Skip to playerSkip to main content
  • 16 minutes ago
सोमनाथ मंदिर की 75वीं वर्षगांठ, PM मोदी होंगे शामिल

Category

🗞
News
Transcript
00:04्थेत्स
00:33भारत की आध्यात्मिक अस्मिता के प्रतीक प्रत्थम जोतिरलिंग भगवान सोमनात के मंदिर में 11 मई 2026 का दिल इतिहास के
00:42सुनेहरे पन्नों में दर्ज होने जा रहा है
00:46मई 1951 में मंदिर के प्रत्थम लोकारपण से मई 2026 के भव्य दर्शनों तक सोमनात की समृद्ध शाली विरासत दे
00:5675 वर्षों की गौरब शाली यात्रा तै कर लिए
00:5975 वर्ष की ये यात्रा है विध्वन्स के विचार से स्रिजन की शक्ति की विजय किया
01:23सदियों आक्रांताओं की कुरूरता से पीड़ित सभ्यता के स्वाभिमान स्थापना की
01:33भारत के जन जन की आत्मा में बसी आस्था के पुनर स्थापना की
01:42सोमनात मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के 75 वर्ष पूर्ण भोने पर
01:47आयोजित सोमनात अमरित पर्व की कमान खुद प्रधान मंत्री मोदी संभाल रहे
01:51ओन नमह पार्वधी पते हर हर महादे ले अरह जो तिरलिंगों में जो प्रथम जो तिरलिंग है
02:19प्रित्वी का जो पहला मंदिर है वहां लेकर हम आपको आए है
02:22नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और सोमनात मंदिर में हम इस समय मौजूद है
02:27यहां की जो कहानिया है यहां का जो इतिहास है वो हर माइने में अदभुत है
02:33यहां की जो मान्यताएं हैं वो अविश्वसनिय है और यहां का जो महातम्य है वो अकल्पनिय है
02:41आज हम आपको इसी सिद्ध स्थल की वो सभी कहानिया सुनाएंगे
02:52मंदिर पुनर निर्मान के 75 वर्ष उत्सव ही नहीं स्मरण की भी वो यात्रा है
02:57जो पिछले 1000 वर्षों के चल को कभी न भूलने की प्रेरणा भी देते हैं
03:06सोमनाथ के पुनर निर्मान की 75 वर्ष गांट अवसर है उन बलिदानों को श्रधानजली अरपित करने का
03:12जिन्होंने जान से उपर सोमनाथ के मान को रखा
03:17जिन्होंने सोमनाथ के प्रताप को प्राण देकर भी धूमिल नहीं होने दिया
03:23मंदिर पुनर निर्मान की 75 वी जयंती पर समुद्र की लहरे जोश में हैं
03:31सोमनाथ मंदिर गर्वुन्नत है
03:36प्रधान मंत्री मोदी उत्साहित हैं और समय तो प्रतीक्षा कर ही रहा है पावन पलों का साक्षी बनने के लिए
03:49जब जब भारत अपनी जड़ों को पहचानना चाहता है तब तब सोमनाथ सामने खड़ा होता है
03:57तलवारों के जोर और आक्रांताओं के कुरूर मनसूबे सद्यों तक कोशिशें करने के बाद भी सोमनाथ के अस्थिक्र को खत्म
04:05नहीं कर पाए
04:12लेकिन अपनी ही राक से फिर उठ खड़ा हुआ
04:21देश आजाद हुआ तो सर्दार वल्लब भाई पटेल ने राष्ट्र के स्वाभिमान में संचार करने के लिए सोमनाथ के पुनर
04:29निर्मान का संकल्प लिया
04:33इक्यावन में मंदिर तो बना लेकिन सर्दार नहीं रहे देश के प्रथम राष्ट्र पती डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का
04:40प्रथम लोकारपण किया
04:45प्रधानमंत्री मोदी लोकारपण की 75 वी वर्ष गांठ पर खुद को सोमनाथ के श्री चरणों में होने को अपना सौभाग्य
04:53मान रहे है और देश एक तारीख बनते देख रहा है जो सदियों तक दोहराई जाती रहे
05:01दोमनाथ का इतिहास पिनास और पराजय का इतिहास नहीं है यह इतिहास विजय और पुनर निर्मान का है
