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7 दशकों बाद कैसे चीता की भारत में वापसी हुई? अद्भुत अविश्‍वसनीय अकल्‍पनीय में देखिए पूरी कहानी

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00:00और उन्हांट प्याव टूश्य प्रीजिए
00:30वालस पे मिशेच लेड़ो चीटा का लोकेशन सा लंका तलहिया से हंड़ेट मीटरस की दोड़ीटरस
00:40बता देना कित पेज़ टीम लेगा है अब इस लोकेशन कहा है
00:45लेज देगी आप लागेशन लोकेशन कहा है
01:26चीटा यहां से आसपास ही है
01:29पता रखना है कि वो कहाँ किदर इदा मुव कर रहा है दिखा इंको पूरे सामने जा रहा है अच्छा
01:43हाँ अच्छा हाँ
01:56मैं एक डोड़ने लुख रहे थे दो साथ में मिल रहा है कि इंसानों की बनाई सबसे खुबसूरत बस्ती से
02:16ज्यादा अद्भूत होते हैं उपर वाले के बनाएं यह जंगल नमस्कार मैं हूँ श्मेता सिंग और आप देख रहे हैं
02:23अद्भूत और विश्वस्निय और कल्प
02:26अद्भूत कहानी सुनाने के लिए हम आपको मध्यप्रदेश लेकर आएं मध्यप्रदेश के कुनो नाशनल पार्क जी पूरी दुनिया में ऐसा
02:37कभी नहीं हुआ है कि इस आकार के एक मैमल को किसी जगे पर पुनर स्थापित किया गया हो एक
02:43चीते की कहानी नहीं है एक सम�
02:50पूलों से हम आपको सुनाने जा रहे हैं दरसल अगर हम पूरी दुनिया को देखें तो यहां पर आपको अलग
02:57अलग प्रजातियों के जो बिग्याट्स होते हैं वो दिखते हैं कुल दुनिया में होते हैं साथ भारत इकलोता वो देश
03:06है जहां पर पांच बिग्याट्स है
03:09बबरशेर हमारे पास है, बाग हमारे पास है, हमारे पास है तेंदुआ, हमारे पास है स्नो लेपर्ड और अब हमारे
03:16पास है चीता
03:17किस तरीके से साड़े साथ दशकों के बाद चीता की वापसी भारत में हुई है
03:24कुनो नाश्रल पाक से आज वो पूरी कहानी आपको हम सुनाएंगे
03:49चीता दुनिया का सबसे तेज शिकारी जिसकी रफ्तार ही उसकी सबसे अधुत ताकत है
04:00चीता एक बहुती अधुत वन्य पराणी है पूरे भारत में केवल कुनो नैशनल पार्क में चीता है
04:19चीता जिसको इस से पहले भारत के खुले जंगलों में सतर सालों में कभी नहीं देखा गया
04:37चीता जिसकी भारत में मौजूद की गवा है दुनिया के सबसे अकल्पनी है वन्य जीव प्रयोग की
04:46पहला इंटर कॉंटिनेंटल ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट है बड़े मेंमल का आस तक इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ
04:59हम निकले उसी अद्भुत अविश्वस्निय अकल्पनिय चीते को देखे
05:07पहली बार दुनिया का कोई न्यूज चैनल भारत के इन चीतों के बिलकुल नस्दीक पहुँचा
05:14दिल थाम के देखिए बिलकुल करीब से देखिए
05:18सिर्फ 10 मीटर की दूरी से हम आपको भारत में चीतों की अद्भुत अविश्वस्निय अकल्पनिय तस्वीरें दिखाएंगे
05:34हम पहुँचे उस जगह जहां दुनिया का एक मात्र सबसे बड़ा और सबसे सफल वन्य जीव प्रजेक्ट चलाया गया
05:42मध्यप्रदेश के कुनो नैशनल पार्थ यानि वो जगह है जहां पर अफरीका के खुले सवाना से चीतों को लाकर बसाया
05:51गया
06:01हम आपको उन नंधे शावकों की अद्भुत तस्वीर दिखाएंगे
06:12चीतों की अविश्वसनी अरफ्तार दिखाएंगे विदेश से आई अफरीकी बिल्लियों का देसी कनेक्शन दिखाएंगे
06:30ये चीते इसलिए भी अद्भुत है क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ था कि अफरीका से लाने के बाद इन चीतों
06:36में से ही 33 चीतों ने भारत में जन्म लिया है
06:41चीते अद्भुत इसलिए भी है क्योंकि जंगल में उनको देख पाना बेहद मुश्किल माना जाता है
06:46इनकी कोई तय दिन चर्या नहीं होती ये लगातार इधर उधर भटकते रहते हैं जिससे इनको ढुणना लगभग असंभव हो
06:54जाता है
07:01चीता सिर्फ एक जानवर नहीं बलकि पूरे एको सिस्टम का इंजन माना जाता है
07:05चीते के आने से घास के मैदानों का संतुलन बेहतर होता है
07:10शिकार की संख्या नियंत्रित रहती है और जैव विविधता यानि बायो डाइवर्सिटी मजबूत होती है
07:16आसान भाशा में कहें तो चीता जंगल का फिटनिस ट्रेनर है जहां चीता स्वस्थ रहता है वहां का इको सिस्टम
