00:00Sochou, you are in a airport, 4 people are people.
00:04No London, no Dubai, no Dubai, no one's home.
00:07Everyone has tickets. Everyone has tickets. Everyone has a hotel.
00:10Now, you are in a hotel. You are in a hotel, every hour, every hour.
00:16Because you have no tickets, no passport, no country, no one's home.
00:20This is a man who has a story in Paris, which has been in Paris,
00:23which has been in Paris, no criminal, no terrorist.
00:30And the most shocking thing when he came to the hospital,
00:33he came to the hospital, why?
00:35This question we will be in the world's blueprint.
00:39Mayran Karimi Naziri is the one who is a true story that has been in Paris.
00:44In Iran, a small town, a young man was born.
00:49It was a child who was born when he had a child.
00:51His story was different.
00:54His husband was a doctor.
00:57And his wife was a British nurse.
00:59जो कभी officially उसकी मा नहीं बनी एक नजायस दिश्टे की अलाद जिसे दुनिया ने कभी पूरी तरह अपनाया नहीं
01:061973 में महरान इंग्लैंड आया ग्रैटफॉर्ड युनिवस्टी में पढ़ने और वहाँ पहुंच के उसे पहली बार लगा यहां बिलॉंग करता
01:15हुँ मैं
01:29लाफ प्रोटेस्ट और महरान भी इन प्रोटेस्ट में था एक स्टूडेंट की तरह एक आवाज की तरह का खामी यह
01:36हुआ कि इरानियन गौर्मेंट ने उसे निकाला पासपोर्ट शीन लिया देश से भाल कर दिया और अब वो इरान का
01:42नहीं रहा इंग्लैंड ने उसे अ�
01:57अपने हाँ कुछ सालों तक जिन्दगी ठीक रही लेकिन फिर 1988 में एक ऐसी घटना हुई जिसने उसकी पूरी दुनिया
02:05बतल दी प्रैस 1988 महरान एक ट्रेन स्टेशन पर था लंडन जाने की तयारी में उसके हाथ में एक ब्रीफ
02:13केस था जिसमें था उसकी पूरी जिन्दगी
02:15का सबूत, Refugee Certificate, Identity Papers, वो कागस जो खहते थे ये इंसान DL है, इसका एक नाम है, एक
02:23जगा है दुनिया में और वो ब्रीफ केस चोरी हो गया, बिना Documents के महरान लंडन पहुंचा, रिटिश ओफिशियल से
02:30रेखा कोई papers नहीं, कोई पासपोर्ट नहीं, कोई identity नहीं, उन्
02:45अंदर जाने देता, कोई जवाब नहीं था, जो उसे बाहर जाने देता, तो French authorities ने एक अजीब फैसला लिया,
02:52उसे एरपोर्ट के अंदर रहने दिया, क्योंकि टेक्निकली वो departure launch में था, जो ना फ्रांस है, ना कोई और
02:58देश, एक बीच की जगा, एक no man's land, अगस 26, 1988, ये �
03:15कुछ दिन, 18 साल में बदल गए, तो जो एरपोर्ट में हैना कैसा होगा, हम एसी जारता लोग एरपोर्ट पे
03:222-3 घंटे भी मुश्किल से काट पाते हैं, restless हो जाते हैं, बोदिंग लगता है, महरान ने वहां 18
03:29साल बिताए, एक red bench थी, टर्मिनल 1 में, यही उसकी पूरी द�
03:33सुबह उठता ब्रश करता एरपोर्ट वाश्रूम में, नाश्ता करता मकडॉनल्स से, ऐसे strangers देते थे, एरपोर्ट workers देते थे, दिन
03:42में वो diary लिखता, economics पढ़ता, रेडियो सुनता, अकेला बैठता, सोचता, एरपोर्ट workers ने उसे एक नाम दिया, Sir Alford,
03:51क्योंकि एक बार British immigrants
03:53form पर गलती से लिखा गया था, Dear Sir Alford, और महरान को वो नाम पसंद आ गया, उसने डिसाइड
04:00किया, अब मैं महरान नहीं हूँ, अब सिर्फ Sir Alford हूँ, एक नया नाम, एक नई आइडेंटिटी, क्योंकि जब तुम्हारी
04:08पूरी आइडेंटिटी चीन ली जाए, खुद अपनी
04:10नई आइडेंटिटी बनाना शुरू कर देते हो, साल गुजर गए, 1989, 1990, 1992, 1995, दुनिया बदल रही थी भार, Berlin
