00:00बिल्कुल तर्याव साब अभी कुछ दिर पहले आपने यूए का जिक्र किया था अक्सर ये बात हो रही है यूए
00:06तो एक मुस्लिम बाहुल देश है मुस्लिम उसकी एक पहचान है लेकिन फिर भी वो इसराइल और अमेरिका के खेमे
00:28में ज्यादा दिख रहा है और इरान उसे
00:29जोई बात है कि यूए ने अबराःम अकोर्ड पे भी सिखनेचर का रखे हैं अबराम अकोर्ड के बारे मैं बता
00:35देता हूं कि यह दर असल अबराहम जो तीनों हीी रिलेजन है
00:53ये लगबख शिम्बला समझाता जैसा ही है कि आप से बात चित करेंगे, संपर्क बढ़ाएंगे लोगों के बीच में, तो
01:01ये अबराम अकॉर्ड भी वैसा ही है कि हम एक दूस्य का सम्मान करेंगे और हम एक दूस्से देश्व में
01:07एमबेसिस स्थापित करेंगे, बहुत सार
01:22हैं और दूसरा ये है कि ये गुईने चुने देशों में जो अमेरिका के
01:27हिसाफ से इसराइल के करीब जाना जाता है तो इरान पहले से ही
01:31चिड़ा हुआ है दर असल यूई क्योंकि अभी हमें ये भी पता है
01:35कि वो ओपेक से भी बाहर निकल गया तो ये तमाम चीज़े हैं जो कि इरान के
01:39इंटरेस्ट के किलाब जाती है अगर इसराइल को धीरे धीरे अगर मालो मानिता मिलने
01:44लगेगी तो कहीं न कहीं इरान का जो दाइरा है वो सिमित होगा और जितने भी जो
01:50मुस्लिम मुमालिक हैं उसमें उसकी जो पैठ है वो भी कम होगी और इसराइल का जो स्विकाजिता है
01:56इसराइल एज अ कंट्री उसकी एकसेप्टेंस पड़ेगी और वो इसराइल नहीं चाहता है
02:12अगर ऐसा नहीं करेंगे तो अगला निशाना जो है वो देश होंगे और उन्हें नहीं कहा है कि ढाल ना
02:18बने
02:18इरान ने अभी जो उनके जो चीफ स्पिरिचल लीडर है उनकी तरब से यह बायाना है
02:27बिल्कुल एक बात और बार बार उठ रही है तिजावस सहब कहा जा रहा है कि अमेरिका और उसके सहयोगी
02:33देश यह चाहते हैं
02:34कि इरान इतना ज़्यादा कमजोर हो जाए आर्थिक तोर पर बाकी चीजें कि वो खुद ही सारे आफर मान ले
02:40अभी मैं ख़वर पढ़ रहा था तो इरान की और से प्रस्ताव दिया जा रहा है कि अगर दोनों की
02:46बीच में कोई डील होती भी है
02:47तो हमारे जो 24 अरॉट डालर फसे हुएं पैसा आपने फ्रीज कर रखा है उन्हें आप वापस कीजिए दो किष्टों
02:53में बारा बारा करके
02:54तो इरान तो भी आर्थिक संकट का सामना करी रहा है अभी जनौरी में ही परदर्शन हुए थे देश पर
02:59में सबने देखा था क्या कुछ हुआ था
03:01युद्ध हुआ बहुत सारा नुकसान इसमें हुआ है अभी उसे टाइम चाहिए रिकवर करने के लिए लेकिन अगर फिर से
03:06युद्ध शुरू होता है तो हालात और ज्यादा बत्तर हो जाएंगी तो क्या आपको लगता है कि लंबी लडाई खीच
03:12कर अमेरिका ये चाहता ह
03:14है कि इरान उसकी हर बात माल ले बिल्कुल यूजना तो यही है खास कर और उसमें डर का शाय
03:23बना है रखना बार बार लड़ाई करते रहना ताकि उसका जो आर्थिक विकास से वो पूरी तरीके से ठब हो
03:29जाए रण निती यही है और इस तरीके से अमेरिका ये सोचता है कि
03:34इरान में आंतरिक विद्रोथ पर नहोगा सरकार के खिलाप आवाज आएगी कि आपकी नीतियों के कारण हम बरबाद हो रहे
03:41हैं इरान को जो प्रॉस्परस जो जो प्रॉस्परेटी मिलनी चाहिए वो नहीं मिल पा रही है और इसके लिए जो
03:49वर्तमान सरकार है जो जो 79 के �
03:59इरान को पुरी तरीके से आर्थिक तोर पर तोड़ दिया जाए और इरान के अंदर इसका दबाव भी है ऐसा