07:23भी स्वस्थ माना जाता है
07:35सूरज की सिती को देखकर आप समय का अंदाजा भी लगा सकते हैं अभी छे नहीं बजे हैं और जो
07:42टेंपरिचर है वो 27 डिग्री इस समय भी हो चुका है
07:46गर्मी जैसे जैसे दिन में और आगे बढ़ेगी चुनोतिया सब के लिए बढ़ेंगे
08:00हम कुनों के चीतों की तलाश में सुबह सुबह ही निकल पड़ें गर्मी तेज थी लेकिन सुबह के वक्त तापमान
08:07में थोड़ी राहत रहती है और यहीं समय जंगली जानवरों के निकलने का भी होता है
08:15कुनों नेशनल पार्क में सूखे साल और खैर के पेड़ ज्यादा पाए जाते हैं इन्हीं जंगलों के पीच से हमारी
08:22जिपसी चली जा रही थी
08:23कहीं पेड़ों से घेरे चौड़े रास्ते कभी संकरी पकडंडी है यह कुनों नाशनल पार्क जो है यह ड्राइडेसिद्वस फॉरेस्ट्स हैं
08:39सूखे जंगल है आप यहां के पेड़ों को देख करी समझ सकते हैं बहुत काटेदार पेड यहां पर है इस
08:46पूरे जंगल को
08:48इस रिजर्व शेत्र को आइडियल माना गया जब चीतों को एक बार फिर भारत लाने के प्रयास की शुरुआत हुए
08:55और देखिए अच्छी तरीके से यहां पर वो धले भी है पानी के हिसाब से यहां पर कूलों नदी भी
09:03बहती है और जो बाकी हिस्सें हैं जहां तक नदी
09:18जैसा पूरा क्षेत्र यहां पर देखते हैं मैदानी न क्यूंकि चीते दौर कर अपने प्रे को पकड़ते हैं अपने शिकार
09:24पर जपटा मारते हैं तो यह पूरा विस्तार ऐसा ही इन जंगलों का रहता है
09:40दरसल काफी रिसेर्च, सैटेलाइट मैपिंग और अध्ययन के बाद कूनों को इसलिए चुना गया क्यूंकि यहां का जंगल, जलवायू और
09:48शिकार अफ्रीकी चीता के स्वभाव से काफी मेल खाते हैं
09:53कूनों में घास के मैदान, खुला वनक्षेत्र और जाडियां बड़ी संख्या में हैं
09:59और चीता घने जंगल का शिकारी नहीं होता, उसे तेज रफतार से दोड़ने के लिए खुला इलाका चाहिए होता है
10:07कूनों ने चीते के लिए यही इलाका मुहया कराया
10:22कूनों के डिरेक्टर के हैस्जट दे काम कर रहा हूं
10:25जो पूरा इसका चीतर है वो कितना क्षेतर है और इस समय कितने चीते यहां पर हैं
10:32हमारे यहां पर 53 चीते भारत वर्श में हैं, तो 53 कुनों रास्टी उध्यान में हैं
10:39तीन चीते हमने पिछले साल गांधी सागर सेंक्चरी जो दूसरी चीता इंट्रेक्शन साइट है वहां हमने शिफ्ट किये हैं और
10:4516 चीते खुले जंगलों में घूम रहे हैं कुनो का चेत्रफल जो है वो कुनो राष्ट्री उद्यान का 748 स्क्वाइर
10:53क्लोमेडर है लेकिन अ
11:09तो यो आसपास का जंगल है शिफ्पूर जिले का है शिफ्पूरी जिले का है ग्वालियर का है मुरैना का है
11:14और एवन राजिस्थान भी चीते जो है वहां भी आ जा रहे हैं इस प्रकार से 5000 स्क्वाइर क्लोमेटर से
11:22ज्यादा का छेत्र वो कवर कर रहे हैं
11:30चीतों को जंगल में देखना मुश्किल होता है वो एक जगह नहीं रहते ना अपना इलाका मार्क करते हैं फिर
11:36उनका रंग भी ऐसा है कि सूखे जंगल में वो ऐसे चिप जाते हैं कि आसानी से नजर नहीं आते
11:43उनको ढूनने के लिए जरूरत होती है ट्रैकर्स की इसलिए
11:47सबसे पहले हम वन विभाग की ट्रैकर्स टीम के पास जा पहुंचे पेट्रोलिंग कैम्प बरेट घाट और सर नमस्ते आप
12:02लोग यहीं पर आप लोगों की तनाती रहती है यहां पर चीता तो अब आया है यहां पर वैसे कौन
12:09-कौन से जानवर है चीता अभी आया है तें�
12:22आपको सब कितना समय इधर मुझे यहां के रहने वाले हैं आपके यहां पर चीता आ गया तो अच्छा लगा
12:47अच्छा लगा कि चीता आ गया यह आपको आप लोग क्या पेट्रोलिंग के लिए निकलते हैं तो वो जो कहा
12:54जा रहा है कि आम जो एक सामी मैन साथ में लेकर तो वो यह वो टीम है जिससे मैं
12:59मुलाकात कर रही हूं तो आप लोग बता सकते हैं पता लगा सकते हैं कि चीता क
13:02कहां पर spotting उसकी हुई है ताकि हम लोग को मतलब क्यामरे के लिए visuals मिल पाएं
13:07हम लोग communication में हम रखते हैं
13:09communication होता है
13:12जैसे जानकारी मिलती है उस तरीके से अपन उसी आधार पर चलते हैं