05:13हमारे पुर्वजों के पराक्रम का है हमारे पुर्वजों के चाग और बलिदान का है
05:22मैई 2026 अगर मंदिर की पुनर स्थापना की 75 वी वर्ष गांट का वर्ष है
05:29तो साल 2026 में सोमनाथ मंदिर पर किये गए पहले प्रहार के 1000 वर्ष भी पूरे होते हैं
05:36जन्वरी 2026 में सोमनाथ की धर्ती से पूरे देश ने सोमनाथ स्वाविमान पर्व मनाया था
05:45निशंक रूप से 75 साथ पूरा करना एक लैंडमार्क अवश्य है इतनी बार तूटने के बाद इनका नवसर्जन हुआ
05:55मगर 13 नवेंबर 1947 के दिन सरदार साहब ने जो संकल्प किया था वो संकल्प के हिसाब से
06:05आज सोमनाथ मंदीर पूरे कारविंग के साथ गर्भग्र सुवण मंदीत होने के बाद और शिखर भी जो उस पर कलश
06:14हैं वो भी पहले सुवण मंदीत था और आज 1500 से ज्यादा कलश हैं
06:21सोमनाथ स्वाभिमान पर्व धर्मांद कट्टर कूर्टा के जवाब में सोमनाथ के युग-युगीन गौरव का प्रतीक था प्रधान मंत्री मोदी
06:31उस स्वर्णिंग पल के भी साक्षी बने तो भावुक हो थे
06:35आते रहे मजभी आतं के नएने आकर्मा होते रहे लेकिन हर युग में सोमनाथ पुना पुना स्थापिर होता रहा
06:52इतनी सद्यों तक का संगर्ष इतना लंबा प्रतिकार इतना महान धैरिय श्रजन और प्रणन निर्मान का ऐसा जिवत
07:08यह सामर्ध अपनी संस्कृति में ऐसा विश्वार्ष और ऐसी आस्था दुनिया के इतिहास में ऐसा उदहर मिलना मुश्किल है
07:32सोमनाथ भारत की आत्मा राष्ट्र की चेतना और श्रद्धा का वो अटूट विश्वास है जो सदियों से उद्गोश कर रहा
07:39है इस सत्यका कि आस्था अडिग हो तो सांस्कृतिक विरासत कोई मिटा नहीं सकता
07:45मिटाने की कोशिशें करने वाले आतताई मिट गए उनके सामराज ये मिटी में मिल गए उनके कुलवंशों के दीप सदा
07:51के लिए बुझ गए
07:52लेकिन सौराष्ट्र में समुद्र की लहरों को प्रती दिन उपकृत करता सोमनाथ अब भी गरवो नत्सा खड़ा
08:03ये मूर्तिया सनरक्षित है उस दौर की गवाही दे रही है जब श्री सोमनाथ मंदिर को बार बार आक्रमन कारियों
08:12ने ध्वस्त किया था तोड़ा था
08:14ये प्रतिमाई खंडित जरूर है लेकिन ये हमारे संगठित हमारे संयुक्त इतिहास का प्रतिबिम्ब है हमारी आस्था हमारा इतिहास हमारी
08:27राश्रियता ये सब का प्रतीक है और ये प्रतीक है इस बात का कि जितनी बार भी दमन किया जाएगा
08:35आक्रमन कारियों द्वारा
08:37हमला किया जाएगा, विद्वन्स किया जाएगा, उतनी बार उठ खड़ा होगा पूरा हिंदुस्ता.
08:53गुजराच सरकार की वेबसाइट की अनुसार फार्सी इतिहासकार अल बरूनी ने सोमनात मंदिर का विस्तरित वर्णन किया,
09:00जिसके कारण ये सेक्ड़ों साल पहले से चर्चा में रहा और आकरानताओं ने इसे बार बार तोड़ा.
09:12725 इस्वी में पहली बार सिंध के तुबेदार अलजुनेज के आदेश पर मंदर तोड़े जाने का इतिहास मिलता है.
09:21लेकिन प्रतिहार राजा नाग भट्टे ने मंदर को फिर से भव्यता देए.
09:341025 में सोमनात मंदिर पर सबसे धूर हमला मेहमूर गस्दवी देखिए.
09:38हजारू लोगों को कत्ली किया, मंदर को तहस नहस किया और खजाना लूट कर ले गया.
09:45लेकिन चालुक के राजा भीम प्रथम ने फिर मंदर का निर्मार करवाया.
09:49फिर सुलंकी राजा कुमार पाल ने मंदर को और भव्यता प्रदान की और साथ ही मंदर को रत्नों से सजाया.
09:57सामनात की ये जाहो जलाली को देख कर महमद गजनवीन में.
