00:27दुनिया को लग रहा था कि शायद इस बार जंग टल जाएगी।
00:52अमेरिकी सेना का कहना है कि इरानी बोर्ट समुद्री रास्तों में माइन्स यानि की बारूदी सुरंगे बिछा रही थी जुससे
00:58अमेरिकी युद्धपोतों और
00:59रंटराष्ट्य जहाजों को खत्रा हो सकता था।
01:02अब यहाँ एक बात समझना बेहत जरूरी है।
01:04हॉर्मूस ट्रेट सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है।
01:07यह दुनिया की उज़ा सप्लाई की सबसे बड़ी लाइफ लाइफ लाइन है।
01:22बलकि एक बड़ा रंडितिक संदेश भी माना जा रहा है।
01:25लेकिन सवार यही है कि जब बात्ची चल रहे थी तब हमला क्यों हुआ।
01:29असल में अमेरिका को डर है कि इरान बात्चीत को ढाल बना कर अपनी सैने तयारी तेज कर रहा है।
01:34वशिंग्टन को आशंका है कि तेरान हॉर्मूज को अपने सबसे बड़े दवाव वाले हत्यार के तौर पर इस्तिमाल कर सकता
01:40है।
01:41और अगर इरान ने सच में इस रास्ते को ब्लॉक कर दिया तो टेल की कीमतें आस्मान शूसकती हैं।
01:46अमेरिका, यूरोप, जपान, भारत सब का इस पर असर पड़ेगा। यही बज़ा है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर हॉर्मूज
01:53में अपनी सैने मौजूद गी कमजोर नहीं पड़ने देना चाहता।
01:56हलाकि संकॉम ने बयान में ये भी कहा कि अमेरिका अभी भी सैयम बरत रहा है, उसका उदेश्य जंग बढ़ाना
02:01नहीं है, लेकिन मिडिल इस्ट की राजनीती में सैयम और हमला अकसर एक ही वाक्या में दिखाई दे रहे हैं।
02:15अब जरा पिछले 24 घंटों की बड़ी तस्वीर समझें।
02:36यानि वशिंग्टन अब आधिया दूरे समझोते के मूड में नहीं दिख रहा है। दूसरी तरफ एरान भी जुकने को तयार
02:42नहीं है।
02:42कतर की राजधानी दोहा में जो वारता चल रही है उसमें दो सबसे बड़े मुद्दे हैं।
02:51अमेरिका चाता है कि इरान अपने परमानु कारेक्रम पर बड़ी कटोर्थी करें।
02:55लेकिन इरान कह रहा है कि उरेनियम संवर्धन उसका अधिकार है। और यही इस पूरे संकट की जड़ है।
03:01दरसल इरान अब सैन्य ये राजमृतिक लड़ाई नहीं लड़ रहा है। वो राष्ट्रे सम्मान की लड़ाई का नेरेटिफ बन रहा
03:06है।
03:06तेहरान में ये संदेश दिया जा रहा है कि बश्रुमी देश इरान को टेकनोलोजी कमजोर दिखाना चाहते हैं।
03:11इसलिए इरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को संप्रभुता का मुद्दा बना रहा है।
03:15यही वज़ा है कि अमेरिकी डिप्लोमेट रॉबर्ट मैली का बयान बहत एहम हो गया है।
03:33और यही वज़ा है कि इरान की पॉजिशन पहले से ज्यादा कठोर हो चुकी है।
03:37अब इस पूरे संकट में एक और दल्चस्प मोड आया है।
03:40मीडियर रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था कि अमेरिका और इरान जल्द किसी अंतरिम समझोते पर साइन कर सकते
03:45हैं।
03:46यहां तक कहा गया कि हर्मूस खोलने और सीज़ फायर बढ़ाने की सहमती तक बन सकती है।
03:51लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
03:52कोई दस्तकत नहीं हुआ, कोई अपचारिक समझोता नहीं सामने आया, यानि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी बहुत
03:58गहरी है।
03:59उधर इरान के राश्टपती मसूद पजैशकेन का भी बड़ा बयान सामने आया है।
04:03उन्होंने साफ काये कि इरान में कोई भी बड़ा फैसला सुप्रीम लीडर की मनजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा।
04:09यानि अंतिम फैसला अभी भी इरान के धार्मिक और अर्णितिक नित्रतों के हाथ में ही है।
04:14और यही वज़े है कि दुनिया की नजर अब सिर्फ राष्टपती या वदेश मंतरी पर नहीं बल्गी तेहरान की असली
04:19पावर सेंटर पर डिकी हुई है।
04:21इसे बीच इरान ने एक और बड़ा संकीर दिया है।
04:23इरानी वदेश मंतरी अब बास अराक्षी ने लेबनान और हिज़बुल्ला की समर्थन में कुला संदेश जारी किया है।
04:29उन्होंने कहा है कि इरान इसराइल के खिलाफ लेबनान की संप्रभुता के साथ खड़ा है।
04:34इस बयान का मतलब साफ है।
04:35इरान सिर्फ अमेरिका से बापशीत नहीं कर रहा, वो अपने पूरे रेजिस्टिन नेटवर्क को भी एक्टिव बनाए रखना चाहता है।
04:41यानि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो संगर्ष सिर्फ एरान बनाम अमेरिका तक समित नहीं रहेगा।
04:47इसमें इसराइल, हिजबुला, रेड़ सी, हॉर्मुज सब शामिल हो सकते हैं, जो उसका सर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
04:53और शायद यहीं इस पूरे संकट की सबसे खतरनाक बात भी है, क्योंकि अभी दुनिया जिस दौर में खड़ी है,
04:58वहाँ एक छोटी सैन्य गलती भी बड़ा छेत्रिय युद्ध बन सकती है।
05:23आने वाले दिनों में दुनिया को एक और बड़े युद्ध की दरफ धकेल देगा।
05:27फिलहाल में डिलिस्ट में बंदुके पूरी तरह शान्त नहीं हुई है, बातचीत भी चल रही है और हमले भी जारी
05:33है।
05:33और यही इस पूरे संकट को सबसे ज्यादा खतरनाक बना रहा है।
05:38इस ख़वर में इतना ही लेकिन दुनिया को जो उमीदे थीं कि अब बातचीत चल रही है, शान्तिवारता हो रही
05:42है, सीज फायर बढ़ेगा।
05:44यह हो सकता है तो यह धिरुख सकता है, तो ऐसा कुछ होता दिखाई नहीं पड़ रहा है और यह
05:48दुनिया के लिए खत्रे की घंटी है।
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