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'सोमनाथ का वैभव मिटाने वाली शक्तियां आज भी मौजूद', PM मोदी का कांग्रेस पर निशाना

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00:00अधे गुजरात के मुख्यमंत्री श्रिबान बुपेंद्र भाई पतेल उपमुख्यमंत्री भाई हर्ष संग्भी जी
00:20गुजरात सरकार के मंत्रिगण सांसद वंविधायगण अन्यसभी महनुभाव देवी और सज्जनो आज प्रभास पाटन का पवित्रक्षेत्र एक अध्भूत प्रभास से
00:45भरा हुआ है
00:48कि महादेव का यह साक्षातकार कि यह संदर्य कि धर्ति और आसमान से हुई पुष्पवर्षा कि भगवाद दोजों की आभा
01:04कला संगीत और नुरुत्य की अध्भूत प्रस्तुतियां कि वेद मंत्रों का उच्छार
01:18गर्ब गुरू में हो रहा शीव पंचाक्षरी का अखंड पाठ और इस सब के साथ सागर की लहरों का जैगोष्ट
01:34आईसा लग रहा है जैसे यह स्रिष्टी एक साथ बोल रही है जय सोमनार जय जय सोमनार
01:54साथियों समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है जो स्वयम कालातीत है जो स्वयम
02:09काल स्वरूप है आज उन देवादी देव महदेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं
02:29यह स्रुष्टी जिन से स्रजित होती है जिन में लाय हो जाती है यतो जायते पाल्यते ये नविश्वम
02:46तमिशं भजे लियते यत्र विश्वम आज हम उनके धाम के पुनर निर्माण का उत्सव मना रहे हैं
03:03जो हला हल को पीकर निलकंठ हो गए आज उनी की शरण में हां सोमनात अम्रत महुत्सव हो रहा है
03:18यह सब भगवान शदाशिव की ही लिला है
03:27साथियों दादा सोमनात के अनन्य भक्त के रूप में मैं कितनी बार यहां आया हूँ
03:37कितनी ही बार उनके सामने नत्मस्तक हुआ हूँ
03:41लेकिन आज जब मैं हां आ रहा था तो समय की यह यात्रा एक सुखत अनुभूती दे रही थी
03:55अभी कुछी महने पहले मैं यहां आया था तब हम सोमनात स्वाभिमान पर्व मना रहे थे
04:06प्रथम विद्वाउश के एक हजार वर्ष बाद भी सोमनात के अमिनासी होने का गर्व
04:14और आज इस आधुनिक स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष हम केवल दो आयोजनों का हिस्सा भर नहीं
04:38हमें हजार वर्षों की अम्रतियात्रा को अनुभो करने का शिवजी ने मोका दिया है
04:54साथियों 75 साल पहले आज के ही दीन सोमनात मंदिर की पुनर सापना यह कोई साधारन अवसर नहीं था
05:13अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था तो 1951 में सोमनात की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का
05:32उद्गोश किया था
05:36आजादी के समय सरदार साहब ने 500 से जादा रियासतों को जोड़कर एक भारत का आधुनिक स्वरुप गड़ा था
05:52तो साथ ही सोमनात के पुनर निर्मान से उन्होंने दुनिया को बताया था
06:05भारत केवल आजाद नहीं हुआ है भारत अपने प्राचिन गवरों को पुनर हासिल करने के मार्ग पर भी अब आगे
06:21बढ़ चुका
06:22है कि साथियों कि इसलिए कि आज इस अवसर पर कि मैं केवल कि 75 वर्षों की जहांकी नहीं देख