10:03जन्यूरी एक हजार चबीस में आक्रमन किया जब महमत गजनवी ने सौमनात पर आक्रमन किया उसकी बाते उसका हिस्टोरियन था
10:13उसका नाम अलबेरुनी था उसने सौमनात का जिक्र उनके अहवाल में किया है
10:19यहां से जो कोई भी यवन विधर्मी लूट की गया वो पहुच नहीं पाया अपने डेस्टिनेशन पर आज भी कछ
10:25में आप जाओगे तो वहां के मुजिम में आपको सौमनात के आउसेस मिलेंगे
10:28सौमनात का दरवाजा भी सायद वहां पे है ऐसा मैंने पुस्तकों में पड़ा है पुराणों में भी पड़ा है और
10:36विधर्मी का लक्षय सिर्फ संपती था जबकि सनातनियों का लक्षय धर्म था
10:49पारसो सतानवे में अल्लावदीम खिल जी के सेनापती मुश्रत खान रहा है और फिर मुजफर शाह और एहमद शाह ने
10:57बार बार आस्था के इस थल को स्टोट पहुंचाए
11:08कि 1665 ने और अंजेब ने मंदिर को दो बार पूरवाया और जब देखा कि लोग खंधर में भी पूजा
11:14करने आ रहे हैं तो भक्तों के कट्ल के लिए सेना भीवी और मंदिर का निशान तक मिटाने का आजिए
11:21खाने गया और अरंग शेब ने उसका नायश किया और अरंग जेब ने भीламबर 1665 को एक फरमान जायीर किया
11:31कि अभी भी गुजलात में जो मुर्तिःपुजा होती है उसका मगर घाञ करो जो भी मंदिरे उसका नायश करो वो
11:40फरबंद का योग करते होवे सोमनात में जो मु
11:50में नया फर्मान कया और उसमें सूमनाथ में जो भी मुर्ती थी जो भी पूजाबबात होता था वह सिब का
11:57नस्ट किया तो आखरी जो खंडेर था सूमनाथ का इसके बाद आज का नया सूमनाथ उस जगा पर बनाया गया
12:06है
12:07सुमनात मंदिर 17 बार तोड़ा गया लेकिन हर बार उसका निर्माण होता रहा
12:13मराठा राजाओं के हाथ में जब देश का बड़ा हिस्सा रहा
12:16तो महरानी अहिल्या भाई होलकर ने मंदिर के स्थान पर ही मंदिर बन बाया
12:27अहिए भाई जिन्हों ने पूरे देश में बहुत अलग-अलग मंदिरों का जिर्णों धार किया था
12:34उनकी भी स्मृति जीवित रहती है लेकिन देखिए इसी तरीके से जो पुराना रास्ता यानि कि संदार पठेल ने जब
12:42मंदिर का पुनर निर्माण करवाया
12:44उससे पहले जो रास्ता था वो इसी रास्ते का प्रयोग होता था
12:53भारत की स्वतंतरता के बाद ततकालीन ग्रे मंत्री सरदार वल्लब भाई पठेल ने मंदिर को पूर्ण गौरव ब्रदान करने का
13:00संकल्प लिया
13:01और विरोध की परवाह न करते हुए सोमनाथ मंदिर का निर्माण जनता से मिले धन की मदद से करवाया
13:11तो सरदार वल्लब भाई पठेल और जामनगर के जामसाइब दिगविजेसी दोनों की अडग शक्ती और उसकी वज़ह से सौमनाथ ट्रस्ट
13:22का रचना की गई थी
13:24और सौमनाथ ट्रस्ट ने पूरे हिंदुस्तान में उस वक्त चन्दा लेना का शरुवात की थी और जामसाइब और सामलदास गांधी
13:35ये बड़े बड़े नेताओं ने रकम जमा करवाई थी
13:38बाद में पूरे हिंदुस्तान में सौमनाथ मंदीर के लिए चन्दा इखठा करने की प्रवरूती की गई थी
13:45सौमनाथ ट्रस्ट का गठन किया गया और सौमनाथ ट्रस्ट ने दो-तीन साल में ये मंदीर का बांध काम सौमपूरा
13:53शिल्पी के पास बनवाया
13:58सौमनाथ मंदीर आज संदेश देता है कि सत्ता बदलती है सेनाएं आती जाती है लेकिन श्रद्धा और सत्य को कभी
14:06तलवार या तोप के बल पर मिटाया नहीं जा सकता
14:09आज सौमनाथ मंदीर अपनी पूरी दिव्यता के साथ खड़ा होकर भारत के गौरफशाली अतीत की गवाही दे रहा
14:21गजनवी मंदर विद्वन्स के साथ यहां का अकूत खजाना भी लूट कर ले गया
14:25लेकिन खजाना लूटा जा सकता था इमारत तोड़ी जा सकती थी शद्धालूओं का विश्वास नहीं खत्म किया जा सकता था
14:38मंदर आज भी पून वैभव के साथ सनातन संस्कृती का ध्वजवाहत बना हुआ है घजनवी और उसकी सल्तनत का आज
14:45कोई नाम लेवा तक नहीं