04:21Wall गिरी, Soviet Union तूट गया, इंटरनेट आया, और महरान वही Red Bench पर बैठ रहा, दोज हजारों लोग आते,
04:29केसिस लिए, पासपोर्ट लिए, टिकेट लिए, और च
04:40ये मेरी दुनिया है, पाता है वो पार्ट, जो सुनके तुमारा दिमाग चक्रा जाएगा, साथ साल एरपोर्ट में गुजरने के
04:48बाद, Belgium ने कहा, महरान आओ, हम तुमें residency देंगे, तुम Belgium में रह सकते हो, जिन्दगी शुरू कर सकते
04:55हो, महरान ने मना कर दिया, क्यों, क्य
05:10की जिन्दगी एरपोर्ट पर डाव लगा दिया, सिर्फ इस लिए कि वो नाम गलत था, चांच ने भी ओफर किया,
05:171999 में, महरान यहां आओ, हम तुमें लीगल स्टेटर्स देंगे, महरान ने फिर मना कर दिया, लोय क्रिश्टिन बॉगर्ट, जो
05:25सालों से उसकी मदद कर दा
05:26था, हैरान था, मीडिया हैरान की, एरपोर्ट स्टाफ हैरान था, आखे 2003 में हॉलिवोड भी हैरान हो गया, इवन्स फिल्बग
05:35में महरान की कहानी खरी थी, दो लाग पचास हजार डॉलर्स में, टॉम हैंक्स को कास्ट किया, फिल्म बनी दा
05:41टर्मिनल, महरान अपने बेंच
05:43पर बैठा रहता था, और एरपोर्ट के स्क्रीन पर उसकी कहानी चल रही थी, वो अकेला इंसान जिस पर हॉलिवोड
05:49फिल्म बनी, वो अभी भी वही बेंच पर था, वो दो लाग पचास हजार डॉलर्स महरान को मिले, लेकिन उसने
05:56कुछ नहीं खरी रहा, कोई लक्शरी न
06:11जा, वो बेंच जहां उसने 18 साल गुजारे तोट दी गई, हॉस्पियल से निकलने के बाद रेट क्रॉस ने उसे
06:17एक शेल्टर दिया पैरिस में, फिर एक चायटी सेंटर, फिर एक गौर्मेंट हाउस, दुनिया के बार फाइनली महरान करीम नजेरी
06:25रहदा था, लेकिन वो
06:27खुश नहीं था, जो लोग उसे मिलने जाते, कहते थे, उसकी आखों में वो चमक नहीं थी, जो एरपोर्ट पर
06:33थी, वो लॉस्ट था, अकेला था, दुनिया उसे समझ नहीं पा रही थी और वो दुनिया को, सालों तक वो
06:39शेल्टर्स में रहा, कभी हां, कभी हां, और से 2022 म
06:43कुछ ऐसा हुआ जो सब लोगों ने सोचा भी नहीं, सप्टेंबर 2022, 77 साल की उमन में महरान करीम नजेवी
06:51वापिस चार्ल्स डिगवेली एरपोर्ट आ गया, वही एरपोर्ट, वही वेंचिर्स, वही दुनिया जहां उसे सकून मिलता था, और नवेंबर 12,
06:592022, उसी एरपोर
07:06जो भार जाने से डला, जो दुनिया की नजदों में एक मिस्टरी था, उसी एरपोर्ट में दुनिया से चला गया,
07:12जहांसे उसकी कहानी शुरू हुई थी, वही खतम भी हुई, ये थी महरान करीमी नासेरी कहानी, एक आदमी जिसे दुनिया
07:20ने डॉक्यमेंट्स की वज़े
07:21से जेट कर दिया, जिस पर कोई देश अपना नहीं था, जिसके पास एक बेंच था, एक डाइडी थी और
07:27एक सपना था, कि कोई उसे उसकी अपनी आइडेंट्टी दे, लेकिन मैं चाती हुँ तुम एक चीज सोचना, क्या मेरान
07:34सच में ट्रैप था, या उसे खुद चुना
07:36एरपोर्ट को, 1995 में बेलजियम ने बुलाया, 1999 में सांस ने बुलाया, डॉक्यूमेंट्स मिल सकते थे, जिन्दगी शिगू हो सकती
07:44थी, लेकिन उसे मना कर दिया, क्योंकि वो वो आइडेंट्टी नहीं था, जो पेपर्स पर लेखा था, वो सर अलफर
07:50था, विटिश प्रा
08:05कर जवाब धुलते विताईगी, उसी एरपोर्ट में उसी बेंच पर, जवाब मिला या नहीं, ये हम कभी नहीं जानेगे, दवर्ट्स
08:13पर हम ऐसी सच्ची कहानिया लाते हैं, जो तुम्हें सोचने पर मजबूर कर देंगी, जो स्कीम से निकलने और तुमारे
08:20दिमाग में �
08:20जाएंगी, गर आज की एक कहानी तुम्हें अच्छी लगी, तो कमेंड में सिर्फ इतना लिख दो, सर अलपर्ट, उनके लिए
08:26जो कभी अपना घर नहीं दूमता है, और सब्सक्राइब करो दा वर्ट्स प्रूपर्ट को, क्योंकि दोनिया में ऐसी हजारो कहानिया
08:32हैं, जो
08:32कोई इस नआदा हम सुनादा है
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