06:36रहा हूं
06:38कि मैं यहां देख रहा हूं कि विनास में कि स्रिजन के संकल्प को
06:50जिसे सोमनात ने चरितार्थ किया है मैं यहां देख रहा हूं कि असत्य पर सत्य की विजय को
07:04जिसे प्रभाश पाटन ने बार बार जीया है मैं यहां देख रहा हूं कि हजारों वर्षों की आध्यात में
07:17चेतना को जिसने मानव मात्र के कल्यार की सीख समूचे विश्व को दिये हैं
07:30कि मैं यहां देख रहा हूं कि भारत के उस अविनासी स्वरूप को
07:38जिसे सदियों के कुछ सीख प्रयास भी न मिटा सके न हरा सके
07:49और मैं यहां देख रहा हूं सोमनात का अम्रुत महोचव यह केवल
08:00अतीज का उत्सव नहीं है यह अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोचव भी है
08:17मैं सभी देश्वास्यों को दादा सोमनात के कोटी-कोटी भक्तों को
08:27इस महोचव की बहुत-बहुत बधाई देता हूं
08:33साथ्यों आज का दिन एक और बज़से भी विशेश है
08:4111 मैं 1998 1998 यानी आज के ही दिन देश ने पोक्रण में परमानू परिक्षण किया था
09:11देश ने ग्यारा मैं को पहले तीन परमानू परिक्षण किये
09:26हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ को भारत की शमता को
09:39वैज्ञानिकों ने दुनिया के सामने रखा दुनिया में तुफान आ गया भारत
09:49उसकी ये हैसियत कौन होता है भारत जो परमानू परिक्षण करें और दुनिया के आखे लाल हो गई
10:05दुनिया भर की शक्तिया भारत को दबोचने के लिए मादान में उतरी अनेक प्रकार के बंधन लग गए
10:18आर्थिक संकट की संभावनाओ के रास्ते सारे के सारे बंध कर दिये गए कोई भी हिल जाता
10:35जब दुनिया भर की बड़ी बड़ी शक्तियां इतना बड़ा आक्रमन कर दें तो आगे के रास्ते दिखते नहीं है
10:49लेकिन हम कोई और मिट्टी के बने हुए है
10:5811 माई के बाद दुनिया हम पर तूट पड़ी थी
11:0311 माई को विज्यानिकों ने अपना काम कर लिया था
11:07लेकिन 13 माई को फिर दो और परमानों परिष्ण हुए
11:19उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीती की छाशक्ती कितनी अतल है
11:32उस समय पूरी दुनिया का दबाओ भारत पर था लेकिन अतल जी के नेत्रुत में
11:44बीजेपी सरकार ने दिखाया था कि हमारे लिए राश्ट्र प्रथम है
11:56दुनिया की कोई ताकत भारत को जुका नहीं सकती
12:05दबाओ में नहीं ला सकती
12:12साथियों देश्ट ने प्रोखरन परमानु परिष्ण को आपरेशन शक्ती नाम दिया था
12:21क्योंकि शीव के साथ शक्ती के आरादना ये हमारी परंपरा रही है
12:32अर्द नारिश्वर शीव स्वयम भी शक्ती के साथ ही पुर्ण होते हैं
12:42आपको याद होगा जब देश का मिशन चंद्रयान सफल हुआ था
12:50तब चंद्रमा पर जहां भारत का रोवर लेंड हुआ
12:56वो जगह का नाम भी हमने शीव शक्ती पॉइंट रखा है
13:06क्योंकि हमारी आस्था में चंद्रमा शीव से जुड़ा है
13:13और शीव सक्ती से जुड़े हैं
13:17और ये कितना सुखद है कि चंद्रमा के नाम से ही इस जोतिलिंग को हम सोमनात कहते हैं
13:32साथियों शीव और शक्ती की हमारी आरादना का जो विचार है
