00:00जोडी का ही संगेत है, फासलों के रंग कितने-कित्ने होते हैं
00:03बस बर्फिली कष्मीर का फलक है, दलॉक लेक की सिच्पुएशन है
00:08और उसमें नाई का जो है, शिकारा चला रही हमारी नाई काएं और नायाक कितने परवेह थें
00:14हर कलामे माहिर शिकारा चलाना है वो भी चलाएंगे खैर अब वहां नाई का जो है वो शायद अपने दिल
00:22को और उसको भी समझा रही है कि परदेशियों से ना अखिया मिलाना है ना तो यही है अब आनंद
00:32बक्षे साहब के बोल है आपको मालूम है 1965 के ये फिल्म है जब जब
00:44यक संगेत निर्देशक रहें लक्षमी कान प्यारे लार उनका अस्तित्व भी हम यहां महसूस कर सकते हैं आए सुनते हैं
00:52हुँ हुँ हुँ हुँ
01:06ह। करतकि नेयॎ, ह।
01:14आप आप आप आप आप आप आप
01:34परदी सियू से लखक्या मिलाना
01:40परदी सियू से लखक्या मिलाना
01:46परदी सियू से लखक्या मिलाना
01:58परदी सियू से लखक्या मिलाना
02:21हमने यही बारतिया था
02:33एक परदेसी से प्यार किया था
02:38एक परदेसी से प्यार किया
02:44ऐसे चलाए दिल जैसे परहाना
02:50परदेसी उसे ना अखिया मिलाना
02:56परदेसी उसे ना अखिया मिलाना
03:12ये बाबुल का देस छुड़ाए ये बाबुल का देस छुड़ाए
03:24देस से परदेस बुलाए ये बाबुल का देस से परदेस बुलाए
03:35हाँ सुने नाए कोई पहाना परदेसियों से न अखिया मिला ना
03:47हाँ से परदेस बुलाए कोँ थीद जाना परदेसियों से न अखिया मिलाए
04:05हाँ जाना परदेसियों से न अखिया मिलाए
04:10झाल झाल
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