13:16तो एक बर चेक हीजिए ना कहीं से जानकारी आ रही हो तो
13:18mobile 2 report over sir
13:31अजया अच्छा यहां से कितनी दूर होगा अब हम गाडी में सवार होके जा सकते हैं यहां से जिपसी में
13:40ठीक है
14:03यह क्या equipment है और किस तरीके से यह काम करता है
14:08यह Telenics TR8 radio receiver है यह वरी हाई frequency पर काम करता है
14:12यह directional antenna है H-type collapsible आप देखेंगे इसमें जो अन्टीना है यह नों-breakable हैं
14:17spring-shaped हैं और यह हमारा receiver device है
14:20यह directional इसको इसलिये बोलते हैं इसमें गेन और beep आता है signal strength आता है
14:26जिस भी direction में चीता होगा चीता के कॉलर में एक एमिटर लगा हुआ होता है
14:30वो एमिटर हर एक second में एक बीप देता है यह उसको capture करता है
14:34ठीक है अगर चीता इस direction में तो beep की strength जादाएगी हम थोड़ा सा भी move करेंगे तो beep
14:39की strength कम हो जाएगी
14:40तो ऐसे हमें पता चलता है सभी directions में चीता का direction कहा है
14:45इसकी सबसे बड़ी जरूरत क्यूं है
14:48अभी हमारे पास animals का number काफी कम है
14:50तो हमने सभी जो भी animals छोड़े हुए है adults है जो बाहर हम track कर रहे हैं उनके गले
14:56में collar लगाया हुआ है
14:57जैसे जैसे संक्या बढ़ती जाएगी इस tracking की intensive tracking की जरूरत कम होती जाएगी
15:02तो अभी जैसे अगर हम इससे कहें तो कितना signal मिल रहा है
15:06अभी एक्छली animal हमारी range में नहीं है
15:08और इसलिए हम जमीन पर भी खड़े हैं वरना आप जब forest के area में बिलकुल उस area में होते
15:14हैं जहां पर चीते हैं तो वहाँ पर आप केवल अपनी गाड़ी में सवार होते हैं
15:18तो लेकिन इसका इस्तमाल करके आप हमें help करेंगे चीता spot करने में
15:23बिलकुल आएए
15:23चलिए खामोश जंगल के बीच हमारी जिप्सी आगे बढ़ चली
15:46किस तरफ जाना है
15:58जहां ट्रैकर्स को सबसे ज्यादा सिगनल्स मिल रहे थे हमारी गाड़ी जंगल के उस इलाके में आगे बढ़ गई
16:12जंगल में चीता दिखना किस्मत और धैर्य दोनों का खेल होता है
16:17अधिकतर वन्यजीव इंसानों की आहट से सतर्क हो जाते हैं और छिप जाते हैं
16:23इसलिए सफारी में इंतजार ही सबसे बड़ा रोवांच है
16:27हम भी एक जगह पहुँच कर इंतजार करने हैं
16:36जब एक एक्सपर्ट शिकारी होता है उसे डून निकालना उतना ही मुश्किल होता है
16:41अब यहां पर एक मुव्मेंट की बात हो रही है और इसी एरिया में जो जानकारी मिल रही है उसके
16:52अनुसार है लेकिन
16:53फिलहाल हम उसे ट्रैक करने के कुशिश कर रहे हैं कि आखर कहां पर वो चीता हो सकता है
17:04देखा तुनको
17:06देखा इतेश
17:15यह जो आप डिरेक्शनल आंटना देख रहे हैं
17:22जो बहुत बड़ी है उस ही के साथ अभी ट्रैक किया जा रहा है
17:30बहुत जरूरत इसलिए होती है कि आपको यह पता करना है पता रखना है कि वह कहां किदर इधर इधर
17:38मूँ चलिए चलिए
17:43आखी
17:51और फिर हमको दिखाई दिया इस सफारी का सबसे अधभुत, अविश्वस्निय, अकल्पनिय द्रिश्य
17:58हमारी आँखों के सामने दुनिया का सबसे तेद शिकारी था
18:01चीता शिकार करके सुस्ताता हुआ
18:04पहली बार टीवी पर भारत के जंगलों में चीता
18:06लेकिन सिर्फ एक नहीं, पीछे थी उसकी बहर
18:21यह हमारी लख की शुरुआत हो गई है
18:24क्योंकि बोच्वाना से जिन चीतों को इस साल लाया गया था
18:28और कुनो नाशनल पार्ट में आजाद जो फॉरिस्ट का एरिया है
18:33खुले फॉरिस्ट का एरिया है, वहाँ पर छोड़ा गया है
18:35उनमें से एक मादा चीता ये है
18:39इस समय वो हमारी तरफ ही देख रही है
18:43आप जंगल के भीतर न केवल उन्हें बचाने की चुनोती बलकि उनके लिए भी चुनोतियों को समझे
18:50ये दो मादा चीतों का यहाँ पर मुव्मेंट बताया गया था जिनमें से एक कोहम इस समय देख रहे हैं
18:58और हमें ये बताया जा रहे है कि ये दोनों बहने हैं ये दो बहने हैं जो की बुच्वाना से