13:38वो देश की बैग्यानिक प्रगति के लिए भी प्रेरना बने
13:46आज हम ये संकल्प साकार होते देख रहे हैं
13:52मैं इस अवसर पर भग्वान सोमनात के चर्णों से
14:00सभी देश वाच्यों को
14:04आप्रेशन शक्ती की वर्जगाण की भी बदहाई देता हूँ
14:12साथियों जब मैं पिछली बार यहां आया था
14:17तब मैंने कहा था
14:19जिसके नाम में ही सोम अर्थात अम्रत जुड़ा हो उसे नस्त कौन कर सकता है
14:32इतिहास के लंबे कालखन में इस मंदिर ने कितने ही आक्रमन जेले
14:40महमुद गजनवी अलावदिन खिल जी जयते अनेक आक्रांत आए
14:51लुटेरों ने सोमनात मंदिर का भई भव मिटाने का प्यास किया
14:58वो सोमनात को एक भवतिक धांचा मानकर उससे टकराते रहे
15:10बार बार इस मंदिर को इस धांचे को तोड़ा गया
15:18और ये बार-मार बनता रहा हर बार उठखड़ा होता रहा
15:25क्योंकि तोड़ने वालों को मालूम नहीं था
15:32हमारे राष्का वैचारिक सामर्थ क्या है
15:38हम भवतिक शरीर को नश्वर मानने वाले लोग है
15:44लेकिन हम जानते हैं उसका धीतर बैठी आत्मा अविनाश्री है
15:52और फिर तो शीव तो सर्वात्मा है इसलिए अलग अलग कान में अलग अलग जीवों की संकल प्रशक्ति में शीव
16:11प्रगट होते रहें
16:12राजा भोच कभी राजा भीमदेव प्रथम कभी राजा कुमारपाल कभी राजा महिपाल प्रथम
16:27तो कभी राव खंगार ऐसे अनेक शीव भक्त समय समय पर सोमनाद मंदिर का पुनर निर्मान करत्वाते रहें
16:45लकुलीश और सोम शर्मा जैसे कितने मनीशी उन्होंने प्रभाश पाटन छेत्र की विरासत को समुरक्षित किया
17:00इसे शैव साधना और दर्शन का महान केंद्र बनाया
17:08भाव प्रहस्पती, पाशुपताचारियों और अनेक विद्वानों ने इस तिर्थ की आध्धात्मिक परंपराओं को जीवित रखा
17:26विशाल देव और त्रिपरान तक जैसे व्यक्तित्वों ने यहां की बौधिच चेतना को सुरक्षित रखने का पुनित कार्य किया
17:41साथियों, वीर हमीर जी गोहिल, वीर भेगड़ा जी भील, पुन्य श्लोक अहिल्या बाई होलकर जी, बडुद्रा के गायकवाड, जाम साम
18:01महराराजा दिग्विजे सीं जी
18:04ऐसी कितनी ही महान विभूतिया है, जो सोमनात की सेवा में अपना सर्वस्वा अर्पित करती थी
18:16मैं आज इस अवसर पर, सरदार वल्लबहाई पटेल, डॉक्टर राजेंदर परशाद, स्रिमान के अम मुन्सी जी
18:33ऐसी सभी ज्यात, अज्यात, दिव्यात्माओं को भी स्रद्धा पुर्वग, आदर पुर्वग नमन करता हूं
18:44उनका स्मराण, हमें ये प्रेरना देता है, कि हमें न केवल अपनी सांसकुर्थिक विरासत को आगे बढ़ाना है, बलकि इस
18:59जिम्मेदारी को आने वाली पीडियों के हातों में सौंप कर भी जाना है।
19:06हमारे सांसकुर्थिक सल हजारों वर्षों से भारत की पहचान रहे हैं, इतनी समरुद्ध विरासत हमें मिली है, लेकिन आप बिनम
19:20न देखिए, हमने दसकों तक उसके महत्व को नहीं समझा।
19:27दुनिया में से कितने ही उधारण हैं, जहां विदेश्ची हमलावरों ने राष्ट्रिय पहचान से जुड़े स्थलों को नस्ट किया।
