00:02दिल्ली का ये वही जिम खाना क्लब है जो भारतिय नौकर शाहों, अफसरों और शहर के तमाम विवियाईपी लोगों के
00:09लिए सबसे बड़ा स्टेटस सिंबल रहा।
00:30सरकार के बेदखली के आदेश के बाद ये जिम खाना क्लब एक बार फिर सुर्खियों में खास कर इसके समर्थन
00:35में उठ रही आवाजों और उनकी दलीलों की वजह से
00:38जिम खाना क्लाब में खेलने आती थी अमरेश सर में तो मेरी बहुत सारी मेम्रीज है इसमें और वो एक
00:45बड़ा जबरदस अच्छा
00:46स्पोर्ट्स कॉंप्लेक्स है वो सिर्फ क्लाब ही नहीं है सबको जोड़ता ही नहीं है बहुत जबरदस सीनर सिटिजन भी वहीं
00:54उनीका घर भी है सो मैं उस एंगल से करा था कि इसमें बहुत सारे लोगों कोई मेमरीज भी है
01:00और एक बहुत स्ट्रॉंग स्पोर्ट्स सें�
01:12करना नामुम्किन है जिसकी सदस्यता किसी विरासत से कम नहीं फिर भी से लेकर मोह ऐसा कि आम आदमी पार्टी
01:20तक विविआईपी कल्चर के प्ततीक जिम खाना क्लब पर सरकार की कारवाई के विरोध में उताराती है
01:25यह बताती है कि इनका ध्यान सिर्फ जमीनों को कबजा करने में और अपने सुरक्षा के नाम पे और अपने
01:35मित्रों को देने में उस बड़ी बड़ी जमीन को उस महंगी जमीन को उपलब्द कराने में इनकी सारी रुची है
01:43नई दिल्ली का दिल्ली जमखाना क्लब लुटियंस दिल्ली के बीच और बीच में है
01:47आजादी के ठीक बात क्लब का प्रबंदन अंग्रेजों से भारतियों के हाथ में आया
01:51तब से इस सत्ता का सबसे वड़ा गलियारा बन कर रहा
01:54लेकिन अब केंद्र सरकार ने 27.3 एकड की जमीन पर फैले
01:59इसी जमखाना क्लब को खाली करने का आदेश दिया
02:01सरकार का कहना है कि ये जमीन राश्ट्री सुरक्षा और रक्षा ढाचे से जुड़े
02:05एहम कामों के लिए चाहिए
02:07लेकिन जमखाना क्लब को लेकर मोह ऐसा है कि सरकार के इस पैसले के खिलाफ मामला दिल्ली हाई कोट पहुच
02:13जाता है
02:14इस कानूली लडाई के बीच क्लब के सदस्यों का कहना है कि सरकार के इस पैसले से
02:18सदस्य और करमचारियों के बीच दहशत और अनिश्चिता का महाल पाईदा हो गया
02:40जिम खाना क्लब के सदस्य कहते हैं
02:46कि सरकार की तरफ से उन्हें इस पैसले की कोई पहले से सूचना नहीं दी गई
02:50वहीं जहां तक बात सुरक्षा की है तो फिछले 34 वर्षों से प्रधानमंत्री आवास के बगल में मौजूद होने पर
02:56भी
02:56जिम खाना क्लब की तरफ से सुरक्षा में चूक या उनलंगन की कोई भी घटना सामने ना आने का दावा
03:01किया जाता है
03:041928 में सरकार ने जिम खाना की 27 एकल से ज्यादा की जमीने 1000 रुपए सालाना पर दे दी थी
03:101947 में अंग्रेज तो यहां से चले गए लेकिन कलब के अंदर कुछ नहीं बदला
03:16जमीन वही रही किराया वही रहा बस अंदर बैटने वाले बदलते गए
03:20गोरे साहब की जगा देशी रसूपदारों ने ले ली जिन में आम आदमी कभी अंदर जहांखी नहीं पाए
03:25सबसे बड़ी बात ये कलब कभी खेल का मैदान ही नहीं था
03:28साल 2014-2015 से 2018-2019 के बीच कलब में कुल खर्च का खेल पर केवल 2.77% ही
03:36खर्च किया गया
03:36बाकी पैसा, कैटरिंग, वाइन, शराब, सिगरेट और दूसरे खर्चों में जाता रहा
03:41तो जिम खाना की जमीन मांगी गई खेल के नाम पर लेकिन यहाँ खेल पर कुछ खर्ची नहीं होता था
03:48कलब की सदस्यता भी उन्हें ही मिलती जिनके अपने पहले से इस कलब के सदस्यते ये भी दावा है कि
03:53जिम खाना की सदस्यता की आसमीं
03:55हजारों लोगों से 44 करोन रुपए से ज्यादा ले लिये गए जो पैसा वापस ही नहीं किया लेकिन अगर सरकार
04:03अपने मकसद में अब काम्याब रहे तो खेल के नाम पर वीवियाईपी कल्चर की निशानी बन कर खड़े जिम खाना
04:08कलब को आजादी मिलेगी
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