देती
13:49पर डर की दस तक लेकर आहाट
13:52सभी के हासपास
13:54चलती रहती है
13:57हमें पूरा यकीन है दोस्तों
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