19:40लेकिन जब उस देश के लोगों को मौका मिला, सबने साथा कर अपनी पहचान को फिर से सहजा, फिर से
19:52समारा पुनह प्रतिष्ठा की।
19:56लेकिन हमारे यहां राष्ट्रिय स्वाविमान से जुड़े विश्वों पर भी राज नीती होती रही।
20:08सोमनाथ खुद इसका सबसे बड़ा उधारण है।
20:14आजादी के बाद पहले दाईत्व में से एक था कि सोमनाथ मंदिर का पनरुधार करते हैं।
20:27इसलिए सरदार वल्लभाई पटेल और डॉक्टर राजेंद्र पसाजी उन्होंने इसके लिए इतने प्रहास किये।
20:40लेकिन हम सब जानते हैं उन्हें इसके लिए नेहरुजी द्वारा कितना विरोध जेलना पड़ा था।
20:52मैं आज इसके विस्तार में नहीं जाऊंगा।
20:57लेकिन ये सरदार साहब के इच्छा शक्ति थी कि इतने विरोध के बावजुद सरदार साहब दीगे नहीं।
21:08सोमनात मंदिर का अपनर निर्मान भी हुआ और देश ने सदियों के कलंग को भी धो दिया।
21:21साथ क्यों दुर्भाग्य से देश में ऐसी शक्तियां आज भी प्रभावी हैं।
21:27जिने राष्ट्रिय स्वाबिमान से ज़्यादा तुष्ट्री करन जरूरी लगता है।
21:37राम मंदिर निर्मान जैसे आउसरों पर भी हमने देखा है।
21:42किस तरह राम मंदिर निर्मान का भी विरोध किया गया।
21:48हमें ऐसी मानसिक्ता से सावधान रहना है।
21:53इस तरह की संकुचित राजनीति को हमें पीछे छोड़ना होगा।
22:00हमें विकास और विरासत को साथ ले करके आगे बढ़ना होगा।
22:08साथ कियों बीते वर्षों में मुझे सोमना ट्रस के देख्ष्ट रूप में सोमना दाजा की सेवा का जो आउसर मिला।
22:20इस मंदिर और छेत्र के विकास के लिए जो इत्यासिक काम हुए।
22:26उस परिवर्तन को आज हम सब प्रतक्ष देख रहे हैं।
22:33लेकिन साथ ही इस सेवा का मुझे व्यक्तिकर लाब भी हुआ है।
22:40आज मुझे देश के सभी पवित्र तिर्फों के विकास का जो मौका मिल रहा है।
22:47ये भगवान सोमनात का ही कुर्पा प्रसाद है।
22:52साथियों आज काशी में सद्यों बाद बाबा विश्वनात धाम का इतना भव्य विस्तार हुआ है।
23:03आज उज्जेन में महा काल महा लोग के विशाल दर्शन भी हो रहे है।
23:10केदारनात धाम का पुनर निर्मान भी हुआ है।
23:14जैसा मैंने पहले कहा।
23:17अयोध्या में 500 साल की प्रतिक्षा भी पुरी हुई है।
23:23आज बहां भव्य मंदिर में राम लला विराजबान है।
23:29साथियों ऐसे कितने ही पवित्र तीर थे।
23:35पवित्र मठ मंदिर और खेत्र उनकी जो महिमा हमने पुराणों में सुनी है।
23:46आज बहां हमें उस सम्रुद्ध परंप्रा के दर्शन होने लगे हैं।
23:53और ये इतना कुछ दस बारा साल के भीतर भीतर हुआ है।
24:01साथियों हमारे सांस्कृतिक केंद्रों की उपेक्षा देश के विकांत में बड़ी बाधा रही है।
24:11क्योंकि हमारे तीत भारत की आध्यात्मिक सामाजिक व्यवस्ता के केंद्र तो है ही वो देश की आर्थिक प्रगति के भी
24:24स्थ्रोत रहे हैं।
24:25आज आप देखिए चार धाम महामार्ग परियोजना।
24:31गोविंद गार से हमकुन साहिब तक रोप्पे परियोजना।
24:38करतारपुर कोरिडोर। बहुत सरकीट का विकांस।
24:44इनके जरिये देश में तिर्थ खेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बड़ी है।
