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क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर से जंग शुरू हो सकती है? क्या ईरान ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है? क्या डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति को ईरान समझ चुका है? इस वीडियो में जानिए US-Iran तनाव से जुड़ी हर बड़ी अपडेट, मध्य पूर्व की बदलती स्थिति, ईरान की तैयारी, अमेरिका की रणनीति और आगे क्या हो सकता है। क्या दुनिया एक नए बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रही है? पूरी जानकारी और विश्लेषण के लिए वीडियो अंत तक देखें। US-Iran War Update, Middle East Tension और Global Politics से जुड़ी बड़ी खबरें यहां जानिए।

Will the US-Iran conflict erupt again? Has Iran completed preparations for another round of confrontation? Reports suggest growing tensions between Washington and Tehran as questions rise over strategy, military readiness, and future developments. Is Iran planning a surprise response? What could Donald Trump’s next move be? In this video, we break down the latest updates, strategic signals, geopolitical developments, and what experts are saying about the possibility of another major escalation. Watch the full analysis on US-Iran tensions, Middle East developments, and the global impact of any future conflict. Stay tuned for the latest war updates.

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~HT.318~PR.540~VG.HM~

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00:00बिल्कुल तर्याव साब अभी कुछ दिर पहले आपने यूए का जिक्र किया था अक्सर ये बात हो रही है यूए
00:06तो एक मुस्लिम बाहुल देश है मुस्लिम उसकी एक पहचान है लेकिन फिर भी वो इसराइल और अमेरिका के खेमे
00:28में ज्यादा दिख रहा है और इरान उसे
00:29जोई बात है कि यूए ने अबराःम अकोर्ड पे भी सिखनेचर का रखे हैं अबराम अकोर्ड के बारे मैं बता
00:35देता हूं कि यह दर असल अबराहम जो तीनों हीी रिलेजन है
00:53ये लगबख शिम्बला समझाता जैसा ही है कि आप से बात चित करेंगे, संपर्क बढ़ाएंगे लोगों के बीच में, तो
01:01ये अबराम अकॉर्ड भी वैसा ही है कि हम एक दूस्य का सम्मान करेंगे और हम एक दूस्से देश्व में
01:07एमबेसिस स्थापित करेंगे, बहुत सार
01:22हैं और दूसरा ये है कि ये गुईने चुने देशों में जो अमेरिका के
01:27हिसाफ से इसराइल के करीब जाना जाता है तो इरान पहले से ही
01:31चिड़ा हुआ है दर असल यूई क्योंकि अभी हमें ये भी पता है
01:35कि वो ओपेक से भी बाहर निकल गया तो ये तमाम चीज़े हैं जो कि इरान के
01:39इंटरेस्ट के किलाब जाती है अगर इसराइल को धीरे धीरे अगर मालो मानिता मिलने
01:44लगेगी तो कहीं न कहीं इरान का जो दाइरा है वो सिमित होगा और जितने भी जो
01:50मुस्लिम मुमालिक हैं उसमें उसकी जो पैठ है वो भी कम होगी और इसराइल का जो स्विकाजिता है
01:56इसराइल एज अ कंट्री उसकी एकसेप्टेंस पड़ेगी और वो इसराइल नहीं चाहता है
02:12अगर ऐसा नहीं करेंगे तो अगला निशाना जो है वो देश होंगे और उन्हें नहीं कहा है कि ढाल ना
02:18बने
02:18इरान ने अभी जो उनके जो चीफ स्पिरिचल लीडर है उनकी तरब से यह बायाना है
02:27बिल्कुल एक बात और बार बार उठ रही है तिजावस सहब कहा जा रहा है कि अमेरिका और उसके सहयोगी
02:33देश यह चाहते हैं
02:34कि इरान इतना ज़्यादा कमजोर हो जाए आर्थिक तोर पर बाकी चीजें कि वो खुद ही सारे आफर मान ले
02:40अभी मैं ख़वर पढ़ रहा था तो इरान की और से प्रस्ताव दिया जा रहा है कि अगर दोनों की
02:46बीच में कोई डील होती भी है
02:47तो हमारे जो 24 अरॉट डालर फसे हुएं पैसा आपने फ्रीज कर रखा है उन्हें आप वापस कीजिए दो किष्टों