14:49यहां पर आप जो भी अवशेश देख रहे हैं ग्यारवी सदी बारवी सदी तेरवी सदी चौदवी सदी अलग-अलग सदियों
14:57को इंगित आप इसमें देखेंगे
15:001179 की एक खंडित प्रतिमा है यह इतना सहेज कर अब इन सब को रखा गया है यहां गजलक्ष्मी की
15:08प्रतिमा आप देख सकते हैं पारवती जी की प्रतिमा को आप यहां देख सकते हैं लेकिन चुकि खंडित मूर्तिया है
15:16तो जब
15:19सब धर्ति में से निकाले गए उसके बाद सब को लाकर यहां पर स्थापित कर दिया गया है कुछ इतिहासकार
15:27यह मानते हैं कि छे बार
15:31मंदिर को तोड़ा गया छे बार पुनर निर्माड किया गया लेकिन कुछ और वर्णन ऐसे हैं जो यह कहते हैं
15:37कि लगभग सत्रह बार ऐसा हुआ था
15:42इतिहास दर्ज भी है इतिहास मौखिक भी है लेकिन उस सब के बीच जब आप इस पूरे और यह भी
15:52मंदिर है यह भी एक सूर्य मंदिर का अवशेश है
15:55यहाँ पर बताया जाता है कि करीब 16 सूर्य मंदिर इस प्रकार के थे जो 7 किलोमीटर के दारे में
16:02हैं और बहुत सुन्दर इसका वर्णन दिया गया कि जहाँ पर सूर्य की किरने पढ़ती थी उस हिसाब से उतनी
16:08उतनी दूरी पर इन सभी सूर्य मंदिरों का निर्माड किय
16:11गया था लेकिन आज जिस रूप में है वो आपको केवल देखकर प्रतीत होगा कि यह मंदिर रहा होगा संरक्षित
16:20करने और इस पूरे क्षेतर के इतिहास को यहाँ पर जीवित रखने का एक बहुत सुन्दर प्रयास यहाँ पर है
16:51शास्त्रों में 12 जोतिरलिंगों का उलेक मिलता है लेकिन जब भी इनकी गणना की जाती है तो सबसे पहले बोला
16:57जाता है सौराष्ट्रे सोमनाधम्च
17:02यानि सबसे पहले सौमनाध जोतिरलिंग का वरणन मिलता है मंदिर का निर्माण चंद्रदेव में कराया था इसलिए चंद्र रहन के
17:10समय यहाँ की गई पूजा का विशेश फल मिलने की मान्यता है
17:20चंद्र, अके इस्टरोलोजी, मून फास प्लैनेट तर Kosaälそんな ने की 4 में की 2 दीन, 1 रासी और सबसे लेट
17:27चलता है संड्य माहराज, 30 में एक रासी में की रासी ने मिल्ता है
17:3113 में गुरु माहराज 5 और 1 अत्रा मीना राहू माहराज 1 ब sécurité मैं
17:36फास्ट प्लैनेट इस दे मून सववा दो दिन में वो राशी बदल देता है तो चंचल होता है जिसी का
17:43चंद्रदोश होता है वो आदमी चंचल होता है यहां बैठा है तो वहां भागता है मन से वहां बैठा है
17:49तो यहां भागता है यह ऐसा होता है लेगिन यहां आने से उनक
18:05जिने का अक्षय दर्दान मिला था तो यहां मनुकामना का जो भी फल मिलता है वो अक्षय होता है और
18:10उसका प्रभाव कभी खत्म नहीं होता
18:17पहले के पूरवजों नहीं इस तरीके से इतनी बार इस मंदिर पे आक्रमन हुए हैं और उसके बाद में जियन
18:23अधर हुआ है मादेव की कृपा से सब चीज़ें ठीक रही हैं काफी अच्छा लगता है काफी आलोकी ख्यांती मिलती
18:28है यहां करके शुरू में तो हमें एंटर क
18:42मैं अपने बेटा पतोई के साथ आया हूँ बस यही प्राटना लेके आएं कि हमारी जितने भी पहले के पाप
18:48थे और सारी चीज़ें थी साफ हो जाएं और आगे कि जो भी हमारी मनों कामना है वो भगवान जल्द
18:53से जल्द पूर कर दे
18:55सनातन मान्यताओं में सभी बारज जोतिरलिंगों का बहुत महत्व है उसमें भी सोमनात चुकी प्रथम है तो इस जोतिरलिंग को
19:04लेकर अलग ही आस्था का भाव रहता है
19:07सोमनात जियोतिरलिंग प्रथम है और सबसे प्राचीन है और माना जाता है कि यहां शिव की ऊर्जा बस्ती है
19:20आज जिस स्वरूप में आप सोमनात मंदिर को देखते हैं
19:24उससे सेकड़ो सेकड़ो सदियों पहले बताया जाता है कि यहां पर जो शिवलिंग था वो एक अद्भुत स्वरूप में विराजमान
19:33था
19:36कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनका जवाब इंसानी कल्पनाओं से परे होता है