24:53सोमनात परिश्तर भी इसका एक ससक्त उदहारन है।
24:59आज सोमनात मंदिर ट्रस से सेंकडों परिवाज जुड़े है।
25:08हजारों लोगों का जीवन इस छेत्र से जुड़ा हुआ है।
25:15देश दुनिया के कौने कौने से जो लोग यहां आते हैं वो गुजरात के बाके हिस्सों में भी जाते हैं।
25:23इसे प्रदेश और देश पर प्रगति के नए द्वार खुलते हैं।
25:28साथियों हमारी आस्ता हमें जीवन जीने का तरीका भी सिखाती है।
25:37क्योंकि हम मानते हैं सर्वं खलिद्वं ब्रह्मा।
25:43अर्थात सुष्टी का हर एक घटक इस संपूर्ण प्रक्वति भी इश्वर का ही स्वरूप है।
25:54इसलिए हमारी आस्ता नदियों में भी है, ब्रक्षों में भी है।
26:00हम जंगलों को भी सद्धा की दर्ष्टी से देखते हैं।
26:05हम पर्वतों में भी पवित्रता का भाव रखते हैं।
26:09और आज जब दुनिया प्राकृतिक जीवन शैली की और लोट रही है।
26:16हमें हमारी शक्ति को भी पहचानना होगा।
26:21हम आमारे तिर्थों और मंदिरों के विकास के साथ-साथ
26:27उनकी गरीमा के लिए जागरुख होना होगा।
26:31हमें ऐसा जीवन अप्राएं जिसे प्राकृतिक और परियावरन की रक्षा हो।
26:39साथ ही हम हमारे पुन्य सलोकों पुरी दुनिया के लिए एक उधारण के रुपे विक्सित करें।
26:48हमें इन संकल्बों को अपनी आस्था से जोड़कर जीना होगा।
26:55साथ्यों जब नई पीडिया अपने इतिहात अपनी आस्था और अपने सांसकृतिक मुल्यों से जूड़ती है।
27:06तब राष्ट का आत्मबल और मजबूत होता है।
27:12आज भारत जिस आत्म विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
27:21उसमें हमारी सांसकृतिक निरंतरता की बहुत बड़ी भूमी का है।
27:27आधुनिक और विरासत आधुनिक न हो या विरासत हो।
27:37भारत में इसे कोई अलग नहीं कर सकता।
27:40भारत में एक दुश्रे के विरोधी नहीं है।
27:45इसाथ साथ आगे बढ़ने वाली शक्तियां है।
27:50एक दुश्रे में प्राण पुरने वाली शक्तियां है।
27:55सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि कोई भी रास्त तभी लंबे समय तक मजबूत रह सकता है।
28:05जब वो अपनी जड़ों से जुड़ा रहे जब वो अपनी विरासत को आने वाली पीडियों तक उसी स्रध्धाव और विश्वास
28:17के साथ उनके हाथों में सुप्रत करें
28:2175 वर्ष पहले जब पुनर निम्रेट ये पुनर निर्मेट सोमनाद मंदीर में 75 वर्ष पहले प्राण प्रतिष्टा हुई थी तब
28:34भारत ने एक नई चेतना यात्रा शुरू की थी
28:39आज 75 वर्ष बार वही आत्रा और अधिक व्यापग रूप में हमारे सामने है हमें इसे नई उचाई पर लेकर
28:54जाना है
28:55हमारे संकल्पों को पुरा करने में दादा सोमनाद का अश्रिवार हमेशा हमारे साथ रहे यही प्रार्थना है
29:10एक बार फिर सभी देश वाचियों को विरासत में विश्वास करने वाले हर नागरिक को आप सभी को इस अवसर
29:27की बहुत बहुत बढ़ाई देता हूं
29:29मेरे साथ बोलिए जए सुमनाद जए सुमनाद हर हर महाले
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