00:00ये स्वधर्म दर्शन चैनल है और आप देख रहे हैं लंका सीरीज का दूसरा एपिसोड
00:05पौरानिक कथाओं के अनुसार एक दिन नाना सुमाली में रावन को राक्षस वंच के अतीत की वो कथा सुनाई जिसने
00:12आगे चलकर लंका के एतिहास को बदल दिया
00:14राक्षस राट सुमाली ने बताया कि वो और उसके दोनों भाई माल्यवान तथा माली अत्यंत पराक्रमी असुर योध्धा थे
00:22तीनों भाईयों ने समुद्र तटपर स्थित सुन्दर लंकापुरी को अपना निवास थल बनाया और वहीं राक्षसों का सामराज्य स्थापित किया
00:29समय के साथ हुनका परिवार बहुत बड़ा और शक्तिशाली हो गया
00:33माल्यवान के साथ पुत्र, सुमाली के दस पुत्र और माली के चार पुत्र हुए
00:38पूरा राक्षस कुल साहस और पराक्रम के लिए प्रसिध था
00:43असुरों की बड़ती ताकत से परिशान होकर साधू संत भगवान विश्णू की शरन में पहुचे
00:48और राक्षसों के विनाश के लिए गुहार लगाई
00:51भगवान विश्णू ने उन्हें राक्षसों की संहार का आश्वासन दिया
00:54जब ये समाचार राक्षसों तक पहुचा
00:57तो वी युद्ध के लिए एकत्रित हुए
00:59और माली के नेत्रित्व में इंद्र लोग पर आक्रमन बोल दिया
01:02युद्ध में भगवान विश्णू ने सुदर्शन चक्र चलाया
01:05और असंख्य राक्षसों का वध कर दिया
01:07माली भी मारा गया
01:09और भागते हुए राक्षसों का पीछा करते हुए विश्णों उनका संहार करते रहे।
01:14ये देखकर सुमाली का बड़ा भाई पराक्रमी माल्यवान पुनह युद्ध भूमी में लोटा।
01:18लेकिन अंततह वो भी मारा गया।
01:20तब सुमाली को शीष राक्षसों को बचाने के लिए लंका त्याक कर पाताल लोग में शरण लीनी पड़ी।
01:25उसी दिन सुमाली में संकल्प लिया कि एक दिन वो असुरों का खोया हुआ सम्मान अवश्य वापस प्राप्त करेगा।
01:32अपनी नाना सी राक्षस वंच का इतिहास जाननी की बाद रावन नी द्रिड स्वर्मी कहा।
02:03जाननी की लिए स्वधर्म दर्शन चैनल पर दीखती रही लंका सीरीज और चैनल को सब्सक्राइब, लाइक और शेयर करना मत
02:09भूलिएगा।
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