19:43कुछ रहसी इतने गहरे होते हैं जो जब सामने आते हैं तो एक ही बात कही जा सकती है
19:48अद्भुत और विश्वस्निय और कल्पनिय
19:54सकंद पुराण में वरणन मिलता है कि चंद्रदेव ने सूमनात मंदिर को सत्युग में सूने का बनवाया था
20:00त्रेता युग में भगवान शिव के अनन्य भक्त रावन ने चांदी से इसका पुनर निर्मान करवाया
20:06द्वापर में भगवान कृष्ण ने चंदन की लकडी से मंदिर को भक्वता प्रदान की
20:10बाद में सुलंकी राजाओं ने मंदिर का फथरूं से निर्मान करवाया
20:29कहा जाता है कि सुमनात मंदिर का शिवलिंग अब से हजार साल पहले तक
20:33तीन फीट उपर हवा में तेरता था
20:36न शिवलिंग के नीचे कोई आधार न शिवलिंग के ऊपर कोई जंजीर या रसी
20:50सकंद पुरान के प्रभास खंड में सुमनात मंदिर के शिवलिंग के हवा में स्थित होने की बात कही गई है
20:57कई विद्वानू का भी ये मानना है कि अब से हजार साल पहले तक शिवलिंग हवा में ही स्थिर रहता
21:02था
21:04तो इतियास बोलते हैं से बोलते हैं कि अंगुष्ट प्रमाण था भगवान का जो स्वरुप दिव्य स्वरुप था कहीं कोई
21:11सपोर्ट नहीं था उपर नीचे कहीं सपोर्ट नहीं था
21:13और इसलिए इसको लेविटेटिंग शिवालिंगा कहा जाता है जो अनफॉचुनेटली 1026 AD में महमूद गजनी के अटाक में महमूद गजनी
21:22ने उस शिवलिंग को गिरा के तोड़ दिया था
21:26शिवलिंग के हवा में स्थिर होने के पीछे आध्यात्मिक कारण भी है और वैज्यानिक भी यह माना जाता है कि
21:33शिव का आधार कोई भौतिक तत्व नहीं हो सकता वो शून्य शुद्ध चेतना और सभी तत्वों से परे हैं शिव
21:40भौतिक संसार की सीमाओं से परे अनंत और �
21:44असीम है सवाल उठाने वाले पूछेंगे कि पुराणों से अलग भी क्या इतिहास में इसके बारे में लिखा गया है
21:55हम आपको आगे बताएंगे लेकिन शिवलिंग की अद्भुत विशेष्टा से पहले जानना होगा कि विज्यान का प्रयोग इंसानों ने कब
22:03शुरू कि
22:05माना जाता है कि विज्यान किसी एक तिथी परस्तित्व में नहीं आया बलकि मानव जाती ने इसका सहारा लेना 3000
22:11इसापूर्ग में शुरू किया
22:14ये कास ये युग का दौर था धीरे धीरे मनुश्यों में विज्यान की समझ विक्सित होती चली गई और नई
22:20नई खोजे और आवश्कार होने लगे
22:24सोलवी सदी आते आते दुनिया में साइंस का बोल बाला हो गया पर सूमनात मंदिर तो इससे कहीं पुराना है
22:32अधुत है कि हजारों साल पहले जब विज्यान इतना विक्सित नहीं था तब ये कैसे संभव हुआ होगा कि शिवलिंग
22:40हवा में टिका रहे
22:44वो कौन सा विज्यान है जिससे ये संभव हो पाया होगा किस धातु का वो जोतिर लिंग रहा होगा जो
22:52इतने बड़े आकार के बावजूद इस तरीके से हवा में तैरता रहा हो
22:57यानि कि वो धर्ती पर स्थापित नहीं बलकि बीचों बीच गर्ब ग्रह में नजर आता था बहुत ज्यादा एतिहासिक तत्थि
23:08नहीं है अब इसको साबित करने के लिए
23:10लेकिन ये बात आस्था की है और पुराने समय से जो मौखिक रूप से एक दूसरे को बातें बताई गई
23:18वैसे आज भी लोग इस बात का इस विज्ञान का जिक्र करते हैं
23:26बार्वी सदी में एक फार्सी भूगोल शास्त्री थे जक्रिया अलकजविनी उनका जिक्र इंटरनाशनल जर्नल ऑफ हिस्ट्री में सोमनात मंदिर पर
23:35प्रकाशेत एक लेक में हैं
23:36कजविनी ने सोमनात मंदिर में मौजूद शिवलिंग के बारे में कहा था
23:40ये शिवलिंग मंदिर के मध्य में स्थित था जिसके नीचे से उसे कोई सहारा नहीं था और नहीं उपर से
23:46उसे लटकाया गया था
23:47जो कोई भी उसे हवा में तैरता हुआ देखता वो आश्चर चकित हो जाता था
23:52ये मूर्ती हवा में तैरती हुई प्रतीत होती थी, शायद लोड स्टोन या चुम्बकिये पत्थर जा फिर प्राक्रतिक चुम्बक से
