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  • 18 minutes ago
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00:00सबीको नमस्कार मैं विंता परमिश हर बार की तरह इस बार भी बेंगलूरू का करक बड़े धूम धाम से हो
00:06रहा है
00:06तो फिर यहाँ बेंगलूरू का करक क्यों और कौन मनाते हैं तो इसकी पौराणिक कहानी क्या है यहाँ जानना भी
00:13तो जरूरी है ना
00:14करक मतलब उसे बिना हाथ से चुए सिर पर रख कर चलना बेंगलूरू के इस करक का 800 सालों का
00:21इतिहास है इस करक को वहनिकुलक्षत्रिय समुदाय के लोग सदियों से मनाते आ रहे हैं करनाटक के अलग-अलग शेहरों
00:29में भी करक मनाया जाता है
00:30तो अगर इसकी पौराणिक कहानी की बात करें तो कुरुक्षित्र युद्ध के बाद पांडव स्वर्ग जा रहे होते हैं इस
00:38दोरान माता द्रौपदी बेहोश हो जाती है जिसका पांडवों को पता नहीं चलता जब माता द्रौपदी को होश आता है
00:44तो उनके सामने तिम
00:58से घंटे पुझारी माथे से गणाचारी कान से गोडा और अपने कंधों से वीर कुमारों को बनाया था उनकी यह
01:06चोटी सेना तिमरासुर के खिलाफ युद्ध करके उसे भरा देती है फिर जब माता द्रौपदी स्वर्ग जाने लगती हैं और
01:13कहती हैं कि वह वापस नहीं
01:14आएंगी तो वे सब कहते हैं आपने हमें बनाया आप गई तो हमारा क्या होगा ऐसा कहकर वे लोग अपने
01:21पास रखी तलवारी लेकर जिसे हल्गु सेवा कहते हैं और अपनी छाती में घोपने लगते हैं वे रोरोकर उनसे ना
01:28जाने की गुहार लगाते हैं तब माता द्र�
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