04:05नहीं है कि इरान की अर्थ जो इतने लंबे समय से जो अमेरिकी प्रतिवन्द जेहल रही है अब तो और
04:11भी बड़े इस तरह पर इरान को चारो तरफ से उन्हों
04:15ने मतलब एक तरीके से ब्लॉकेड वाली स्तती में अमेरिका ने ला दिया जहाना तो सामान जा सकता है न
04:23वो बेज सकता है जब पूरी तरीके से व्यापार ही अप है तो फिर इरान के लिए कैसे कमाई होगी
04:30क्योंकि कमाई का जर्या ही तो तेल है और अगर वही नहीं जाए
04:33तब तो बहुत ही मुश्किल हो जाएगी तो अमेरिका यही चाहता है कि आर्थिक रूप से उसकी कमर तोड़ दी
04:40जाए ताकि एरान जो है वह खुद अपने आप भी जुपकर अमेरिका के हिसाब से चलने लगेगा व्यागव साथ बिल्कुल
04:49तेजाव साथ लेकिन एक सवाल �
04:51कि अमेरिका और उनके सहयोगी देशों पर क्या वैश्विक दबाओ का असर नहीं पड़ रहा जैसे अभी जो नए हमले
04:58हुए है उसके बाद कच्छे तेल के दामों में बढ़ोतरी फिरसे हो गई दुनिया भर के जायतर देश परिसान है
05:03इस वाली जंग से हमने देखा था �
05:05यूरोप और नेटों के कैसे बयान आए थी जब जंग शुरू हुई थी उसके बाद से लेकिन ऐसा क्यों लग
05:10रहा है कि टरंप बिल्कुल ही उनको इन चीजों से कोई ही दिक्कत नहीं हो रही उनको जरा सभी फर्क
05:16नहीं पड़ रहा दवाव कौन मानता है जो कमजोर होता
05:50तो यहिजों कमजोर दैश होते हैं वो अमरीका का भी दवाव मानता है वो अमिरिका का भी दवा मानता है
05:59पाकिस्तान के आलते हो इह जाता है कि जाता है है
06:03पाकिस्तान अब्राम अपोर्ड पे अस्ताक्षर कर ले जबकि पाकिस्तान ने इस्राइल को उसके पासपोर्ट पे लिखा होता है कि इस्राइल
06:11के अलावा हर देश में जाने के अनुमती इस पासपोर्ट क्योंकि वो इस्राइल को कोई देश ही नहीं मानता है
06:16मुल्क ही नहीं
06:33तो आपके हिसाब से जंग की चाहा तभी किसके अंदर होगी, नेतन्याहों तो चाह रहे होंगी कि ये सब ना
06:38रुके, चलता ही रहे लगातार, आपको दुनिया के जो बड़े देश हैं, चीन और रूस की क्या मनशा होगी, वो
06:45क्या चाह रहे होंगे, कि ये सब रुके ये चल
07:03अपने हमला कर लिया, तो ये सब कुछ जब क्यूबा में उसने मिसाइले तेनाब कर दी थी, तो वो पूरी
07:12तरीके से तयार था कि अगर अमरीका हमला करेगा, तो हम उसके हमला करेंगे, रूस के जो संगरक्षित देश थे
07:19उसकी तरफ, न तो वेस्टर्ण देशों को देख
07:33पूरी तरीके से जो स्वास का समराज्य है, और उसमें रूस और चीन दोनों ही किसी भी तरीके की कोई
07:41बाउंडरी खीशने के पक्ष में नहीं है, और ऐसे में जो ये तमाम देश हैं पर ये भी नहीं चाहता
07:48है, क्योंकि रूस का जो पश्चिम एशिया में दाइरा लगात
07:52सिमित हो रहता जा रहा है, पहले जो सीरिया में रूस के पक्ष की सरकार थे, देरे देरे सीरिया में
07:57जो बसर और असद को हटा के नहीं, जो हैं उनका समराज्य आया तो वह रूस के मुफीद नहीं है,
08:06गाजा में पूरी तरीके से उन्होंने जो भयानक नरसहां करके उसको �
08:10में नाबूद कर दिया है ऐसे ही इरान में चीन का काफी जबरदस इंवेस्टमेंट था उसको भी काफी नुकसान पहुंचा
08:17है तो यह देश यह तो नहीं चाते हैं कि पूरा-पुरा पश्चिम एशिया है वो अमेरिका की गोद में
08:23चला जाए या अमेरिका की गुलामी में च
08:30दाहिर है पर वो यह भी चाते हैं कि अमेरिका अगर यहां से चला जाता है तो उनका जो बचा