19:06आई हैं और यहाँ पर कुनो नाशनल पार्क में खुले जंगल में इस समय आप देख रहे हैं
19:18यहाँ पर अपना चहरा उसने काफी देर तक साफ किया है और यह देखिए दूसरी जो है वो भी अप
19:25खड़ी हुई है दूसरी मादा चीता जो है वो भी खड़ी हो गई है और एक के पीछे एक दोनों
19:30आगे की तरफ जा रहे हैं
19:36मुम्किन है कि कुछ दिर पहले एक शेकार किया हो इसने क्योंकि अपना चहरा हाथ पेट भारा हुआ एक तो
19:44दिख रहा है दूसरा वो अपने पंजूं को साफ करते हुए अपने चहरे को साफ करते हुए यहाँ पर बैठ
19:51कर कर रही थी
19:56इसको कहते हैं गोईग माइन एक डूडने लुकने थे दो साथ में बिल रहे हैं
20:09पोटसवाना से फरवरी दो हजार चबवीस में नौ चीते कूनों लाए गए इन दो बहनों को हाल ही में खुले
20:16जंगल में छोड़ा गया था
20:23अफ्रीका का बोटसवाना दुनिया में सबसे बड़ी चीता आवादी वाले देशों में गिना जाता
20:34दरसल भारत सरकार कई अफ्रीकी देशों के साथ चीता ट्रांस लोकेशन पर काम कर रही
20:4417 सितंबर 2022 को नमीबिया से आठ चीते भारत के कूलों लाए गए
20:53प्रधान मंत्री मोदी ने खुद इस प्रोजेक्ट की शुरुवात की थी
21:03इन चीतों को कई चरण में यहाँ पर आखिरकार रिलोकेट किया जाएगा
21:08अभी आपको भले ही देखकर ये लगे कि ये कहीं कोई चिडिया घर का पिंजड़ा तो नहीं है
21:14तो नहीं ये चंद समय के लिए रहने वाला है
21:16वरना यहाँ पर कई किलोमीटर लंबा एक पूरा इलाका इन आठ चीतों के नाम किया गया है
21:23ताजा ताजा पहुचे हैं नमीबिया से
21:25अब समझेए कि एक लंबे सफर का असर आप लोगों पर क्या होता है
21:29तो कुछ वैसा ही असर इन सब पर है
21:31अधिकतर समय यह अलसा रहे हैं
21:33लेटे हुए हैं अनमने से दिख रहे हैं
21:36कुछ-कुछ शायद नींद में भी होंगे
21:37साड़े आठ हजार किलोमीटर का सफर कोई छोटा सफर तो होता नहीं है
21:41और इनकी उम्र भी इतनी नहीं है कि इन सारी चीज़ों को
21:44अभी वो अपने उस हिसाब से समझ पाएं
21:50इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षण अफरीका से भी चीटे भारत लाई गए
21:55इन चीटों को विशेश कार्गो विमान के जरिय भारत लाया गया
21:59भारत पहुँचने के बाद उन्हें सीधे पार्क में बने क्वारंटीन बाडों में रखा गया
22:03यात्रा के दौरान चीटों की सेहत पर लगाता डॉक्टरों और विशेशक्डियों की निगरानी रखी गया
22:11भारत में चीटे की वापसी को वन्य जीव सनरक्षन के इतिहास का सबसे बड़ा और सासिक प्रयोग कहा जा रहा
22:17है
22:25हम अगर एक कॉंजर्वेशन के अटेंप्ट के तौर पर इसे एक ऐसे एफर्ट के तौर पर देखें
22:31जो पूरी दुनिया के हिसाब से भी कहा जाए तो अद्भूत अविश्वस्निय और कल्पनिय हैं
22:38कुनों में चुनौती कितनी और जब उस चुनौती को पूरा होते हुए देखते हैं तो सुकून कितना
22:47सुकून तो बहुत है क्योंकि जिस तरीके का ये प्रोजेक्ट है पहला इंटर कॉंटिनेंटल ट्रांस लोकेशन प्रोजेक्ट है बड़े मैमल
22:54का आस्ता कितिहास में पहले कभी नहीं हुआ
22:57वन बाई वन में आपसे पूछू तो सबसे बड़ी चुनौती क्या आप लोगों के लिए भी और चीता के लिए
23:03हम लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि चीता के प्रबंधन फील्ड में कैसा हो भारत में इसका
23:11कोई ग्यान हमारे हां उपलब नहीं था
23:13जो भी छोटा प्रिसिक्षण कुछ दिनों का प्रिसिक्षण हम लोगों को आफरीका में मिला लेकिन वो पांच-छे दिनों का
23:20प्रिसिक्षण किसी भी एक लंबे अनुभाव की पूर्ती नहीं कर सकता तो सबसे बड़ा चैलेंज हमारे यही था कि चीता
23:25क्या है जंगल में
23:26कैसे बहेव करता है और भारती परिस्थितियों में कैसा बहेव करेगा इसकी कोई जानकारी उपलब नहीं थी तो वो पहले
23:32स्टेप से बिलकुल जैसे कहते हैं कि बेबी स्टेप से मैनेजमेंट में हम लोगों ने शुरुआत की
23:43अब तक तीन अलग-अलग बैच में चीतों को अफरीका के जंगलों से लाकर फूलों में रिलोकेट किया जा चुका
23:49है
23:5117 सितंबर 2022 को नमीबिया से आठ चीते भारत पहुंचे थे जिन में पांच मादा और तीन नर्ष शामिल थे
