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अंग, बंग और कलिंग... देखें पूर्वी भारत के 'त्रिकोण' की पूरी कहानी

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00:16मस्कार मैं हूँ नेहा बात हम और आप देख रहे हैं कहानी 2.0
00:19आज कहानी उस प्रिकोर की जिसने कभी इंदुस्तान की दिशाते की अंग बंग और कलिंग
00:25बिहार की धर्ती से लेकर पश्चिम मंगाल की विचार धारा तक और उडिशा की ताकत तक
00:31यह सिर्फ नाम नहीं इतिहास के तीन बड़े अध्याएं हैं
00:35बंगाल चुनार में इनका जिक्र खूब हुआ लेकिन सवाल यही कि आखिर यह हैं क्या
00:40क्या यह सिर्फ अतीत की कहानी है या भविश यका संकेत
00:44आज कहानी में यह समझने की कोशिश करेंगे इनकी असली पहचान एतिहास और आज की राजनीती में इसकार
01:04अंग प्रदेश भागलपूर से लेकर आपको जार्श गुंडा तक फैला हुआ था
01:15बंगाल की जो रचना थी वो शाषकी अद्रिश्टी से एक बड़ा प्रभावी डंग से काम करती थी
01:29कलिंग भारत की का दुनिया के साथ होने वाले व्यापार का द्वार था
01:37अंग बंग कलिंग एक प्रकार से पूरी बंगाल प्रेशिडन्स आज भारतिय जनता पार्टी के द्वज के नीचे हाँ
01:47तो तस्रीर अब बिलकुल साफ है यसे जीत नहीं बलकि स्यासर का नया संकेत है
01:53बंगाल के कोने कोने तक जो लहे चली उसने बता दिया कि राजनीती का केंद अब बदल रहा है
01:59नरेन्द भोदी का अंग बंग और कलेंग सिर्फ नारा नहीं एक रणनीती है
02:29कुछ ज्यादा वैभवशाली यह भारतिय जनता पार्टी का विस्तारिक चलवा है
02:33माकाली के कलकते से नया संदेश आया है कि बंगाल में सियासत का सिक्का बदल गया है
02:48जनता पार्टी की सरकार होने जारी है पशिप मंगाल में राम राज आ गया
02:56भारति जनता पार्टी सरकार आपने देखा होगा गरीबों की पार्टी है महिलाओं के जब्स दुख की साथी है
03:04करें यह 50 साल के बाद आज यहां पर विजब का सरकार बना है दीदी का दादागिरी हुआ खतम
03:14को कोलकाता से सीली गुडी तक और मिदनापुर से आसन सोल तक जो हवा चली है उसने नरेंद्र मोदी और
03:21अमिट शा को राजनीती में अविजीत बना दिया है
03:34अंग बंग और कलिंग इस्त्री शक्ति का भरोसा बीजेपी पर है
03:43अंग बंग कलिंग एक प्रकार से पूरी बंगाल प्रेसिडन्सी आज भारतिय जनता पार्टी के द्वज के नीचे आ गई
03:53जीता कोई भी दिखा कोई भी लेकिन एक बात जो सनातन सत्ति के तरह स्थापित हो चुकी है
03:58कि बंगाल में उत्तर से दखिन तक पूरप से पश्शिम तक जी चाहे जहां हुई हो विजय के सूत्रधार नरेंद्र
04:06मोदी थे
04:21जब सांस्कृतिक विशाई पर जब सोचते हैं तो बुरुहत्तर भारत विशाल भारत ये भी आता है
04:29तो दीरे दीरे उनकी जो परिकल पना हैं पांच जार साल पहले की या वेद कालिन
04:37कि उन दिनों में आरिया वर्स था इंदुस्तान था भारत वर्स था और खंडित नहीं था
04:46तो ये खंडित नहीं होना चाहिए इसके लिए अखंड भारत होना चाहिए
04:53अब ये पुरानी जो सोच है वो केवल पुरानी नहीं है उनको वरतरमान में उनको ढालना है
04:59और वरतरमान में ढालने के लिए उनके पास चुनाओ का एक माध्यम है
05:04और भी माध्यम है लेकिन चुनाओ मुख्य रूप से है
05:07तो चुनाओ के दोरान इन प्रदेशों में और केवली नहीं प्रदेशों में नहीं बाकी सब जगह भी एक अखंड भारत
05:18के से जुड़ी हुई विचारदारा को आगे बढ़ाने का जो एक निश्चा ही है वो भारतिय जन्ता पार्टी के इस
05:28गोषणा में दिखाई देता है
05:37और सांस्कृतिक सामर्था के चरम पर था तो उसके तीन मजबुत स्तंब थे यह स्तंब थे अंग अंग यानि आज