23:59बने एक छत्र और लोहे से बने शक्तिशाली चुम्बकिये उलका पिंड से निर्मित शिवलिंग के कारण।
24:22कि शिवलिंग किसी ऐसे पत्थर से बना रहा होगा, जिसमें कहीं न कहीं कोई धातु का अंच जरूर रहा होगा,
24:29या कोई चुम्बकिये विशेशता रही होगी।
24:32आम तोर पर ऐसे पत्थर अंतरिक्ष से आय माने जाते हैं, इन पत्थरों को मीटियोर कहते हैं।
24:39जो ये शिवलिंगा था, ये बेसिकली एक उलकापिंडिया मीटियोराइट का पीस था।
24:44इसका हमारे पास काफी एविडन्स है, सबसे ज़्यादा एविडन्स है कि उनकी अपनी कथाओं में लिखा है कि जब ब्रह्मा
24:50जी और विश्नु जी में बहस हुई, तो शिव जी ने आसमान को एक ब्राइट लाइट की तरह चीर दिया।
24:56और ब्राइट लाइट चीर के उलका पिंधी आता है, यानि कि मीटियोराइट्स, मीटियोराइट्स निकल आइरन की काफी तादाद होती है,
25:04स्ट्रॉंगली मेगनेटिक होते हैं, और क्योंकि जब वो नीचे गिरते हैं तो वो छोटे हो जाते हैं, तो इसके बारे
25:10में एक �
25:12हमें भी लिखा है कि ये अंडे के साइस का था, ये नॉमल शिवलिंग से छोटा था, ये जो सोमनाथ
25:17का लेविटेटिंग शेवा लिंगा था, इसका जवाब हमें चुम्ब किये उत्तोलन या मेगनेटिक लेविटेशन की थियोरी बताती है, हाला कि
25:27वैग्यानिकों की माने
25:28तो मेगनेटिक लेविटेशन हसल करना बहुत मुश्किल है, और सोमनाथ से पहले इसका कहीं और सुबूत दिखाई नहीं देता, शिवलिंग
25:38हवा में तभी ठहरा होगा, जब इसके उपर और नीचे दोनों और शक्तिशाली मागनेट लगे होंगे, यानि मंदर की छट
25:45पर
25:46और शिवलिंग के ठीक नीचे, दोनों चुम्बक इतना बराबरी से फोर्स लगा रहे होंगे कि बीच में शिवलिंग अपनी जगे
25:53स्थिर हो गया होगा, फार्सी इतिहासकार कजीवनी ने लिखा है कि 1205 में जब महमूद घजनवी ने हमला किया, तो
26:02उसने अपने सैनिकों
26:03से हवा में स्थिर शिवलिंग के बारे में पूछा, घजनवी के सैनिकों ने भाले से शिवलिंग के चारो तरफ घुमा
26:11कर देखा तो कोई रुकावट नहीं मिली, फिर किसी ने कहा कि छट में चुमबक और शिवलिंग में लोहा हो
26:17सकता है, महमूद के आदेश पर छट के क�
26:20अटाए गए तो शिवलिंग जुकने लगा, ब्रिटिश वैग्यानिक साम्यूल अर्णशो की 1842 में अर्णशो थियोरम प्रकाशित हुई, इस थियोरम के
26:32अनुसार एक चुमबक दूसरे चुमबकों की मदद से हवा में कभी स्थिर नहीं ठहर सकता, या तो वो चुमबकों
26:39से चिपक जाएगा या फिर दाए या बाए निकल जाएगा, इसके लिए एक डाए मैगनेटिक पदार्त इस्तमाल करना होगा
26:48डाय मैगनेट्स क्या होते हैं, डाय मैगनेट्स नोन है, हमारा उस वकत का मेटलर्जी बहुत अड्वांस था, उसको बहुत जादा
26:55डॉक्यूमेंट है, यह तो 10th century AD का है, 1026 AD में, 9th century में बना था यह, जबकि इंडियन
27:01मेटलर्जी तो 2nd century AD से बहुत अड्वांस है, जिंक
27:13डाय मेगनेटिक है, इसका आप लगा दीजे कि एक आदमी लड़ खड़ा रहा है, और चार आदमी इसको अपनी तरफ
27:19खींच रहे हैं, जो ज़्यादा खींचेगा, वो उसकी तरफ चला जाएगा, यह नॉर्मल मेगनेट के साथ उलका पिंड है, और
27:25अगर आपने बिसमत �
27:26बीच में डाल दिया, तो उसके बीच में दो दोस्त भी आगे, बिसमत दोस्त का काम करता है, वो जब
27:32आदमी गिरने लगेगा, उसको संभाल के कम फोर्स वाले हिस्से में शिफ्ट कर देगा, बिसमत का हमारे पास बहुत सॉलिड
27:38डाटा है, श्री सोमनात मंदर के कंटेक्स
27:40में, क्योंकि जगा जगा जगा लिखा है कि सॉमनात का मंदर, जो महमूद गजनी ने तोड़ा था, उस मंदर की
27:46बात कर रहा हूं, वो 56 टीक यानि की लकडी के पिलर्स पे था, जिनके उपर सीसा यानि लेड़ी चड़ाया
27:53हुआ था, और वो सीसा नहीं था, वो बिसमत था
