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संकटाच्या काळात देशासाठी 'कर्तव्य' सर्वात महत्त्वाचे! पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी काही महत्त्वाचे संकल्प घेण्याचे आवाहन केले आहे.

भारताला सध्या अनेक मोठ्या आव्हानांचा सामना करावा लागत आहे. कोरोनानंतर जागतिक पुरवठा साखळीत निर्माण झालेला खंड आणि त्यानंतर युक्रेनमधील युद्धामुळे अन्न, इंधन आणि खतांच्या किमतीत प्रचंड वाढ झाली आहे. देशातील शेतकऱ्यांना खते कमी दरात मिळत असली तरी, आंतरराष्ट्रीय बाजारात तेलाच्या वाढलेल्या किमती आणि इतर गरजा पूर्ण करण्यासाठी मोठ्या प्रमाणात परकीय चलन खर्च होत आहे.

या परिस्थितीत, देशावर येणारा आर्थिक बोजा कमी करण्यासाठी आणि परकीय चलन वाचवण्यासाठी आपण सर्वांनी एकत्र येऊन काही महत्त्वाचे निर्णय घेणे आवश्यक आहे. पंतप्रधानांनी इंधन जपून वापरणे, रेल्वे आणि इलेक्ट्रिक वाहनांचा जास्तीत जास्त वापर करणे, शक्य असल्यास वर्क फ्रॉम होम आणि व्हर्च्युअल मीटिंग्सना पुन्हा प्राधान्य देणे यांसारखे उपाय सुचवले आहेत.

याशिवाय, परकीय चलन वाचवण्यासाठी अनावश्यक विदेश दौरे टाळणे, सोन्याच्या दागिन्यांची खरेदी मर्यादित ठेवणे आणि देशांतर्गत उत्पादनांना प्रोत्साहन देणे यावरही भर दिला आहे. मोठ्या आव्हानांना सामोरे जाताना, देशहिताला सर्वोच्च प्राधान्य देणे हीच खरी देशभक्ती आहे, असे आवाहन पंतप्रधानांनी केले आहे.

