00:00तो जब हम तारीख के अजीन तरीन फातिहीन की बात करते हैं, तो कुछ नाम ऐसे हैं जो फॉरन जहन
00:06में आते हैं, लेकिन आज हम जिस तारीखी जाइजे का आगास कर रहे हैं, वो एक ऐसी शांदार शक्सियत के
00:12बारे में है, जिनकी पहचान सिर्फ उनकी तलवार नहीं, बल
00:29लेकिन सची बात तो ये है कि उनकी इनसानियत और रहम दिली उनकी जंगी महारत से कहीं ज्यादा हैरान कुन
00:35थी, और आज हम यही देखेंगे कि आखर एक हकीकी लीडर होता क्या है, अब जरा इस बात पर गोर
00:42कीजे, क्या कोई फाते अपने सबसे बड़े दुश्मन पर भ
00:58जहां एक कम उम्र, खौफ से कामतीवी लड़की दाखिल होती है, और पता है वो डरते डरते क्या मांगती है,
01:04वो उसी शेहर की माफी मांगती है, जिसे फता करने के लिए सुल्तान की फौज ने पूरे 38 दिन तक
01:11अपना बेपना खून भाया था, और फिर जो सुल्तान का ज
01:27लड़की दरसल उनके सापका मौसिन और बाद में हरीफ बनने वाले नूरुदीन जंगी की बेटी थी, अपना खून पसीना बहा
01:35कर जीता गया शहर इजाज फोरण उसके हवाले कर देना, ये वाक्या उनकी बेमिसाल बुर्दबारी और दरगुजर को बड़ी खुबसूर
01:42लड़ी से वाज़ करता है, एक बिखरी हुई सल्तनत को मुतहिद करना, मिसर से दमिश्क तक, अगर हम उनकी अप्तदाई
01:50जिन्दगी पर नज़र डालें, तो ये देखना बहुत दिल्चस्त है, कि वो किस तरहां एक आम मिलिटरी कमांडर से उभर
01:56कर, एक इंतशार जदा �
01:58खिते को मुतहिद करने वाले रहनुमा बने, और उनका अंदाज हुक्मरानी कितना मुक्तलिफ था, जब वो मिसर के हुक्मरान बने,
02:05तो उन्होंने आम बाच्छाओं की तरह अपने खजाने नहीं भरे, बलके काहिरा का सारा खजाना गरीब अवाम के लिए बांट
02:12दिया, �
02:13और अपने लिए वाकी कुछ नहीं बचाया, लेकिन जाहिर है, ये सब इतना आसान नहीं था, उनकी राह में कुछ
02:19इंतहाई खतरनाक अंदरूनी रुकावटें भी थी, उनमें सबसे खौफनाक नाम फिदाईन का था, जिने हम हशाशीन भी कहते हैं, और
02:28ये इतने खौफन
02:28पर इतने खौफनाक थे कि अंग्रेजी का मशूर लवज असेसन भी इनी के नाम से वजूद में आया है, उनके
02:34लीडर शेख सिनान थे, और इन फिदाईन को सुल्तान के मुछालिफ उमरा ने सिर्फ एक काम के लिए भारी रकम
02:40दी थी, और वो था सलाउदीन को रास्ते से ह
02:54लेकिन हद तो तब हो गई जब एक राद सल्तान के बिस्तर पर एक जहर आलूत खंजर और धंकिया में
03:01इस खते उड़ दिया गया, ये एक इनतहाई वाज़े और देशतनाक पेगाम था, कि अब वो उनके मुकमल रहम औ
03:08करम पर हैं, लेकिन इस वाके के बाद सल्तान का रद
03:24दुश्मन को जिंदगी भर के लिए अपना वफादार इत्तिहादी बना लिया, ये साबित करता है कि जंगे सिर्फ दलवारों से
03:31नहीं जीती जाती, बलके दिल जीत कर दुश्मन को शिकस देना असल कमाल है, अब हम जंगे हतीन, यानि अर्ज
03:38मुकदस के लिए होने वाले �
03:40इस फैसला कुन तसादम की तरफ बढ़ते हैं, ये वो जंग थी जिसकी आग भड़काने में सबसे बड़ा हाथ रिनाल्ट
03:47का था, वो लगातार अमन मौाहिदों को तोड़ रहा था, मुसल्मानों के तिजारती काफलों पर बेदर्दी से हमले कर रहा
03:54था, यहां तक कि इसन
04:08की फौज ने जबरदस्त हिकमत अमली अपनाते हुए पानी के तमाम एहम चश्मों पर कबजा कर लिया था, और बिलकुल
04:15ताजा दम थी, दूसरी तरफ यरूशलम के बादशा शाह गाय की फौज अपने बेजा गुरूर में 20 किलो मीटर का
04:22लंबा सफर एक इंतहाई खुश
04:37के पहिये को थोड़ा पीछे ले जाएं तो 1177 में रमला के मकाम पर सुल्तान को एक दर्दनाक शिकस्त भी
04:45हुई थी, ये एक कड़वा सबक था, लेकिन उन्होंने इस से सीखा, फिर 1189 में बॉल्डविन चोहार्म को शिकस्त दी
