00:04धर्मिनगरी किशनगर की पावंधरा परिस्थित है एक ऐसा प्राचीन मंदिर जहां भक्तों की अटूट आस्था बस्ती है
00:11किशनगर रियासत से भी पुराना इतिहास समेटे इस सुग्रीव मंदिर की महिमा निराली है
00:18हाला कि मंदिर का कोई लिखित इतिहास नहीं है लेकिन दंत कथाओं के अनुसार सुग्रीव का मंदिर करीब 500 साल
00:26पुराना है और किशनगर की स्थापना से भी पहले का है
00:31यहां राम सखा सुग्रीव की नित्य पूजा अर्चना होती है
00:35मंदिर के सार सम्हाल कर रहे संथ 105 वर्ष के हो चुके हैं बावजूद इसके उनका नित्य सुग्रीव मंदिर में
00:43सेवा करने का क्रम जारी है
00:46यहां राम जी आये था ने पूश्कर तो उनके सखा थे सुग्रीव जी तो सब के सब आये थे तो
00:54यहां पराव था
00:59तो इसलिए उस समय के दर्बार जे थे सुग्रीव जी राजा थे तो उनके नाम से जार अस्तपना कर दिया
01:07तो सुग्रीव जी ने पढ़ाव डाला थे राम जी पढ़ाव डाले थे यहां पिंड़ दान करने आये थे पूश्कर में
01:15hum
01:17I am going to do my own
01:22of how much to put up a kitchen
01:25house
01:25there are
01:30a
01:30one
01:31the
01:32one
01:32one
01:32one
01:32one
01:35that
01:36in
01:36foreign
02:06foreign
02:33Kachariya Peet
03:03Dr. Krishnan Devachari
03:05Dhanush or Bhan hai
03:06Aisai Pratimai kam hi dhekhné ko miltie hai
03:36वैसी एक प्रतिमा यहां पर जो है नहर के किनारे भी आपको जो है मिलने मिल जाएगी
03:42उनका कहना है कि मंदिर का निर्मार कब हुआ इसका कोई शिलालेख नहीं है
03:46और ना ही कोई अधिकृत प्रमार है
03:49यह मंदिर का स्थान कब का है यह सुनिश्चित नहीं है
03:53किशनगर में रहने वाले लोगों को मंदिर के बारे में जानकारी है
03:57लेकिन बाहर से आने वाले लोगों और नई पेड़ी को इसके बारे में पता नहीं है
04:03जिस कारण मंदिर में गिने चुने ही लोग आते है
04:07अजमेर से ETV भारत के लिए प्रियांक शर्मा की रिपोर्ट
Comments