24:00इसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिन अफरीका से बारह और चीते भारत पहुंचे फिर 28 फरवरी 2026 को बोटसवाना
24:09से तीसरा बड़ा दल भारत पहुंचा
24:11इसमें 9 चीते शामिल थे जिन में 6 मादा और 3 नर्ष थे
24:211952 में भारत से चीते शिकार के चलते विलुक्त हो गए थे तब ये 36 घड के कोरिया जिले में
24:28ज्यादा पाए जाते थे
24:29उसके बाद से अब कूनों में चीता की सफल वापसी अध्भुत अविश्वसनी अकल्पनी ये मानी जाती है
24:37इस वक्त कूनों के जंगलों में तिरेपन चीते हैं जिन में से 33 चीते भारत में ही जन्मे हैं
24:44यानि 33 चीते शुद्ध तोर पर जन्म से भारतिया हैं ये इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी उपलब्दी है
24:50क्योंकि जंगल में कई शिकारी होने की वजह से
24:53चीतों के बच्चों का सर्वाइबल रेट
24:56यानि जिन्दा रहने का दर बहुत कम होता है
24:58ऐसे में 35 बच्चों का जन्द लेना और जिन्दा रहना अध्यूत है
25:06बहुश्य के लिए भी कुछ एक चैलेंज है
25:08कि चीता हमारे वाइड में स्थापित हो जाए जो शुरुवाती चैलेंज जो प्रोजेक्ट में हम लोग मानते हैं लिस्ट आउट
25:14करते थे
25:14यह कि जब आये तो एक जो चीता की मिर्त्युदर है वो एक निश्चित सीमा के अंतर रहे
25:27दूसरी चिंता यह थी कि इनकी ब्रीडिंग होगी कि नहीं होगी उसके बारे में भी बहुत अप्रियेंशन था क्योंकि चीता
25:32बड़ा पूर ब्रीडर माना जाता है
25:39लेकिन उसमें भी हमको बड़ी अच्छी सफलता मेली और मुझे कहते हूँ बड़ी खुशी है कि आज हमारे यहां पर
25:4433 भारत में जन्मे हुए बच्चे हैं
25:46जो तीन साल के साड़े तीन साल के चीता के इतिहास में मुझे नहीं लगता है कि कहीं और इस
25:53प्रकार की सफलता प्राप्त हुए
25:59चीतों को एक देश से दूसरे देश में लाकर बसाना आसान नहीं है इसमें कई चुनौतियां भी है
26:09मेरा नाम यश्वंदु है मैं यहां पर वन परिशित दिकारी पालपो पश्रम के पत पर पदस्त हूं और मैं यहां
26:16पर लगभग चार साल से काम कर रहा हूं चीता पुजट के इंदर
26:19यहां पर प्रोटेक्शन कितना बड़ा एक इशू है जिसको आप लोग अड्रेस करते हैं लाइक बिफोर चीता पुजट यहां पर
26:29में जो पर कैपिटा गन ओनर्शिप है वह बहुत जादा है अच्छा मल का जो यह पार्ट रहा है पुराना
26:36जो लेगैसी है तो इस वज़
26:49में जो सगन घष्टी के रूप में हमने शुरुआ से फुट पेट्रोलिंग पर जादा जोर दिया तो उसके बाद में
26:55हमारा जो स्टाफ है वो कम से कम चार के पेर में जिसमें एक वन रक्षक होता है एक आम्ड
27:01एक सर्विस जो हम एक सामी परसनल को हायर करते है वो आम्ड ह
27:18पर इसके साथ में प्रोटेक्शन वस्वेरी बशेश वर जिसको मनें बहुत अच्छा से इसी वजे से अभी जो कुनों में
27:25आप अभी देखेंगे कि आपको चीतल की डेंसिटी बहुत अच्छी लिखेंगे आपको दूसरे हर भी वोस बीड़ेंगे हमने पानी के
27:31पानी के �
27:33अच्छे हमारे कुनों के बहार भी चीता जाता है तो हमारे चीता में 30 सयोग करते हैं इस्तानी लोग भी
27:41सयोग करते हैं और सभी का जुड़ाव है और यह जो प्रजाती हमारे यहां से बलुपत हो गई है उसके
27:50कंजर्विशन के लिए हम लगतार प्रयास रहते हैं
28:01खैर उधर हमारी बोच्षवाना सिस्टर्स जा चुकी थी और हम भी आगे बढ़ गए थे
28:09हमारी गाड़ी थोड़ी ही दूर बढ़ी थी कि हमको कुछ हिरन दिखाई दिये
28:14हिरनों का कूनों में दिखना आम बात है यह सामभर थे जो अलार्म कॉल दे रहे थे
28:25अलार्म कॉल एक हिरन तब करता है जब उसको जान का खत्रा महसूस होता है
28:30हमारे साथ बैठे वन विभाग को अंदेशा था कि आसपास तेंदुआ हो सकता है
28:50अच्छा अच्छा
28:52आगे आगे वो पानी तिनो तिनो जा रहा है
28:54हाला कि हमारे पहुचने की वजह से सांभर जान बचाकर भाग चुके थे
29:03अपटों इस अंहे परहां है यहां परचा काफी एची है कि अवी एपट के बीच में रहना सीख रहा है
29:13यह एक लिए ड़ाई करने वाला नहीं होटा है कि वह फ्रूव मतलब स्टार्टिंग से कॉंफिक्त नहीं रहा या दियरे
29:22-धीरे
29:22Губ.