05:52का बिहार बंग यानि आज का बंगाल और कलींग यानि आज का उड़िशा
06:03कलींग उस समय हिंद महासागर के समुद्री व्यापार का एक छत्र समरार था
06:13कलींग के बंदरगा पूरे एशिया तक भारत के उत्पादों को पहुँचाते थे
06:20भही अंग सूत रेशम और अन्य व्यापार के साथ साथ नालंदा और विक्रम श्रिला जैसे एजुकेशन सेंटर्स का भी हब
06:35था
06:36और बंग वो सांस्कूर्तिक धर्ती थी जहां से भारत की आत्मा के आवाज उड़ती थी
06:47विक्सित भारत के निर्माण के लिए इन तीनों स्तंभों का फिर से मजबूत होना बहुत आवशक है
07:02भारत में ऐसा कोई नेता नहीं जिसके पास देश के राजनितिक समिकर्णों को साधने की ऐसी कला हो
07:08तो ये सवाल तो अब खत्म हो ही चुका है कि नरेंदर मोदी की राजनिती उचाई कितनी है
07:13अब सवाल यहां से आगे बढ़ गया है और पूछा जा रहा है कि प्रधान मंत्री नरेंदर मोदी और अमिर्शा
07:19ने चुनाव के दौरान जिस अंग बंग और कलिंग का जिक्र किया था वो है क्या और भारत के विकास
07:25से कैसा रिष्टा है
07:33मैं जब भारत सम्रुद्ध था तब उसके तीन मजबूत स्थम्प्म थे
07:46अंग बंग और कलिंग अंग याने बिहार
07:55बंग यानी बंगार और कंग यानी कलिंग यानी ओडिशा ये तीनों स्थम्प कम्जोर हुए तो भारत के सामर्थ्व को भी
08:13जटका लगा
08:21राजनिती इशारों की भाषा होती है और इशारों की भाषा समझे तो प्रधानमंत्री और ग्रिह मंत्री के मुताविक भारत के
08:28लिए विकास का द्वार अब खुल गया है
08:31आज कहानी में ये जानने की कोशिश करेंगे कि अंग, बंग और कलिंग की अफधारना एतिहासिक रूप से क्या रही
08:38है और आज की राजनिती में इसका महत्तुर कैसे बदला है
08:41क्या बिहार, बंगाल और ओडिशा का ये त्रिकोण ग्वास्तम में भारत की पूर्वी राजनिती का नया पावर सेंटर बन सकता
08:48है
08:49एतिहासिक तौर पर मौरी काल से लेकर अब तक इन तीनों क्षित्रों का आर्थिक और रणीतिक महत्तुर कितना रहा है
08:56और सबसे बड़ा सवाल क्या ओडिशा के खनित संसाधन, बिहार की मानव शक्ती और बंगाल के बंदरगाह का कॉम्बिनेशन भारत
09:04की अर्थ हुरस्था को नई तिशा दे सकता है
09:06उन दिनों में वेद काल से लेकर रामायन काल तक महाभारत काल तक जो अंग बंग और कलिंग ये तीनों
09:16बड़े संबुद्ध थे
09:18नेवी का वहाँ बड़ा विस्तार हुआ था यानि नव से न और दूर तक उनका विस्तार था आर्थिक रूप से
09:27बंग की राजदानी एक कोताली परा नाम की जराजदानी थी आज कल तो वो ढाका में है
09:34वहाँ से ये सब सुरू होता था तो पूरी दुनिया में उनका वियापार चलता था उड़ी सामें आप देखिए जगनात
09:43की यात्रा ये धार्मिक है लेकिन केवल धार्मिक नहीं था वहाँ एक इस प्रकार की पूरी की जो व्यवस्ता थी
09:52आंतरिक व्यवस्ता राजदिक �
09:54व्यवस्ता इंफ्रास्ट्रक्चर उसमें भी उन लोगों ने दूर तक व्यापार व्यवसाई आर्थिक्टा इसका ख्याल रखा था और ऐसे ही लोग
10:07वहाँ शासंग कर दे था आज भारत जब विच्शीत होने के लक्ष के साथ आगे बढ़ रहा है तो आंग
10:17बंग और कलि
10:20बंग का मजबुत होना बहुत जरूरी है भारत का भाग्योदय के बिना अधूरा है तो आंग बंग और कलिंग ये
10:38सिर्फ इतिहास के शब नहीं बल्कि एक ऐसी सोच है जो अतीज से निकल कर आज की राजनीती और कल
10:45की विकास तक जाती है
10:49नरेंद्रमोदी ने जिस त्रकोण की बात की वो दरसल पूर्वी भारत की ताकत को एक साथ जोडने की कोशिश है
10:55अब सवाल है भविश्य का क्योंकि इस त्रकोण ने देश की तकदीर को पहले भी लिखा है
11:15अंग आज नक्षे में नहीं है लेकिन इतिहास में एक पहचान थी