08:36पुछा जो वर्चस है वह कम से कम इस रीजन पर बना रहे हैं पर अमेरिका अभी इतना ताकतवर है
08:43और इन सब देशों को देने की स्थिमें हैं कि जो पश्चिम एशिया में उ
08:59कुछ करना नहीं चाहते हैं इस्राइल तो जाहेगा कि लड़ाई हो क्योंकि इरान के कारण इस्राइल का अस्तित्व संकट में
09:07आता है और ठीक वैसे ही जो खास कर जो यूरोपियन डेश हैं वो भी चाहते हैं कि अमरीकी जो
09:17है वहाँ पे सपल हो क्योंकि उनको बिना लड़े
09:21पश्ची मेशिया में उनके मुताबिक सब कुछ हो रहा है तो जो यूरोपियन देश है वो ये चाहेंगे भारत बिल्कुल
09:29ऐसा नहीं चाहेगा भारत शांती चाहेगा क्योंकि भारत के जो पाव हैं जो मीदे हैं चाहे वो IMEC प्रोजक्ट हो
09:38जो पूरा भारत को एक तरीक
09:55बिल्कुल एक बात और होती है तिजाव सहाब हो ये है कि क्या टरंप शासन या फिर अमेरिका में जो
10:02भी राश्टपती रहते हैं क्या वो दूसरे देशों की जन भावनाओं का ख्याल नहीं रखते हैं क्या उनको ये पता
10:09नहीं होता जैसे अभी हम पाकिस्तान की बात कर र
10:48बिल्कुल ये तो प्रकरती होती है
10:51विश्वाद की जब अंग्रेजियों का यहां पर भारत में रास था तो कहां जन भावनाओं का ख्याल करते थे उनको
10:59खाली अतने फायदे से मतलब होता था नहीं तो इतने बड़े-बड़े जन अंदोलन नहीं होते
11:03है 1942 का जोड़ा अंदोलन से लेकर लगाता जो अंदोलन हो रहे थे बारत में तो वह जन भावनाओं का
11:11ही तो उभार था जो कि उन सामरजिवादी देशों के खिलाफ था उतनी वेश्वाद के खिलाफ था तो अमेरिका को
11:19केवल एक ही जन भावना का असल पड़ता है वो है �
11:29अगर यूके में या ब्रिटेन में अगर सब्ता परिवर्तम होता है तो जो ब्रिटेन की सरकार थी वो यूके या
11:36ब्रिटेन के लोगों के लिए रैस्पोंसिबल थी ना कि भारत के लोगों के लिए और इसलिए भारत के लोगों ने
11:42आजादी की लड़ाई लड़ी कि हमें �
11:44इसी सरकार चीए जो भारती जन्भावनाओं का खयाल करें तो क्यूंकि बाकी तमाम देशों से
11:51अमरिकन प्रिजिडेंट्स को वोट नहीं मिलते हैं तो वो रैस्पोंसिबल भी खली अमरिकन
11:58पोपुलेशन और अमरिकन लोगों के लिए ही हैं तो वो न तो पाकिस्तान की जन्भावनाओं का खयाल करेंगे
12:03न वे भारत की जन भामना को खयाल करेंगे और न इरानी लोगों की
12:07एक तरफ जैसे ही वो कहते हैं कि मादद आ रही है
12:10पर दूसरी तरफ जब इरा की जनता उनके खिलाप हो जाएगी
12:14तो वो उन पे बंबार्डमेंट करने से भी नहीं रुखेंगे
12:17यह वो ही है जो प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं
12:20उनी लोगों के घरोनी के रिलेटिह वापस उन पे हमला करने में भी अमेरिका नहीं चुकाएगा
12:25तो जन भामनाओं की कद्र नहीं होती और यह दरसल एक जो प्रजात अंत्र
12:33जो कभी-कभी मानविता का चहरा लेके आता है उसके पीछे जो पुंजिवाद का और उपनिवेशवाद का जो भयानक चहरा
12:40है
12:41वह इसके पीछे हैं जो कि कभी दुनिया को शांत नहीं रहने देंगे
12:45और इसलिए बहुत सारे विचारक इससे बहतर शाषन प्रणाली के लिए कोशिश करते रहें
12:52सामिवाद आया पर वह सफल नहीं रहा क्योंकि वह उतना व्यवारिक नहीं था
12:56तो अभी पुंजिवादी जो देश है वो इसी रूप में गंता की भावनाओं का
13:03जो उनके देश से संबने इतना है निरादर करते रहेंगे
Comments