29:22चिता सामानते जो जो बेवार होता है वो लडाई करने ओना coordinated
29:27नहीं होता है
29:27हम जिसे कहना है कि वो फ्लाइट rather than फ्लास तन फाय்ट
29:30अचा
29:30तो ऐसा behavior चिता का रहता है
29:32वो अगर कोई अपने से बड़ कार्निवर देखता है
29:35जिसमें लेपर्ट को भी पढ़ा का रहे हुगा, तो नॉमली साइट से चला जाता है
29:39और koono में ample है मतलब जो खाना, दोनों के लिए उपलब्ध है
29:43दोनों के लिए खाना उपलब्ध है, koono में pre-density अच्छी है
29:46है कि हम लोग प्रियास हमगा इन्सिटी जो हे वह बड़े
29:50अगर अगर मैं साइज के हिसाब से देखें तो साइज किसका बडَّ होता है
29:54चीता के लिपे या अवर रखी टेंद्व eyes रजया इन्स में थोड़ा जाहदा है
30:37बहरहाल इस बीच ट्रैकर्स को दूसरे चीते के पास होने के अलर्ट भी मिल रहे थे
30:48और हमने अपनी जिपसी सिगनल की दिशा में दोड़ा दी क्योंकि हमारा मन दो चीते देखने के बाद भी नहीं
30:57भरा था
31:01हमारी किसमत अच्छी थी ट्रैकिंग टीम की मदद से हमने एक और चीते को लोकेट कर लिया
31:32अच्छी जिस तरीके से वनविभाग यहां पर लगा हुआ है
31:37एक एक चीता किस तरीके से जी रहा है किस तरीके से उसका पूरा दिन चल रहा है
31:44हर एक बात को ट्रैक करके रखना और यह सुनिश्यत करना कि भारत में अगर एक बार फिर चीते थराइव
31:57करने हैं
31:58मतलब केवल यहां पर आकर उन्हें भूल नहीं जाना एक एक ऐसा आयोजन नहीं होना कि अच्छा भारत में चीते
32:05ले आए गए हैं
32:06बलकि उन्हें उनके रख रखाओं को अपना कर्तव्य मान कर दिन रात एक एक व्यक्ति इस काम में लगा रहता
32:15है
32:15बहुत जादा गर्मी यहां पर हो रही है लेकिन उसके बीच भी आपको ये भी तो देखना है कि जिन्हें
32:21वापस आप अपने देश में लेकर आए हैं अपने देश की माटी में
32:24जो हम कहते हैं कि हम एकलौते देश हैं पूरी दुनिया में जिसके पास पांच बिग्याट है तो उनमें ये
32:32चीता भी बड़े शान से शामिल है और हमारी तो कितनी पुरानी कहानिया रही हैं जिनमें चीता उसका हिस्सा रहे
32:39हैं
32:39ये अलग बात है कि शिकारियों के कारण, इनके शिकार के कारण दीरे-दीरे होकर ये पचास की दर्शक में
32:48ही विलुप्त हो गए
32:49लेकिन एक बार फिर अगर आये हैं, तो पूरे देश का सपना पूरा करने का जिम्मा इस पूरे विभाग ने
32:56उठाया हुआ है
32:58हम चीते के बिल्कुल पास थे, फिर भी हमारे मन में एक सवाल था कि शेर बाग चीते गाड़ियों पर
33:05हमले क्यों नहीं करते हैं
33:09कि अम घए लूमस करो और चाह जानवर को भी डरता है लेकिन जैसे ही आप जमीन पर रखेंगे तो
33:29उसे पता चलता है कि बोई लूग है तो फिर आपके लिए भी खतरा है और जानवर को भी डरता
33:35था उस पर जड़ता है उसका बढ़ता है
33:37एक चीता जैसा कि हमें बताया जा रहा है, कि जिस पोज में यहां पर सो रहा है, आपको ऐसा
33:41लगेगा कि शायद वो जागा हुआ है, उसका सर उठा हुआ, लेकिन आखें बंद, लेकिन इस समय वो विश्राम कर
33:48रहा है, शोने की स्थिती में है, ऐसी ही बहुत सारी दिलचस्�
33:52जानकारियां जीते के बारे में है, जो शायद आपको न पता हूँ, बिग कैट फैमली यानि जंगली बिल्लियों का परिवार,
34:10इस परिवार में साथ बड़ी जंगली बिल्लियां शामिल, शेर, बाग, तेंदुआ, जगवार, प्यूमा, स्नो लेपर्ड और चीता,
34:22ये सभी जानवर एक दूसरे से बजन, पंजे, दान, बाइट, फोर्स और रफ्तार के आधार पर अलगे, शेर और बाग
34:32का बजन सबसे ज्यादा होता है, तेंदुआ, स्नो लेपर्ड, ब्यूमा और जगवार पेड़ों पर चड़ना जानते हैं, लेकिन जब बात
34:41आती है �
34:41रफ्तार की, तो चीते से अकल्पनिय रफ्तार किसी की भी नहीं होती है।
35:11सबसे फास्टेस लैंड अनिमल है। अगर हम फिजिकल फीचर की बात करें, तो ओन एन अवरेज एक चीता कैसा होता
35:20है, उसकी लंबाई, उसका वेट, एक फुल-ग्रोन अडल्ट चीता?
35:25मेल हम केता हैं पूसामनेता अराउंड 55-65 kg के बीच में होता है।
35:38मेल हम अगर चीता के बाद के सबसे तारीके से अरोड़ने के अड़े, उसके बाद के बाद के घड़ेशन इसके
35:47बहुत चोटा रहता है, और उसके लिम्स बहुत लॉग होता है।
35:50कर बहुत थीक रहता है ह।
35:52और जो सबसे थेज़ जोड़ता है।
35:54उसके टेल एयटसस रड़र
35:55इसे सबसे तेर्य डुडने के वक्र वसकोद — बदल सकता है।
36:01और उसके सा नहीं पाकी जानवर को जैसे, कर्निवोस को टाईगर और लेपरड़..
