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  • 2 days ago
लाहौर में लौट रहे पुराने हिंदू-सिख नाम, पाकिस्तान में विरासत बचाने की नई पहल

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00:00जरा सूची एक दिन आप सोकर उठें और आपको पता चले कि पाकिस्तान अब खुद को भारत का अंग मान
00:06रहा है
00:06वैसे भी पाकिस्तान का इतिया सिर्फ असी दशक पुराना है और एक कहावत भी है जिनने लहोर नहीं बेकिया वो
00:13जमिया ही नहीं
00:14यानि जिसने लहोर नहीं देखा उसका जन्मी नहीं हुआ अपने अम्रित सर से लगभग 50 किलोमिटर की दूरी परिस्तित लहोर
00:21अब अपने इस्लामी करण के सिकंजे से बाहर निकल रहा है
00:24पाकिस्तान जडो की ओर लोट रहा है अगर पाकिस्तान में हो रहे बदलावों पर नज़र डाले तो महस दो महीने
00:31के भीतर लहोर में नव ऐसी जगें जिनकी आजादी के बाद वास्विक्ता चीन ली गई थी मूल और वो जो
00:38मूल हिंदुत्त की तरफ था वो लोट रहा है
00:40अब पूरी देखिएगा क्योंकि पाकिस्तान अपने जडो की तरफ लोट रहा है यानि बारत की तरफ बदलाव की शुरुआत कहां
00:46से होती है अपने घर से घर की बाहर की सड़त से
00:491947 के बाद देश में बहुत कुछ बदला यहां भी और वहां भी लहौर बदल गया जो शहर कभी हिंदू,
00:57सिक, मुस्लिम, जैन, इसाई और पार्सी संस्कृती का संगम था वो दीरे दीरे सिर्फ एक पहचान में समिख दिया गया
01:04सड़कों के नाम बदल दिये गए, महलों की पहचान बदल दी गई, इतिहास के नए रंग में रंग दिया गया
01:10लेकिन अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांद की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है
01:15लहर की कई सड़कों, गलियों और चौकों के उनके पुराने नाम वापस दिये जा रहे है, यानि इस लाम पुरा
01:22फिर क्रिश्न का नगर बनने जा रहा है
01:24बाबरी मस्जिस चौक अब जैन मंदिर का चौक हो गया है, सुननत नगर फिर से संत नगर कहलाएगा, मुस्तफाबाद फिर
01:32धर्म पूरा बन गया है
01:33और सिर्फ यही नहीं, लक्ष्मी चौक जिसे बदला गया था, फिर अपने पुरानी पैचान पा रहा है
01:39डेविस रोड, क्विन्स रोड और लॉरेंस गार्डन जैसे नाम भी वापस लोट रहे है
01:44पिछले दो महीनों में नो जगों पर नए साइन बोर्ड लग चुके है
01:48पंजाब सरकार का कहना है, यह सिर्फ नाम बदलना नहीं, लहोर की साजी विरासत को वापस लाना है
01:55मुख्यमंत्री मर्यम नवास की कैबिनेट ने इसे मंजूरी भी दे दी है
01:59सरकार मानती है कि दशकों से मिटा दी गई लहोर की असली पैचान को फिर से जिंदा करना ज़रूरी है
02:06लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सरकारी बोर्ड भले ही बदल दिये गए हैं
02:11लहोर के लोगों के जबान पर पुराने नाम कभी नहीं मिटे
02:15रिक्षा वाले दुकान वाले चाय वाले आज भी इन जगों को पुराने नामों से ही बुलाते हैं
02:21यह 80 साल बीच चुक हैं इस सभी चीज़ों को उनके लिए लक्षमी चौक हमेशा से लक्षमी चौक ही रहा
02:27Wall City के नाम से मशुहूर लाहूर के पूर्व महानेदेशक कामरान लशारी भी कहते हैं कि लाहूर की पैचान किसी
02:34एक धर्म से नहीं थी बलकि उसकी मिली जुली संस्कृती है
02:38यानि लाहूर सिर्फ मुस्लिम इतियास नहीं बलकि हिंदू, सिख, जैन, इसाई और पार्सी विरासत का भी शहर है
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