#देशभक्ती #संकल्प #राष्ट्रीयहित

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00:00वैस भी संकड के इस समय में हमें कर्तवियों को सर्वों पर ही रखते हुए कुछ संकल पर लेने होंगे
00:10लेकिन इस समय बारत कई विराट चुनावतियों का मुकाबला भी कर रहा है
00:18साथ यो कोरोना काल के दोरान ही दुनिया सप्लाइच चेन के बहुत बड़े संकड से गिर गई थी
00:27कोविड के बाद यूकरेन में युद्ध शुरू हो गया उसने दुनिया की परिशानिया और बढ़ा दी
00:35फूड फ्यूल फर्टिलाइजर इन तीनों चीजों पर गंभीर प्रभाव पड़ा बिते पांच-छे वर्षों में
00:51इस संकड से निपड़ने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है
00:59आपको याद होगा उस समय और आज भी फर्टिलाइजर की एक-एक बोरी दुनिया में
01:11तीन-तीन हजार रुपिये में भीक रही थी एक बोरी का तीन हजार रुपिया कितना
01:21अब बताएंगे एक बोरी का कितना आंकड़ा नहीं बोलिये मूँ से
01:29तीन हजार रुपिया एक बोरी का कितना एक बोरी का कितना एक बोरी का कितना
01:40और भारत के किसानों को वही खाद की बोरी तीन-सो से भी कम रुपिये में दी जा रही है
01:54तीन हजार के सामने तीन-सो रुपिये में सप्लाई चेन की इन मुश्किलों के बीच
02:04पिछले दो महिने से हमारे पडोस में ही इतना बड़ा युद्ध चल रहा है
02:14इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है और भारत पर तो और भी गंबीर असर हुआ है
02:25साथियों भारत के पास बड़े-बड़े तेल के कुए नहीं है
02:33हमें अपनी जरुवत का पैट्रोल, डीजल, गैस
02:36ये सब बहुत बड़ी मात्रा में दुनिया के दूसरे देशों से बाहर से मंगाना पड़ता है
02:47युद्ध की वज़े से पूरी दुनिया में पैट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाजर के दाम
02:58बहुत अधिक बढ़ चुके हैं आस्मान को भी पार कर गए है
03:04अडोस-पडोस में देशों में क्या हाल है वो तो अख़बारों में आता है
03:10बारत सरकार इस युद्ध के पिछले दो महिनों से देश वाच्चियों को इस संकट से बचाने के लिए
03:22लगातार प्रयास कर रही है
03:28नागरिकों पर बोज न पड़े इसके लिए सरकार सारा बोज सरकार खुद अपने कंदे पर उठा रही है
03:39लेकिन साथियों जब सप्लाई चेन पर संकट लगातार बना रहे
03:47तो हम कितने भी उपाई कर ले मुश्किले बढ़ती ही जाती है
03:57इसलिए अप देश को सरो पर ही रखते हुए
04:02मा भारती को सरो पर ही रखते हुए
04:06हमें एक जूट होकर के लड़ना होगा
04:11हमें याद रखना है
04:15देश के लिए मरना ही
04:18सिर्फ देश भक्ती नहीं होती है
04:21देश के लिए जीना और देश के प्रती
04:27अपने कर्तवियों को निबाना
04:31वो भी देश भक्ती होती है
04:38इसलिए बैस भी संकट के इस समय में
04:42हमें कर्तवियों को सरो पर ही रखते हुए
04:46कुछ संकल पर लेने होंगे
04:50और उन संकल्पों को
04:53पूरे समर्पन भाव से पूरा करना होगा
04:59जैसे एक बड़ा संकल्प है
05:03पैट्रोल डीजल का संयम से इस्तिमाल करना
05:37साथियों हमें
05:39करें और भी लोगों को साथ बिठा ले अगर हमें कहीं सामान
05:47भेजना हो तो कोशिश करनी है कि वह जादा से जादा
05:55रेलवे गूर्ट के जो ट्रेइन होती है रेलवे की सर्विसिस से भेजे
06:02था कि इलेक्रिक रेलवे होने के कारण पैट्रोल डीजल की जरूद नहीं पड़ती है
06:11जिन लोगों के पास इलेक्रिक वेहिकल है
06:16वो भी कोशिश करें कि इलेक्रिक वेहिकल का जादा से जादा उप्योग करे
06:27साथियों हमने कोरोना के समाए में
06:32वर्क फ्रम होम की ऑनलाइन मिटिंस की
06:38वीडियो कन्फरंस की
06:42ऐसी अनेक व्यवस्ताएं विक्सित की
06:45और हमें आदत भी हो गई थी
06:48आज समाई की मांग ऐसी है
06:52कि उन व्यवस्ताओं को हम फिर से शुरू करे
06:57तो वो देश हित में होगा
07:02वर्क फ्रम होम
07:05ऑनलाइन कन्फरंसिस
07:08वर्चिवल मिटिंस
07:10इनको हमें फिर से प्रात्विक्ता देनी है
07:14साथियों आज जो संकट है
07:18उसमें हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर भी
07:24बहुत जोर देना होगा
07:27क्योंकि दुनिया में
07:31पैट्रोल डीजल इतना जादा महिंगा हो गया है
07:36पहले से कई गुना जादा किमते बढ़ गई है
07:40तो हम सब का दाईत्व है
07:43कि पैट्रोल डीजल की खरीज़ पर
07:47जो विदेशी मुद्रा खर्च होती है
07:51पैट्रोल डीजल बचाकर
07:54हमें वो मुद्रा भी बचानी है
07:57इसके लिए हमारे छोटे-छोटे प्रयास भी