04:53और मुसलसल मेहनत करके 1187 तक एक ऐसी नाका
04:58बिले शिकस्त फौज तेयार कर ली, जिसके सामने टिकना अब किसी के बस की बात नहीं थी, चार जुलाई 1187
05:04की सुबा, इस मैदान जंग का जरा तसवर करें, रात के अंधेरे में मुसल्मानों ने प्यास से बिहाल सलीबियों का
05:12महासरा कर लिया, फिर सूखी घास को आग ल
05:26दिये थे, तुलुए आफ़ताब का हमला तो बस एक आखरी और फैसला कुन जरब थी, जंग खतम होने के बाद
05:34खैमे का माहूल इंतहाई कशीदा था, जालिम जिनार्ड को तो उसकी बद एहदी के फॉरन सजा मिल गई, लेकिन शाह
05:41गाए खौफ से कांप रहा था, उसे ल�
05:56यकीन माने, ये उनकी आला जर्फी और गेर मामूली इज़त नफस का एक बहुत बड़ा सबूत था, फता और रहम,
06:05बैतल मुकदस की वापसी, जंग हुतीन के बाद, अक्तूबर 1187 में सुल्तान ने बैतल मुकदस की जानब मार्च किया, उनका
06:14मकसद बिलकुल वाज़ था
06:16शहर को वापस लेना है, लेकिन उनकी एक बड़ी कड़ी शर्ट थी कि माजी के इस खूनी और वहश्याना खेल
06:23को अब हर्गिस नहीं धोराया जाएगा, और ये हिंदसा 88 ये बहुत माइने रखता है, पता है क्यों? क्योंके इस
06:31वाक्त बिलकुल 88 साल गुजर चुके थे ज
06:44सब को यही लग रहा था कि आज तारीख खुद को दोहराएगी और मुसल्मानों की तरफ से बदला लिया जाएगा,
06:51लेकिन कमाल देखिए, 199 के इस जालिमाना खुन खराबे के बिलकुल बरक्स, 1187 में सुल्तान ने शेहर के दर्वाजे पुरा
07:00मनतौर पर खुलवाए, किसी
07:14एक वाकई हैरान कर देने वाला है, तीसरी सोलीवी जंग, शेर दिल बादशा की आमद, जाहिर है, बैतल मक्दस की
07:21इस तरह चिन जाने से पूरे यॉरप में एक भुन्चाला गया, और इसी के नतीजे में तीसरी सोलीवी जंग शुरू
07:28हुई, जिसमें इंगलेंड के मशू
07:43जिसने घुसे में आकर अक्का में तकरीबन चार हजार मुसल्मान कैदियों को बेदर्दी से कतल करवा दिया, और दूसरी तरफ,
07:51जब वही रिचर्ड मैदाने जंग में बिमार पड़ गया, तो सुल्तान ने उसे मारने का कोई फाइदा नहीं उताया, बलके
07:57उसे बरफ वा
07:58ठंडा शर्बत और दवाईया बिजवाएं, यानि इनसानी हमदर्दी की ऐसी मिसाल वाकी कहीं और मिलना मुश्किल है।
08:29सुल्तान जंगो से फारिग होकर दिमश्क वापस आए, उनके दिल में हच करने की शदीद ख्वाहिश थी, और जब वो
08:35वापस आने वाले हाजियों का इस्तकबाल कर रहे थे, तो रो पड़े, और फिर चार मार्च 1193 को वो इस
08:42दुन्या से रुखसत हो गए, लेकिन जो बा
08:58जलत अवाम पर खर्च हो चुकी थी, और तारीख किस तरह चीजों को याद रखती है, इसकी एक हैरत अंगेज
09:04मिसाल 1917 में देखने को मिली, पहली जंग एजीम के दौरान फ्रांसीसी जेनरल हेंडरी गौरू जब दमिश्क में दाखिल हुआ,
09:12तो वो सीधा सुल्तान की कब
09:13पर गया और उसे ठोकर मार कर कहा, सलाह الدین हम वापस आ गए हैं। आप अंदाजा लगाएं कि उनका
09:20खौफ और उनकी शक्सियत का असर सदियों बाद भी यॉरपी जहनों पर किस कदर हावी था। तो इस तफसीली जाइजे
09:27को हम एक इंतहाई एहम सवाल पर खतम करते हैं। �
09:30जरा सोचिये क्या तारीख वाकई उन लोगों को याद रखती है जो खौन की नदिया बहाते हैं या फिर वो
09:36उन्हें जिन्दा रखती है जिन्होंने ताकत के उरूज पर होकर भी अजीम रहम दिली का मुझारा किया। आला किरदार एक
09:43ऐसी मेरास छोड़ जाता है जिससे स
09:45जदिया भी नहीं मिटा सकती है इस पर जरूर सोचिएगा हमारे साथ इस दिल्चफ सफर में शामिल होने का बहुत
09:50शुक्रिया।
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