00:00इस्माइल बगाई, इरान के विदेश मंत्राले के प्रवक्ता हैं और आज ये अमेरिकी राष्ट्रपती ट्रम्प की धमकियों और उसके बाद
00:07दिये गए इरान के जवाब पर बात करेंगे
00:10हमारे साथ जुड़ने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया सर
00:14पहले बाद प्रस्ताव की, इस बार के प्रस्ताव में क्या अलग था, अमेरिकी प्रस्ताव को लेकर क्या दिक्कतें थी और
00:21आपका काउंटर ओफर क्या था, साथी ट्रम्प ने इसे मन्जूर क्यों नहीं किया
00:35मुझे लगता है कि आपको इसे खास संदर्व में समझना होगा
00:40पिछले दस साल से ज्यादा समय से अमेरिका के साथ हमारी राजनाईक प्रक्रिया चल रही है
00:49इसी के तहट हमने साल 2012 से पहले भी परमानु मुद्दे पर वार्ता की
00:54लेकिन 2012 में उस प्रक्रिया की शुरुआत हुई जिसके कारण 2015 में JCPOA का गठन हुआ
01:08फिर 2018 में अमेरिका ने JCPOA से एक तरफा हटने का फैसला किया
01:13इरान ने लंबा इंतजार किया इस उम्मीद में कि यूरोपिये साज़ेदार किसी तरह अमेरिकी वापसी की भरपाई करेंगे
01:24पर उन्होंने ऐसा नहीं किया इसलिए मई 2019 में इरान ने अपनी प्रतिबधता कम करने का फैसला किया
01:32हम हर दो महिने में अपनी प्रतिबधताएं घटाते रहे ताकि अन्य पक्षों को इसकी भरपाई करने का समय मिल सके
01:40मगर इसका कोई असर नहीं हुआ
01:49हाल के युद्ध में जब दूसरी बार युद्ध विराम हुआ
01:52तब हमने बातचीत की राजनईक प्रक्रिया एक बार फिर शुरू की
01:56हमने कहा कि आईए पहली प्रात्मिक्ता पर ध्यान देते हैं
02:01जो पूरे क्षेत्र के लिए और पूरी वैश्विक अर्थ विवस्था के लिए अहम है
02:06हमने युद्ध समाप्ती को लेकर बातचीत पर जोर दिया
02:14हम हॉर्मुज स्टेट को फिर से खोलने को लेकर चर्चा करने को तयार थे
02:18बशर्ते अमेरिका समुद्री डकैतों की तरह काम करना बंद करें
02:28इस कोशिश का मकसद अंतरराश्ट्रिय समुद्री गतिविधियों को फिर से शुरू करने
02:33और वैश्विक अर्थ विवस्था पर असर डालने वाले जरूरी मसलों को हल करना था
02:45मगर दुर्भाग्य से अमेरिका इस मौके की अहमियत को समझ नहीं पाया
02:50बातचीत से किसी समस्या का समाधान तब ही निकल सकता है
02:54जब आप दूसरे पक्ष की बातों को सुनें और उन पर अमल करने को भी तयार हों
02:59बातचीत का मतलब ये नहीं है कि कोई एक पक्ष अपनी मांगो को एक तरफा तौर पर दूसरे पक्ष पर
03:07थोपे
03:07या दूसरे को उन्हें मानने पर मजबूर करें
03:10जहां तक हमारा सवाल है तो ये किसी हालत में नहीं होगा
03:14कम से कम एरान के मामले में तो बिल्कुल नहीं हम अमेरिका की अनुचित मांगों के आगे नहीं जुकेंगे
03:27क्योंकि हमें लगता है कि ये नाइनसाफी होगी
03:30ये सब कुछ उसी अन्याएपूर्ण अभियान का हिस्सा है जो इरान के खिलाफ युद्ध से शुरू हुआ था
03:38ये हमला पूरी तरह से गैर कानुनी था
03:41फिल्हाल अमेरिका की ओर से घोशना की गई है कि वो इरान के परस्ताव से सहमत नहीं है
03:46मगर मुझे लगता है कि पाकिस्तानी मध्यस्तों के जरीए हमें
03:49मौझूदा स्थिती की बेहतर जानकारी मिल सकती है
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