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  • 19 hours ago
बनासकांठा जिले के अबाला गांव में देश की पहली गौमूत्र डेयरी ग्रामीणों के लिए कमाई का नया जरिया बन गई है. देवारामभाई पुरोहित के स्टार्टअप द्वारा शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट को आईहब गुजरात से 5 लाख रुपये की सहायता मिली. डेयरी में गौमूत्र को प्रोसेस कर प्राकृतिक खाद और जैविक कीटनाशक तैयार किए जाते हैं, जिससे रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा मिल रहा है. साल 2017 में 50 लीटर प्रतिदिन क्षमता से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट में बदल चुका है. भाभर तालुका के कई गांवों से रोज करीब 4000 लीटर गौमूत्र एकत्र किया जा रहा है, जिससे 70 से अधिक परिवारों को आर्थिक लाभ मिल रहा है.

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00:04जिस गौमूत्र को लोग अब तक बेकार समझते थे, वही आज बशुपालोकों के लिए कमाई का जर्या बन गया है।
00:13गुजरात के बनासकाठा जिले के अबाला गाउ में देश की पहली गौमूत्र डेरी ने ग्रामीन अर्थ्विवस्था को नई दिशा दी
00:22है।
00:26देवाराम भाई पुरोहित के स्टार्टप द्वारा शुरू किये गए इस प्रोजेक्ट को आईहब गुजरात से पांच लाख रुपे का फंड
00:34मिला है।
00:35अब ये पहल वेस्ट से बेस्ट और प्राक्रतिक खेती का जीवन्त उधारण बन गई है।
00:51इस अनोखे डेरी प्रोजेक्ट की शुरुवात अगस्त 2017 में 50 लीटर प्रति दिन शमता वाले छोटे प्लांट के साथ की
01:00गई थी।
01:01इसके बाद 2021 में 1000 लीटर प्रति दिन शमता वाला प्लांट और फिर 2024 में बढ़ा कर 10,000 लीटर
01:10प्रति दिन प्रोसेसिंग शमता वाला कमर्शिल प्लांट तयार किया गया।
01:15फिलहाल भाबर तालुका के 7-8 गाउं से प्रति दिन करीब 4,000 लीटर गौमूत्र जमा किया जा रहा है
01:24जिससे 70-80 परिवारों को आर्थिक लाब हो रहा है।
01:30मैं वो विचार करें हो कि केवीरते लोकों गोपालन पर्थि परेराई।
01:35अने क्या थी खेडूतों ने पैसा आपी शकाए।
01:37ये विशलाल लईने हमें गायना जरनों पर काम करवानों शुरू करी।
01:54प्लांट पे एकत्रित गौमुत्र को रिफाइन कर 55-60 डिगरी सेल्सियस तापमान पर प्रोसेस कर प्राकृतिक खाद और कीटनाशक तयार
02:05किये जाते हैं।
02:06इससे रासायन मुक्त खेती को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्वच और सुरक्षित उत्पादन प्राप्थ होता है।
02:38भाभर तालुका के अबाला गाउं में गौमूत्र आधारित ये प्लांट सफल स्टार्ट अप और प्राकृतिक खेती का सफल मॉडल बन
02:47चुका है।
02:48ये आत्व निर्भर गुजरात की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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