02:53में बारा बारा करके
02:54तो इरान तो भी आर्थिक संकट का सामना करी रहा है अभी जनौरी में ही परदर्शन हुए थे देश पर
02:59में सबने देखा था क्या कुछ हुआ था
03:01युद्ध हुआ बहुत सारा नुकसान इसमें हुआ है अभी उसे टाइम चाहिए रिकवर करने के लिए लेकिन अगर फिर से
03:06युद्ध शुरू होता है तो हालात और ज्यादा बत्तर हो जाएंगी तो क्या आपको लगता है कि लंबी लडाई खीच
03:12कर अमेरिका ये चाहता ह
03:14है कि इरान उसकी हर बात माल ले बिल्कुल यूजना तो यही है खास कर और उसमें डर का शाय
03:23बना है रखना बार बार लड़ाई करते रहना ताकि उसका जो आर्थिक विकास से वो पूरी तरीके से ठब हो
03:29जाए रण निती यही है और इस तरीके से अमेरिका ये सोचता है कि
03:34इरान में आंतरिक विद्रोथ पर नहोगा सरकार के खिलाप आवाज आएगी कि आपकी नीतियों के कारण हम बरबाद हो रहे
03:41हैं इरान को जो प्रॉस्परस जो जो प्रॉस्परेटी मिलनी चाहिए वो नहीं मिल पा रही है और इसके लिए जो
03:49वर्तमान सरकार है जो जो 79 के �
03:59इरान को पुरी तरीके से आर्थिक तोर पर तोड़ दिया जाए और इरान के अंदर इसका दबाव भी है ऐसा
04:05नहीं है कि इरान की अर्थ जो इतने लंबे समय से जो अमेरिकी प्रतिवन्द जेहल रही है अब तो और
04:11भी बड़े इस तरह पर इरान को चारो तरफ से उन्हों
04:15ने मतलब एक तरीके से ब्लॉकेड वाली स्तती में अमेरिका ने ला दिया जहाना तो सामान जा सकता है न
04:23वो बेज सकता है जब पूरी तरीके से व्यापार ही अप है तो फिर इरान के लिए कैसे कमाई होगी
04:30क्योंकि कमाई का जर्या ही तो तेल है और अगर वही नहीं जाए
04:33तब तो बहुत ही मुश्किल हो जाएगी तो अमेरिका यही चाहता है कि आर्थिक रूप से उसकी कमर तोड़ दी
04:40जाए ताकि एरान जो है वह खुद अपने आप भी जुपकर अमेरिका के हिसाब से चलने लगेगा व्यागव साथ बिल्कुल
04:49तेजाव साथ लेकिन एक सवाल �
04:51कि अमेरिका और उनके सहयोगी देशों पर क्या वैश्विक दबाओ का असर नहीं पड़ रहा जैसे अभी जो नए हमले
04:58हुए है उसके बाद कच्छे तेल के दामों में बढ़ोतरी फिरसे हो गई दुनिया भर के जायतर देश परिसान है
05:03इस वाली जंग से हमने देखा था �
05:05यूरोप और नेटों के कैसे बयान आए थी जब जंग शुरू हुई थी उसके बाद से लेकिन ऐसा क्यों लग
05:10रहा है कि टरंप बिल्कुल ही उनको इन चीजों से कोई ही दिक्कत नहीं हो रही उनको जरा सभी फर्क
05:16नहीं पड़ रहा दवाव कौन मानता है जो कमजोर होता
05:50तो यहिजों कमजोर दैश होते हैं वो अमरीका का भी दवाव मानता है वो अमिरिका का भी दवा मानता है
05:59पाकिस्तान के आलते हो इह जाता है कि जाता है है
06:03पाकिस्तान अब्राम अपोर्ड पे अस्ताक्षर कर ले जबकि पाकिस्तान ने इस्राइल को उसके पासपोर्ट पे लिखा होता है कि इस्राइल
06:11के अलावा हर देश में जाने के अनुमती इस पासपोर्ट क्योंकि वो इस्राइल को कोई देश ही नहीं मानता है
06:16मुल्क ही नहीं
06:33तो आपके हिसाब से जंग की चाहा तभी किसके अंदर होगी, नेतन्याहों तो चाह रहे होंगी कि ये सब ना
06:38रुके, चलता ही रहे लगातार, आपको दुनिया के जो बड़े देश हैं, चीन और रूस की क्या मनशा होगी, वो
06:45क्या चाह रहे होंगे, कि ये सब रुके ये चल
07:03अपने हमला कर लिया, तो ये सब कुछ जब क्यूबा में उसने मिसाइले तेनाब कर दी थी, तो वो पूरी
07:12तरीके से तयार था कि अगर अमरीका हमला करेगा, तो हम उसके हमला करेंगे, रूस के जो संगरक्षित देश थे
07:19उसकी तरफ, न तो वेस्टर्ण देशों को देख
07:33पूरी तरीके से जो स्वास का समराज्य है, और उसमें रूस और चीन दोनों ही किसी भी तरीके की कोई
07:41बाउंडरी खीशने के पक्ष में नहीं है, और ऐसे में जो ये तमाम देश हैं पर ये भी नहीं चाहता
07:48है, क्योंकि रूस का जो पश्चिम एशिया में दाइरा लगात
07:52सिमित हो रहता जा रहा है, पहले जो सीरिया में रूस के पक्ष की सरकार थे, देरे देरे सीरिया में
