00:17बार्तिय पुरातत्व सर्वेक्षन के सबूतों, इतिहास के तत्यों, गवाहों और मौके पर मौझूद हालात को देखते हुए
00:23इंदौर के हाई कोट ने ऐलान कर दिया की भोच शारा में, जिस मंदिर को दश्कों से कमाल मौला की
00:29मकबरे और मस्जिद के तौर पर बताया जा रहा था, वो मस्जिद नहीं मंदिर ही है
00:34इंदौर हाई कोट में अपरेल, 6 अपरेल से इस मामले की लगातार सुनवाई हुई बीच में जो छुटिया पड़ी वो
00:39अलग है
00:39और फिर उसके बाद आज इंदौर हाई कोट ने इसमें बहुती एतिहासिक फैसला दिया है
00:43राम मंदिर के जज्ज्मिंट के बाद ये दूसरा ऐसा फाइनल लिडने है जो हाई कोट से आया है
00:49और आज इतने दिन की सुनवाई और 2022 से लगातार चार साल की इस लीगल कारवाई के बाद
00:55आज ये बाद सिद्ध हुई है इस पश्ट हुई है कि जो भोष शाला का पूरा परिसर है
00:59वो राजा भोष द्वारा बनाए गया था
01:01ये एक माँ वाग देवी माँ सरस्वती का स्कूल रहा है
01:05स्कूल अफ संस्क्रित लर्णिंग रहा है उनका मंदिर रहा है
01:07और जो यहां पर मुस्लिम समाज के लोग गलट धंग से नमाज अदा करते आए है
01:11उस साथ एपरिल 2003 के आउडर को उस भाग को कोट ने आज खारिज कर दिया है
01:16और हमारे जितने आर्गुमेंट थे कोट ने उस बात को एकसेप्ट किया है
01:21और जो माँ सरस्वती मावाग देवी की आज प्रतिमा बिटिश म्यूजियम लंडन में रखी हुई है
01:26कोट ने ये भी कहा है सरकार से कि उसको कंसिटर करें कि उसको वापस लाया जा सके
01:30साथी साथ अगर कोट ने मुस्लिम पक्ष को ये लिबर्टी दिया कि अगर tackling के साथ अमने प्रतिय दन देते
01:49हैं
01:56थापित होता है इससे धार में देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर होने का पता चलता है इसलिए उस इलाके का
02:03धार्मिक
02:03चरित्र भोच्षाला माना जाता है जिसमें डेवी वाग देवी सरस्वती का मंदिर है एसाई के सर्वे
02:24मुस्लिम समधाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य धार जिले में मस्जिद बनाने के लिए जमीन देने की
02:30अर्जी पर विचार कर सकता है
02:31मा की मुक्ति और उसके गोरों की पुनरे स्थापना कर दीन जो इसका इंतिजार किया जाना था वो भूत नजदिक
02:38आ गया है
02:38जिन हिंदु कारी करता हूँ नहीं यहां पर संगर से किया लाटी डंडे खाए आज उन्हें भी यह जीत जो
02:44है यह उनी के नाम है
02:5411 सदी की वो धरोहर जिसकी शकल वक्त के गर्द में ऐसी बदल दी गई कि उसके वजूद को लेकर
02:59अदालत तक सबूतों की लड़ाई लड़नी पड़ी
03:04जिस जमाने में यहां कभी वाग देवी के आराधना उपासना होती थी वहां हवन कुंड वजू खाना बन गया था
03:18लेकिन अदालत के इंसाफ के तराजू में जब पत्थर दरो दीवारों से बोलते सबूत तौले गए
03:23तो पता चला की राजा भोज के जमाने से मंदिर की शकल में मौजूद इमारत मुस्लिम आकरवनकारियों के जमाने में
03:30मकबरा और मस्जित की शकल में बदल दी गई थी
03:32हाला कि अदालत में मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि खिलजी काल के इतिहासिक रिकॉर्ड और उस समय के
03:38खातों में धार में किसी भी सरस्वती मंदिर को तोड़ने का जिक्र नहीं है
04:06जो दस भागों में कुल 2089 पन्नों की दस्तावेजी रिपोर्ट थी इसमें भोज शाला परिसर में किये गया ठानवे दिनों
04:13के सर्वे की रिपोर्ट थी
04:14रिपोर्ट में कई पुरा तात्विक और धार्मिक साक्षियों का उलेक किया गया
04:18सर्वे रिपोर्ट में पता चला कि परिसर में भगवान शिव, विश्नु, वासुकी नाग और गणेश सहित कई, प्राचीन मूर्तिया और
04:25शिल्प थे
04:25जिनका केमिकल ट्रीटमेंट कर उन्हें वाज्यानिक साक्षियों के रूप में प्रस्तूत किया गया
04:30सबसे संसनी खेज, खुलासा ये था कि भोजशाला में 16 तलगर यानी सब्टेरेनियन स्ट्रक्चर्चर्स थे
04:37जिनका उलेक दस्तावेज में विस्तार से किया गया, इसके अलावस सर्वे में ये भी प्रमाण मिला
04:41कि कमाल मौला मस्जित के निर्माण में भोजशाला के प्राचीन अवशेशों का उपियोग किया था
04:4898 दिनों की मैनत से तैयार की गई, एसाई की रिपोर्ट अब इस विवाद की दिशा तै करने वाली साबित
04:54हुई
04:54इन तमाम सबूतों और गवाहों को देखते हुए हाई कोर्ट ने से मंदिर घोशित किया
04:58हाला कि मुस्लिम पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ की आस लगाए हुए है
05:02रवीश पाल सिंग भार आज तक
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