28:01अद्भुत है कि जो शोद 1842 में सामने आई, उसकी जानकारी आज से हजारों साल पहले कैसे थी, प्राचीन हिंदू
28:11कारिगरों को ये कैसे मालूम था, कि सिर्फ चुम्बकों की मदद से शिवलिंग को हवा में रोकना मुम्किन नहीं होगा,
28:17बलकि बिसमत या ग्राफाइट
28:19जैसे डाय मेगनेटिक पदार्ट भी इस्तमाल करने होंगे, तो क्या मंदिर बनाने वालों ने बिसमत का प्रयोग किया, लेकिन बिसमत
28:29तो 1703 में खोजा गया, फिर उस समय क्या प्रयोग किया गया, तो क्या हम ये कह सकते हैं कि
28:36मानव इतिहास के कई पन्नों को मिटाया गया
28:40कि दुनिया के जानने से सेंग्डों सरियों पहले भारत की भूमी पर ये ज्यान मौजूद था
28:52तो मनाच से जुड़ा ये एकलोता रहस्य नहीं है, अगला रहस्य इससे भी बड़ा है और उसके लिए आपको हम
29:00लिये चलते हैं अल्टाप्टिका
29:04यानि साउथ पोल जिसे हम दक्षणी ग्रूप कहते हैं, कहते हैं याँ पहली बार कोई इंसान 1911 में पहुँचा
29:1414 दिसंबर 1911 को नौवे के एक्स्प्लोरर ग्लॉाल एमनसन अपनी टीम के साथ प्रित्वी के दक्षणी ग्रूप पर होगा
29:23किताबों में दर्ध है कि एंटाक्टिका को 1820 में खोजा गया, हालकि एक नए अध्यायन से ये भी पता चलता
29:30है
29:30कि एंटाक्टिका की खूज करने वाले पहने इंसान समुद्री यात्रा करने वाले पश्चिनी लोग नहीं थे
29:37वल्कि पॉलिनेशिन थे जिन्होंने 1300 साल पहले इस समसे ठंडे महाधीट को खोजा था
29:46चलिए, अगर हम ये भी मान लें कि एंटाक्टिका 1300 साल पहले खोजा गया
29:52तब भी जो अध्भुत तक कि हम आपको बताने जा रहे हैं, वो आपको हैरान कर देगा
30:00सोमनात मंदर की प्राजीन दीवारों और कारीगरी के भीतर एक अविश्मस्लिय रहस्य छिपा है
30:06मंदर के दक्षण दिशा में स्थित, समुद्र के ओर मुख दिये हुए ये एक ऐसा स्तंब है
30:13जो भूगोल विज्ञान की सभी पश्चमी खोजों पर भारी पढ़ने का दवा करता है
30:19पर सम्भ अपने अंदर एक अकल्पुनिय राद शिपाए
30:24इस स्तंब के अस्तित्व का उल्लेख छटी शतादी के कुछ प्राचीन ग्रंखों में मिलता
30:33आसमुद्रांत दक्षिन ध्रूप परियंत अबाधित ज्योतिर मार्ग
30:38ये लिखा है इस स्तंब पर जो आप यहां पर सोमनाथ मंदिर में देख सकते हैं
30:43ये एक प्रित्वी है और उस प्रित्वी के आरपार हो रहा है त्रिशूल
30:48और त्रिशूल जिस ओर संकेत दे रहा है वो हिस्सा है जहां से केवल और केवल जल का मार्ग रहेगा
30:57यानि केवल और केवल समुद्र यहां से हजारू नौटिकल माईल दूर जाकर दक्षिनी ध्रूप है
31:06उससे पहले भूमी का कोई टुकडा नहीं
31:09अब सोचिए कि जिस समय पर जो पश्चिमी देश है वो कहते हैं कि न तो गणना की कोई का
31:18कोई तरीका था
31:19न वो डिस्टेंसेज को इतनी आसानी से माप सकते थे
31:25बहुत आसान रहा उनके लिए यह कह देना कि भारतिय सभ्यता में किसी को कुछ मालूम नहीं
31:29लेकिन आज भी हमारे मंदिरों में न जाने कितने ऐसे रहस्य हैं जिनके जवाब किसी के पास नहीं हाँ उस
31:36दौर के विज्ञान के पास जरूर रहे
31:45आसमुद्रांच दक्षण भूप परियंत अबाधित जो तिर मार्ग यानी समुद्र के इस बिंदू से लेकर दक्षणी भूप तक कोई भूभाग
31:54नहीं है
31:55मैप पर देखें तो सोमनात मंदिर से दक्षण के ओर यात्रा करने पर 10,000 किलोमीटर दूर स्थित दक्षणी द्रूप
32:02यानी एंटाक्टिका तक पहुँचने में वाकई कोई भूभाग नहीं मिलेगा
32:07सवाल उठना लाजिमी है
32:09चटी शताब्दी में सोमनात मंदिर को बनाने वाले हमारे फूरबज़ों को ये कैसे पता था
32:15क्या चटी शताब्दी में ये स्थापित करने वाले लोगों को समुदरी रास्तों का ज्यान था
32:21क्या ये लोग खुद एंटाक्टिका तक गए थे? क्या ये भी इतिहास के पन्नों से मिटा हुआ एक स्वर्ण मध्याये
32:29है?