36:07पुरी रिट्रेक्टेबल होता है वो बाहर आपके नेल्स दिखेंगे नहीं बड़ चीता का नेल्स यो है वो सेमी रिट्रेक्टेल होता
36:15है
36:15इन उर्ड गिप वाल रने ही
36:26चीता जमीन पर दुनिया का सबसे तेज दौडने वाला जानवर है
36:31फुल स्पीड पर 120 किलो मीटर प्रती घंटे की रफ़तार से दौड सकता लेकिन उसमें स्टैमिना बहुत कम होता एक
36:40जीते की डौड मुश्किल से एक मिनट की ही होती है या यूं कहें कि सिर्फ 200 से 300 मीटर
36:45फुल स्पीड पर दौडने के बाद ही जीता थक जाता
36:51अगर इतनी देर में चीते ने अपना शिकार पकड़ लिया तो ठीक वरना उसको दोबारा शिकार करने में फिर काफी
36:57समय लगता है
37:00एक बार शिकार के पीछे फुल स्पीड पर दौडने के बाद चीते को 30 मिनट का आराम चाहिए होता है
37:06एक स्टडी कहती है कि चीते दिन भर में सिर्फ 12 प्रतिशत समय ही घूमते फिरते हैं
37:12ज्यादा तर वो आराम करके अपनी उर्जा को बचाते हैं
37:16एक चीता जब फुल स्पीड में दौडता है तो एक छलांग में कम से कम 21 फीट की दूरी तय
37:22करता है
37:22जिसमें सिर्फ दो बार उसके पैर हलके से जमीन को छूते हैं
37:27यानि अगर ये कहा जाए कि अपनी पूरी रफ्तार के दौरान एक चीता करीब करीब उड़ी रहा होता है
37:32तो ये गलत नहीं होगा
37:33लेकिन एक चीता इतनी तेज कैसे दौड लेता है
37:40दरसल उसकी लचीली रीड की हड़ी स्ट्रेच होकर उनको लंबी स्ट्राइट देती है
37:45एक चीते के पंजे दौडते वक्त उसी तरह जमीन को पकड़ते हैं जैसे फुटबॉल शूज के स्पाइक्स होते है
37:51अपने पंजों की वजह से चीतों को इतनी तेज दौडने की ग्रिप मिलती है
37:55उनकी लंबी मोटी पूँच एक नाव की पतवार की तरह काम करती है
38:00जिससे वो संतुलन बनाते हैं और जल्दी जल्दी दिशा बदल सकते हैं
38:04इससे उनको अपने शिकार को पकड़ने में आसानी होती है
38:07चीते के नथुने बड़े होते हैं जो उनकी ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत को पूरा करते हैं
38:13उनके फेफडे और दिल भी बड़े होते हैं जिससे रक्त का प्रवाह आराम से बना रहता है
38:18वैसे बिग कैट फैमिली में होने के बावजूद चीते की एक और खासियत उसको अदभुत बनाती है
38:25क्या आप जानते हैं चीता दहार नहीं सकता
38:29शेर, बाग और जगवार जैसे बड़े शिकारी दहार सकते हैं
38:34लेकिन चीता बिल्ली की तरह म्याउं, घुर्राहट और चिडिया जैसी चहचाहाने की आवाजे निकालता है
38:47यही वजह है कि वैज्यानिक इसे रोरिंग कैट समू से अलग मानते
38:55चीता जंगल का सबसे फिट जानवर होता है
38:58लेकिन यहाँ एक टीम ऐसी भी थी जिसकी जिम्मेदारी चीते को फिट रखने की है
39:04यह एक चीता रेस्क्यू वेकल है और इनकी भूमिका बहुत बड़ी होती है जंगल के भीतर
39:12आप लोग कि अगर मैं जिम्मेदारी भूमिका समझना चाहूं कूनों जंगल के अंदर तो क्या है
39:20देखिए जैसा कि चीता एक प्रजाती है जो बापस से इंडिया में आई है तो कोई एक प्रजाती इतने सालों
39:29बाद बापस आई है
39:31तो अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी इसको बचाने की इसके संरक्षान की क्या क्या है कि चीजों के साथ
39:38आप लोग चलते हैं बेसिक चीजें जो चीता के लिए
39:40इमेडियेट इंट्रवेंशन के लिए जो भी जरूवत है हमारे पास यह बहुत ही लेटेस्ट इक्यूपमेंट है टेंकुलाइजिंग ड्रग डिलेवरी इक्यूपमेंट
39:48बोलते हैं इसको इसके साथ जो भी सपोर्टिंग ऐसे सिरीज हैं अनिमल के वाइटल पैरामीटर क
39:57करने के जो प्रोटोकॉल के तहर्य वेहिकल में साथ में ही रहते हैं अचा और अगर कोई मर्जनिशी सोती है
40:08उसको हैल्फ को लेके तो उसको उसको इंट्रवीन करने के लिए भी इसमें हमारे पास कोल्ड पैक्स हैं मतलब सारफ
40:16हम लोगों को इमेडियेट किसी भी लेंड
40:27काफी मुश्किल रहा होगा वह सफर भी जब चीतों को अफ्रीका के उनके नाचुरल हाबिटाइट से लेकर यहां लाया गया
40:35था आप उस समय से जुड़े हैं बिलकुल काफी काफी किसी भी अनिमल के लिए अगर एक लेंडिस्केप से दूसरे
40:41लेंडिस्केप में इंटर्ड