07:57जो बसर और असद को हटा के नहीं, जो हैं उनका समराज्य आया तो वह रूस के मुफीद नहीं है,
08:06गाजा में पूरी तरीके से उन्होंने जो भयानक नरसहां करके उसको �
08:10में नाबूद कर दिया है ऐसे ही इरान में चीन का काफी जबरदस इंवेस्टमेंट था उसको भी काफी नुकसान पहुंचा
08:17है तो यह देश यह तो नहीं चाते हैं कि पूरा-पुरा पश्चिम एशिया है वो अमेरिका की गोद में
08:23चला जाए या अमेरिका की गुलामी में च
08:30दाहिर है पर वो यह भी चाते हैं कि अमेरिका अगर यहां से चला जाता है तो उनका जो बचा
08:36पुछा जो वर्चस है वह कम से कम इस रीजन पर बना रहे हैं पर अमेरिका अभी इतना ताकतवर है
08:43और इन सब देशों को देने की स्थिमें हैं कि जो पश्चिम एशिया में उ
08:59कुछ करना नहीं चाहते हैं इस्राइल तो जाहेगा कि लड़ाई हो क्योंकि इरान के कारण इस्राइल का अस्तित्व संकट में
09:07आता है और ठीक वैसे ही जो खास कर जो यूरोपियन डेश हैं वो भी चाहते हैं कि अमरीकी जो
09:17है वहाँ पे सपल हो क्योंकि उनको बिना लड़े
09:21पश्ची मेशिया में उनके मुताबिक सब कुछ हो रहा है तो जो यूरोपियन देश है वो ये चाहेंगे भारत बिल्कुल
09:29ऐसा नहीं चाहेगा भारत शांती चाहेगा क्योंकि भारत के जो पाव हैं जो मीदे हैं चाहे वो IMEC प्रोजक्ट हो
09:38जो पूरा भारत को एक तरीक
09:55बिल्कुल एक बात और होती है तिजाव सहाब हो ये है कि क्या टरंप शासन या फिर अमेरिका में जो
10:02भी राश्टपती रहते हैं क्या वो दूसरे देशों की जन भावनाओं का ख्याल नहीं रखते हैं क्या उनको ये पता
10:09नहीं होता जैसे अभी हम पाकिस्तान की बात कर र
10:48बिल्कुल ये तो प्रकरती होती है
10:51विश्वाद की जब अंग्रेजियों का यहां पर भारत में रास था तो कहां जन भावनाओं का ख्याल करते थे उनको
10:59खाली अतने फायदे से मतलब होता था नहीं तो इतने बड़े-बड़े जन अंदोलन नहीं होते
11:03है 1942 का जोड़ा अंदोलन से लेकर लगाता जो अंदोलन हो रहे थे बारत में तो वह जन भावनाओं का
11:11ही तो उभार था जो कि उन सामरजिवादी देशों के खिलाफ था उतनी वेश्वाद के खिलाफ था तो अमेरिका को
11:19केवल एक ही जन भावना का असल पड़ता है वो है �
11:29अगर यूके में या ब्रिटेन में अगर सब्ता परिवर्तम होता है तो जो ब्रिटेन की सरकार थी वो यूके या
11:36ब्रिटेन के लोगों के लिए रैस्पोंसिबल थी ना कि भारत के लोगों के लिए और इसलिए भारत के लोगों ने
11:42आजादी की लड़ाई लड़ी कि हमें �
11:44इसी सरकार चीए जो भारती जन्भावनाओं का खयाल करें तो क्यूंकि बाकी तमाम देशों से
11:51अमरिकन प्रिजिडेंट्स को वोट नहीं मिलते हैं तो वो रैस्पोंसिबल भी खली अमरिकन
11:58पोपुलेशन और अमरिकन लोगों के लिए ही हैं तो वो न तो पाकिस्तान की जन्भावनाओं का खयाल करेंगे
12:03न वे भारत की जन भामना को खयाल करेंगे और न इरानी लोगों की
12:07एक तरफ जैसे ही वो कहते हैं कि मादद आ रही है
12:10पर दूसरी तरफ जब इरा की जनता उनके खिलाप हो जाएगी
12:14तो वो उन पे बंबार्डमेंट करने से भी नहीं रुखेंगे
12:17यह वो ही है जो प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं
12:20उनी लोगों के घरोनी के रिलेटिह वापस उन पे हमला करने में भी अमेरिका नहीं चुकाएगा
12:25तो जन भामनाओं की कद्र नहीं होती और यह दरसल एक जो प्रजात अंत्र
12:33जो कभी-कभी मानविता का चहरा लेके आता है उसके पीछे जो पुंजिवाद का और उपनिवेशवाद का जो भयानक चहरा
12:40है
12:41वह इसके पीछे हैं जो कि कभी दुनिया को शांत नहीं रहने देंगे
12:45और इसलिए बहुत सारे विचारक इससे बहतर शाषन प्रणाली के लिए कोशिश करते रहें
12:52सामिवाद आया पर वह सफल नहीं रहा क्योंकि वह उतना व्यवारिक नहीं था
12:56तो अभी पुंजिवादी जो देश है वो इसी रूप में गंता की भावनाओं का
13:03जो उनके देश से संबने इतना है निरादर करते रहेंगे
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