32:30यह प्रभास एक ही इसास्थान है यहां से दक्षिन धुरू परियंत अबाधित जल मारन है
32:37जो यहां से एक पिलोर दिखाई दे रहा है वो दक्षिन धुरू तक पानी पानी है कोई जमिन नहीं है
32:58इस तंब की सटीक स्थिती प्राचीन भारतिये खबोल विदों के गहिन व्यान को दर्शाती
33:03यह बताता है कि भारतिये संस्थिती में आस्था और विज्यान किस अद्भुत तरह से जुड़े हुए थे
33:18शिव जी की जटाओं में चंद्रमा सुसज्जित है लेकिन वहाँ पर चंद्रमा को स्थान कैसे मिला उसकी कथा जुड़ती है
33:27सोमनाथ से
33:52सोमनाथ मंदर का निर्माव किसने कराया
33:57सोमनाथ मंदर का निर्माव कब हुआ
34:03सोमनाथ मंदर सद्यों पुराना हो या युगों पुराना
34:17सोमनात मंदिर के निर्माण का उलेक सकंद पुराण और प्रित्वी के सबसे प्राचीन वेद रिग वेद में मिलता
34:23और तब खुलता है आस्था, विश्वास और भक्ती का वो अध्था है जो सोमनात मंदिर की लीग पढ़ने की तखा
34:32सुनाता
34:48सोमनात मंदिर का पहला रहस्य इसके नाम में ही छिपा है
34:55सोम का अर्थ होता है चंद्र, नात का अर्थ होता है स्वामी, यानि जो चंद्र का स्वामी वो सोमनात
35:07पौराणिक मानेताओं की अनुसार सोमनात मंदिर का निर्मान सत्योग में हुआ था
35:12जब देवताओं और दानवों की लीज युद्ध हुआ करते
35:17उस समय राजा दक्षी की 27 बेटियों से चंद्र देव यानि चंद्रमाने शादी की थी
35:27दक्षप्रजापती की 27 कंञ्या थी अश्विनी भरणी कृतिका रोहिनी एकोडिंग टू हिंदुईजम एकोडिंग टू एस्ट्रोलोजी 27 नक्षत्र जो जो जोतिश्मी
35:36नक्षत्र आते हैं यह 27 कंञ्या का ब्याह रचाया था चंद्रमा से लेकिन
35:42चंद्रमा एकी कंञ्या को प्रेम करते थे वो ती रोहिनी बाकी की 26 कंञ्याओ को हमेशा अन्याय होता था 26
35:49कंञ्याओ ने बार बार मिलके चंद्रमा से सिकायत किया आपने हमार अभ्या तो रचा दिया वैवाहिक सुक्त चंद्रमा हमें नहीं
35:56देते हैं तब जाके दक्ष�
35:57प्रजापती ने उसे शराप दिया।
36:01माना जाता है कि शराप से बचने के लिए चंद्रदेव ने स्रिष्टी के रचाइता भगवान ब्रह्मा से प्रार्थना और ब्रह्मा
36:08जी ने चंद्रमा को रास्ता दिखाया।
36:13चंद्रमा को कुष्ट लोग हो गया। लेप्रसी।
36:27मार्ग बताईए चंद्रदेव ने प्रभास पाटन में शिवलिंग स्थापित किया और भगवान शिव की घोर्त पक्स्या कि और तब धगवान
36:38शिव ने उन्हें वर्दान दिया
36:43भगवान शिव ने बताया मैं संपुर्ण मुक्त नहीं करशकता हूँ
36:46प्रतिपदा से पुरणिमा तक आप पुरण हो जाओगे और कुरुष्ण पक्स की प्रतिपदा से अमा वासिया तक खिन हो जाओगे
36:54ये क्रम तब से चला आ रहा है
36:57माना जाता है कि उसके बाद चंदरदेव ने भगवान शिव से प्राथना की
37:01कि वो इसी स्थान पर बस जाएं और भगवान शिव ने हमेशा के लिए अपना स्थान शिवलिंग में बना लिया
37:08और इस शिवलिंग का नाम सोम के नाथ यानि सोम नाथ पढ़ा
37:15क्योंकि सोम माने चंदरदेव और नाथ मतलब उनके अथिपती
37:30सोमनाथ भगवान शिव के 12 जोतिर लिंगों में पहला जोतिर लिए
37:34जिसके बारे में मानेता है कि यहां भगवान शिव कल्यारकारी रूप में उपस्थे थी
Comments

Recommended