08:01देश की बहुत मदद कर सकते है
08:05जैसे आजकल
08:07जो विदेशों में शादियों का
08:10विदेशों में गुमने का
08:13विदेशों में वेकेशन पर जाने का
08:17मिडल क्लास में कल्चर बढ़ता जा रहा है
08:21हमें तैक करना होगा
08:24कि जब ये संकट का कान है
08:27और हमारी देश भक्ती हमें ललकार रही है
08:31तो कम से कम एक साल के लिए
08:34हमें विदेशों में जाने की बातों को टालना चाहिए
08:41भारत में बहुत सारी जगा है
08:43वहां आप जा सकते हैं
08:46बहुत कुछ भारत में किया जा सकता है
08:51इस बेटी को बीचे बिठाइए उसको ठक जाएगी
08:54उस बेटी को बिठाइए
08:57थैंक यू बेटा थैंक यू बैटिया आप नीचे बैटिये
09:02मैंने देख लिया बेटा उसको देख लिया
09:05अब आप बैठ जाईए ये छोटी बच्ची को क्यों परिशान करते हुआई इन बच्चों को बैठने दीजिए प्लीज बच्चों को
09:17परिशान मत कीजेजी
09:21साथियों हमें विदेशी मुद्रा बचाने के जो भी रास्ते हम अपना सकते हैं हमें बचाना होगा
09:30साथियों गोल्ड यानि सोने की खरीद एक और पहलू है जिसमें विदेशी मुद्रा बहुत अधिक खर्च होती है
09:47एक जमाना था जब संकट आता था कोई युद्ध होता था
09:56तो लोग देश हित में सोना दान दे देते थे आज दान की जरुरत नहीं है
10:08लेकिन देश हित में हमको ये तै करना पड़ेगा
10:14कि साल भर तक घर में कोई भी फंक्शन हो कोई भी कारकम हो
10:23हम सोने के गहने नहीं खरी देंगे सोना नहीं खरी देंगे
10:30विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देश भक्ती हमें चुनोती दे रही है
10:39और हमें इस चुनोती को स्विकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना होगा
10:48सौथियों ये समय एक और बड़े सबक का भी भी है
10:54एक समय था जब हम कौपर एक्षपर्ड करते थे
11:01लेकिन आज बारत के सामने स्थिती ऐसी बन गई
11:08कि अब हमें कौपर को भी इंपोर्ट करना पड़ता है
11:15हमारे देश में हरता ले करवा कर कौपर प्लांट को ठप करवा दिया गया
11:25और अब हालात ये हो गई कि हमें कौपर बार से मंगाना पड़ता है
11:31और उसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है
11:35इसलिए मैं ऐसे सभी स्रमोक मद्दूर संगर्णों से भी कहूंगा
11:43कि हमें ऐसी बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए
11:49भारत को आत्म दिर्वर बनने से जो भी कदम रोकते हैं
11:56उनमें हमें दुरी बनानी होगी
12:00और जो लोग ऐसी साजी सों में जुटे हैं
12:06उन पर भी कड़ी नजर रखनी होगी
12:09मैं देश की अदालतों से भी आगर करूंगा
12:13कि ऐसी स्थिती आने पर देश हित में हमें
12:20कोई न कोई रास्ता निकान ले की तरफ बढ़ना चाहिए
12:25साथियों ऐसे ही खाने के तेल का भी है
12:31इसके आयात के लिए भी बहुत बड़ी मास्त्रा में हमें
12:37विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है
12:40हर परिवार अगर खाने के तेल में
12:47खाने का तेल का जो उप्योग करता है
12:50अगर वो कुछ कमी करे
12:53मैंने बार बार कहा है दस परसंद कम करो
12:58अगर हम तेल खाना कम करे न
13:01तो भी वो देश भक्ति का बहुत बड़ा काम है
13:05आप देश सेवा में योगदान दे सकते हैं
13:09और इससे देश सेवा भी होगी
13:13और देश सेवा भी होगी
13:16इससे देश के ख़जाने का स्वास्थ भी सुदरेगा
13:22और परिवार के हर सदस्थ का स्वास्थ भी अच्छा रहेगा
13:29साथियों विदेशी मुद्रा की खपत वाला
13:33एक और सेक्टर हमारी खेती है
13:38हम बहुत बड़ी मात्रा में बहार से
13:44केमिकल फर्टिलाजर इंपोर्ट करते हैं
13:48केमिकल फर्टिलाजर खेती के कारण
13:53हमारी दर्ती मा को बहुत पिड़ा हो रही है
13:56हमारे खेत बरबाद हो रहे है
14:00अगर आज हम अपने खेत को नहीं बचाएंगे
14:06तो बविश में फसलों पर भी खत्रा आ जाएगा
14:12इसलिए बहुत जरूरी है कि हम केमिकल फर्टिलाइजर की खपाथ
14:2025 परसंट, 30 परसंट, 40 परसंट, 50 परसंट
14:26उसको गटाए आधी कर दे
14:30और हम उसके साथ साथ नेचरल फार्मिंग की तरफ बड़े
14:38हम पर्टिलाइजर का उप्योग कम करके विदेशी मुद्रा भी बचा सकते हैं
14:46और साथ साथ अपने खेत को बचा सकते हैं
14:52हमारी ये दर्ती मा को बचा सकते हैं
14:56और यह हमें करना ही होगा
15:00आज बैस्विक संकटों से जो चुनोति आई है
15:05हमें उन चुनोतियों को परास करना होगा

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