00:00उनीस सो तिरसक की फिल्म दिलेक मंदीर का बोलू चलेगा तो दिलेक मंदीर का गीत फिर से एक बार शैले
00:11इंदरशंकर जेकिशन और लट्टाजी रागा सावरी में निपद ये गीत अब पती का जान ले वा उपरेशन होने जा रहा
00:17है और उसकी अंतिम इच्छा समझ कर एक �
00:21नाई का गा रही है और वो कह रही है कि चंदा तू ठहर जा रात तू भी ठहर जा
00:28रुक जा रात तो वो रुकना जो है तो लता जी ने इस कदर दिखाया है कि वो एक पतीवरता
00:34का कहना है कि उसमें अधिकार है कि रुक जा रात ठहर जारे चंदा हर किसी भावना के साथ लत
00:43जाजी कुछ ऐसा एक पॉज ले लेती है उस तर्स में कि वो बिलकुल उनका जो स्वर्गी गायम है उनका
00:50स्वराविन है उसका साक्षाकार हमें करा देती है गीत तो आपने पहचाना इस गीत को आपके समने सामने पेश करने
00:57के लिए तालियों की गूंच के साथ मैं गुल जी
01:13वो उनकी खासियत थी तर्स की जो इस गीत में आप अनुभव करेंगे चलिए सुनते हैं
01:50रुक जानों के ठहर जारे चंदा बीती ना मिलन की भीदा
02:00आज चांदनी ये नगरी भी अरवानों का मिला
02:10रुक जाना के ठहर जारे चंदा बीती नो मिलन की भीदा
02:20आज चांदनी ये नगरी में अरवानों का मिला
02:30रुक जाना के ठहर जारे चंदा
02:53पहले मिलन की याद लेकर आई थे ये वात से
03:08पहले मिलन की याद लेकर आई है रात सवारे
03:18दोग राती है ये फिरी ये सजारे मेरी तुहारी प्रीम कहानी
03:35रुक जाना के ठहर जारे चंदा पीती न मिलन की बेला
03:46आज चांदरी के नगरी में अरवानों का मिला
03:55रुक जाना के ठहर जारे चंदा
04:15कल का डरना काल की चिंदा दोठन में मन एक हमारे
04:30कल का डरना काल की चिंदा दोठन में मन एक हमारे
04:39जीवन सीमा के आगे भी आउंगी मैं संग तुहारे
04:50आउंगी मैं संग तुहारे
04:57रुक जा रात ठहर जारे चंदा पीती न मिलन की बेला
05:06आज चांदली की नगरी में अर मानू का मेला
05:17रुक जा रात ठहर जारे चंदा पीती न मिलन की बेला
05:26आज चांदली की नगरी में अर मानू का मेला
05:36रुक जा रात ठहरे जारे चंदा
05:42रुखे जारा के ठेरे जारी चल्ड़
05:47रुखे जारा के ठेरे जारी चल्ड़
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