40:55करने के लिए हम लोगों को उनके साथ लगातार उनकी मौनिटरिंग करना पड़ता है 24 वाई 7 उनको कॉंटिनियस ट्रैक
41:02करके उस एनिमल के इस्टेस को हम लोग अपने विजिलेंट रखते हैं कि हमारे अनिमल को किसी भी तरीके का
41:08स्ट्रेस क्रियेट ना हो और जब स्ट्र
41:25चीता यहां पर आया है अब कैसा आपको महसूस होता है चीते को अगर किसी तरह की दिक्कत है उसके
41:41लिए आप लोग तैनात रहते हैं तो इसके लिए भी तो ट्रेनिंग हुई होगे न कि मन से डर निकला
41:45होगा
41:55चीतों को पहचानते हैं आप अदर जितने हैं डॉक्टरों के सामने बड़ा सवाल होता है कि चीता किस हाल में
42:01है यह कैसे पता करे तो यह काम करता है रेडियो कॉलर्स
42:07उन्हों में चीतों को स्थापित करने की एक पूरी प्रक्रिया होती है
42:11आप कैसे जिनको दूसरे देशों से लाया गया
42:14यहां पर उनको पहले क्वारिंटीन करके
42:16उसके बाद एक उससे बड़े बाड़े में
42:19और उसके बाद आजाद जंगल में घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है
42:23लेकिन उनको एक रेडियो कॉलर लगा रहता है
42:26उस रेडियो कॉलर की एहमियत बड़ी होती है
42:33जंगल में छोड़े गए चीते पर नजर रखना आसान नहीं होता
42:38यही वज़े है कि वन्यजीब विशेशज्य चीते के गले में रेडियो कॉलर लगाते है
42:43यह कॉलर चीते की लोकेशन गतिविधिक और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखने का सबसे अहम जरिया होता है
42:51यह एक ऐसा डिवाइस होता है जिसमें GPS और सेटेलाइट आधारित ट्रांसमिटर लगा होता है
42:56यह समय समय पर चीते की लोकेशन सिगनल के रूप में कंट्रोल रूम तक भेजता रहता है
43:04रेडियो कॉलर यह बताता है कि चीता नए जंगल में कहां जा रहा है
43:08क्या खा रहा है कितना घूम रहा है अगर चीता बीमार हो जाए घायल हो जाए या लंबे समय तक
43:15एक जगह पड़ा रहे तो टीम तुरंत अलर्ट हो जाती है
43:18इससे यह भी समझ आता है कि चीता जंगल में खुद को कितनी अच्छी तरह ढाल पा रहा है
43:24अगर चीता गाव या आबादी की तरफ बढ़े तो टीम पहले से सतर्ख हो जाती है और इंसानों और चीतों
43:31में संघर्ष ना हो इसके लिए आसपास के गाव के लोगों को चीता मित्र जागरुप करते रहते हैं
43:40जैसे ही कि गाववालों के मन में रहता है कि हमें नुकसान पहुचाएगा हमारा में काम यह है कि हमें
43:45उन लोगों को समझाना है कि हमारा चीता हमें कोई नुकसान नहीं पहुचाता है और अगर चीता नहीं नुकसान पहुचाता
43:52है कुछ भी
43:52पहुचाता और हमारे पास जंगल से लगी आधवासी बस्तियां जंजाती चेत्र है तो हमने कही बार केम्पिंग के माध्यम से
43:59और कविताओं के माध्यम से कही बार हमने केम्पिंग और जागरन अभ्यान चलाएं लोकल में आपने चीज पर गौर किया
44:06होगा मैं आपको कभी �
44:07यह घटना आपके संग्यान में नहीं आई होगी कि कुनो में कभी सिकार हुआ है तो यह चीता मित्रों के
44:12विस्टे सुपलपधी आपके सामने यह है चीता आने से कुनों में एको टूरिजम बड़ा है जिसे आज यूवा गाइच नचलिस
44:20और कई सफारी गाइच भी हैं तो
44:51यह चीता में एक जानवर नहीं बल्कि भारत की खोई हुई विरासद की वापसी
45:03साथ दशक बाद जंगल में दुबारा गूंग की सबसे तेज शिकारी की आहट
45:11दूनों आज सिर्फ जंगल नहीं बल्कि कुन्मीर, संरक्षन और प्रकृती के पुनरजन की कहानी बन चुका है
45:19हमारी सफारी पूरी हो चुकी थी, लेकिन बिग जैग फैमली के दूसरे सदस्यों को देखने की तमन्ना अभी भी हमारे
45:26दिन में
45:28क्यामरे में तो हमेशा के लिए ये तस्मीर कैद हो गए, लेकिन चीता हमेशा के लिए भारत की जमीन पर
45:35रहे ये समका उतरदायत वो हो जाता है
45:37क्योंकि जब भी कोई एक प्राणी विलुप्त होता है, इस प्रिथ्वी की सुन्दरता थोड़ी सी खपनी हो जाती
45:43अद्भुत, और विश्वस्तिय, और कल्पनिय में अभी के लिए इतना ही
45:48मुहमद अरज जुबैर और कैमरे परसन हितेश कुमार के साथ मुझे दीजिये इजाज़त
45:53देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रहिए आज तक
46:13झाल
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