00:00अभी उधर गया था रिशिकेश की तरफ बापरे पाफ चार धाम और गंगोत्री जाने वाले अमुनोत्री जाने वाले तुम देख
00:08रहे हो ग्लेशियर है तुम्हें पता है वहां से ही धार चलिए कि एक ऐसा तापमान रहा है तापमान का
00:13टेमप्रिचर का ऐसा पैटर्न रहा
00:15और जो हवा रही है उसमें हुमिडिटी का उसमें मौश्यर का ऐसा पैटर्न रहा है कि ग्लेशियर जमता जाता है
00:21और पिखलता जाता है वह जो पितना पिखलता जाता है उसी को हम क्या बोलते है मागंगा जब आपकी टेमप्रेचर
00:27राइज हो रही है टेमप्रेचर राइ�
00:42तब तक पानी चपकता रहता है अगर आप फ्रीजर को नहीं देखो पानी को टपकता देखो तो आपको लगेगा कि
00:47धारा तो बनी हुई है लेकिन सचा ही है कि फ्रीजर में जो बर्फ थी वो लगातार पिघल के कम
00:52होती जा रही है और एक बिंदो ऐसा आएगा जब वो जो ध
01:05खाई दे रही हमारी नदियों में उधारा अचानक से सूखेगी आपको यह क्या यहां तो यह तो नदी थी यह
01:11तो खाली जगह यह कंकड रेत कहां से आ गई नदी कहां गई हमारी देखो मेरे तो कोई आने वाली
01:18पीड़ी है नहीं अपनी व्यक्तिगत पर तुम्हें तो ज
01:26जवाब देने लाइग तुम्हारा चेहरा बचेगा नहीं
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