00:00This is not a nightmare.
00:03Iran has a story of a story.
00:07It was a story of a more nightmare.
00:10The name was Sawak.
00:12This nightmare was finally on the king's side.
00:15Last time we saw Iran and Israel's family.
00:20This time it was the most common story.
00:23This was the most common story.
00:24In 1957, he was Sawak.
00:27C.I.A. के दस्तावेज बताते हैं,
00:29अमेरिका और इसराइल दोनों ने इसे ट्रेन किया।
00:32वो ट्रेनिंग थी बूच ताच की, जासूसी की और आवाजें बंद करने की।
00:37एक प्रोफेशनल मशीन, वो मशीन पहुंची युनिवर्सिटीस में,
00:41मस्चिदों में, बाजारों में।
00:44अमेरिकी आर्काइब्स के मताबिक हजारों एजेंट्स, लाखों मुख्विर।
00:48इसका नतीजा था तहशत।
00:51अगला आदमी एजेंट है, पडोसी, दोस्त, भाई, कोई नहीं जानता था।
00:56लेकिन एक नौजवान था जो डरा नहीं, अली खामने, सबैक ने उसे पहली बार पकड़ा, वो पहली बार नहीं था।
01:04खामने.IR की ओफिशल बायोग्रफी के मताबिक कई बार गिरफता रही, हर बार और सख्त होकर नहीं।
01:11लेकिन एक दिन, 1976 में, Amnesty International ने दुनिया को बताया, इरान में टॉर्चर सिस्टेमाटिक है।
01:18उस रिपोर्ट के बाद, Carter Presidential Library के मताबिक, Carter ने शाह पर दबाव डारा।
01:24शाह ने सुधार का वादा किया, वो वादा आधा अधूरा था।
01:28सवैक को थोड़ा धीला किये, लेकिन बहुत देर हो जुगी थी।
01:33और उनहीं दिनों, 1977 से 78 में, सडके भरने लगी।
01:38सवैक का जवाब था और दबाव।
01:40उस दबाव का नतीजा, काला शुक्रवार।
01:43एससुएटेड प्रेस के मताबिक, फौज ने भीड पर गूलियां चलाई।
01:47सवैक का सबसे काला दिन और उसके बाद जनवरी 1989 शाह गए।
01:53सवैक, अब किसके लिए काम करें।
01:56और जो आया, वो सवैक का सबसे पुराना दुश्मन था।
02:00एक फर्वरी 1989 एपी के मताबिक, खुमैनी तहरान पहुचे और उन्ही के हुक्म से फर्वरी 1989 रॉइटर्स के मताबिक, सवैक
02:10ऑफिशली बंद हुआ, 22 साल खते।
02:15जब सवाक बंद हुआ, उसकी हजारों फाइल्स नई सरकार के हाथ लगी।
02:22एपी के मताबिक, हजारों नाम, हजारों रास। उन फाइल्स में एक नाम था, अली खमेने। सवैक का शिकार, अब सवैक
02:31का उत्तराधिकारी।
02:35इसलिए सवाक ने शाह को बचाने की कोशिश की। लेकिन सवाक ही वो वजह बन गया, जिसने शाह को डुबोया।
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