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  • 6 hours ago
गया का ऐतिहासिक दिग्घी तालाब कलेक्ट्रेट के बगल में होने के बावजूद प्रशासनिक उपेक्षा, गंदगी, शराब की बोतलों और नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है.

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00:05बिहार के गया शहर का पावर सेंटर एक तरफ कलेक्टरेट दूसरे तरफ कमिशनरी दफ्तर और पास में गया कोट लेकिन
00:13कानून के इन रक्षकों की नाक के नीचे दम तुड रही है एक एतिहासिक धरोहर ये है गया का प्राचीन
00:21दिग्गी तालाब जो आज अपनी बदहाल
00:23पर आंसू बहा रहा है ये सिर्फ एक तालाब नहीं बलकि पहाडों के शहर गया की लाइफ लाइफ लाइन हुआ
00:31करता था ब्रिटिश काल में शहर का वाटर लेवल मेंटेन रखता था लेकिन विकास की ऐसी भूख जगी कि इसके
00:38एक बड़े हिस्से को मिट्टी से भर कर कम
00:49कमिश्नरी बना दिया गया इतिहास के जानकार विजय कुमार मिठू बताते हैं कि तालाब की बची खुची सांसे तब ठम
00:57गई जब उन्ने सो तिरानवे पंचानवे के दोर में ततकाली इंडियेम राजबाला वर्मा के एक फैसले ने इसके किनारे मीट
01:05मचली की दुकाने �
01:06खुलवादी इन दुकानों का सड़ा गला हुएस्ट और शेहर के गंदे नालो का रोख सीधे इस एतिहासिक तालाब की गोद
01:14में मोड दिया गया
01:16सबसे उस तलाब का दुरभाग ये रहा कि हमारे कहां 93 से 95 के बीच में एक ऐसी जिलापदाधिकारी तिराजबाला
01:26वर्मा जिसने दिगी तलाओ के भी चारो तरफ दुकान बना दिया और खास करके मचली का दुकान, मीट का दुकान,
01:35होटल जिसकी सारी गंदगी जा रही है
01:39साल 2018 में इसके सौंदर्जी करण के लिए 2 करोड 54 लाख रुपए की सुईकृती मिली थी, लेकिन धरातल पर
01:46धाई करोड का कोई काम नजर नहीं आया, सिर्फ कागजी खाना पूर्ती और चलावा किया गया है
02:08कभी 1990 तक यहां रंग बिरंगी नावे चलती थी और लोग नौका विहार का आनंद लेती थे
02:15लेकिन आज शाम ढलते ही यहां सम्रांत नागरिकों का आना बंद हो जाता है
02:20बदमाशों ने सुलक्षा के शीशे तोड़ दिये हैं और अब यह पूरा परिसर शराब और गांजा पीने वालों का सेफ
02:27जोन बन चुका है
02:54इस बधाली पर जब ETV भारत ने नगर आयुक्त अभिशेक पलासिया से जवाब मांगना चाहा तो अधिकारी मौन रहे
03:02अब देखना है कि एस अतिहासिक तालाब का भाग्य कब बदलेगा गया से ETV भारत के लिए रतनेश कुमार की
03:11रिपोर्ट
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