00:00अल नीनो और भारतीय मॉंसून
00:01हर बार क्यों गलत साबित होती है सूखे की भविश्यवाने
00:04भारत में अल नीनो को आम तौर पर कमजोर मॉंसून और सूखे से जोड़ कर देखा जाता है
00:08लेकिन इतिहास बताता है कि हर बार ऐसा नहीं होता
00:26इसे मॉंसून की हवाएं कमजोर पड़ सकती है
00:28हलांकि साल 1997 से 98 इसका सबसे बड़ा अपवाद माना जाता है
00:32उस समय दुनिया ने गंभीर सूखे की आशंका जताई थी
00:34लेकिन भारत में अच्छी बारिश हुई
00:36वैज्यानिकों के मुताबिक पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपूर यानि हिंद महासाविर की विशेष स्थिती ने
00:40अल नीनों के असर को काफी हद तक कम कर दिया था
00:42एक्सपर्ड बताते हैं कि मॉंसून सिर्फ एक फैक्टर से तया नहीं होता
00:45हिंद महासागर का तापमान, वैश्विक गर्मी, हवाओं का पैटर्न और क्षेत्रिय मौसम प्रनाली भी अहम भूमिका निभाते हैं
00:50यही कारण है कि अब मौसम विभाग मल्टी फैक्टर मॉडल के जरी मौनसून का पूर्वानुमान तयार करता है
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