11:19बिहार के इस धर्ती ने कभी भारत की दिशा तै की थी व्यापार, संस्कृति और शक्ति के दमपर
11:25महा भारत से लेकर सामराज्यों तक अंग हर दौर में मौजूद रहा आज भले ही नाम बदल गया हो लेकिन
11:32पहचान अब भी जिन्दा है
11:40अंग एक ऐसा नाम जो आज नक्ष में नहीं दिखता लेकिन इतिहास के हर पन्ने में तर्ज है
11:46बिहार का हिस्सा महा भारत की कहानी और प्राचीन भारत की ताकत
11:53हम अंग बंग कलिंग की बात करते हैं तो आज तो पांच प्रदेसों की बात महा भारत काल में पुराणों
11:59में आती है
12:00और ये कथा आती है कि महाराज बली के पांच पुत्रों है
12:07उन पांच पुत्रों के नाम से पांच जनपद स्थापित हुए
12:18पांचों पुत्रों के नाम ही थे अंग, बंग, कलिंग, पुन्डु और सुहिया
12:25इसमें अंग, बंग और कलिंग
12:28ये बाद के दिनों में भी एक महाजनपत के रूपे, एक प्रादेशिक भूमी के रूप में
12:42ये है आज का बिहार, लेकिन हजारों साल पहले इसी धर्ती पर बसा था एक शक्तिक शाली महाजनपत अंग
13:02गंगा के दक्षिन में फैला ये इलाका आज के भागलपूर, मुंगेर और आसपासक ख्रेत्रों तक सिमित माना जाता है
13:11अंग प्राचीन भारत के 16 महा जनपतों में से एक था, वो दौर जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में बटा
13:18था और हर राज्य अपनी ताकत बढ़ाने की होड़ में था
13:21अंग भी उनी में से एक मजबूत, सम्रिद्ध और रणितिक रूप से बेहत एहम जनपत था
13:31अंग की राजधानी थी चमपा, चमपा से हुई चमपा नगर और आज की चमपा नगर की ये तस्मीर है
13:36गंगा किनारे बसा ये शहर उस व्यापार का बड़ा केंदर था
13:48यहां से कपड़ा, मसाले और कई तरह के सामान सिर्फ भारत में नहीं दुनिया भर में भीजे जाते थे
13:55यहां पर जिसके लिए भागलपूर मशूर है यानि भागलपूरी सिल्क उसके भी बहुत सारे जुबंगर में वो यहां पर रहते
14:02हैं
14:11यह कोलिटी स्द्सर का दोपट्टा बोल रहे हैं वह साजी तो यह क्वालिटी स्नथर और भागलपूरी सल्क एक ही होता
14:17है या अलजलग होता है या एक होता है थोड़ा अधा सफर ढूर्जित कर दो अब्र कोलेटी होता है क्वाश्ट
14:26तरस नहीं फास्ट शिकान थान इस �
14:40अंग प्रदेश भागलपूर से लेकर आपको जार्श गुंडा तक फैला हुआ था और इधर मुर्शिदावाद के सीमा को भी छूता
14:51था
14:52अंग प्रदेश का जो सबसे बाहु बली या कही उसको राजा हुआ सम्रिद्र सासक वा उसका नाम ब्रह्मदत था
15:04मगज का जब इंपिरियल पावर का विकास वा सक्ति का विकास वा तो उसने सबसे पहले अंग को जीता
15:10इस टेरिटोरी को मिलाना जरूरी था क्योंकि इसका जो बानिज बैपार का सबसे बड़ा जेगा था और चमपा एक बंदरगा
15:21के रूप में उभर रहा था उस पर उसका कबजा करना था
15:24इसलिए उसने अंग को मगध में मिला लिया और बानिज बैपार जहां होगा वहां किर्शी कार्ज भी होगा यहां छेतर
15:34किर्शी कार्ज के लिए भी समुननत था किर्शी कार्ज होता था और बानिज बैपार यहां के लिए ठाहड़ा का बहुत
15:41बड़ा के अंदरगा नदी
15:54राज्जी नहीं बलकि आर्थिक हब बन चुका था इतिहासी नहीं पौरणिक कथाओं में भी अंग का बड़ा जिक्र मिलता है
16:04महभारत में कर्ण को अंग का राजा बताए गया है आज दानवीर कर्ण की पहचान के साथ अंग का नाम
16:10भी अमर हो गया है बीरता दान और स्वा�
16:13विमान का प्रतीक बंकर ये ध्यान में आता है कि अंग यो है वह पहले मगद्र वहां जनपत के अधीन
16:25था जरासंद के सासन के अधीन था बाद की दिनों में दुर्योधन को जरासंद ने इसको सौपा था
16:41इसलिए जरासंद दुर्योधन का उस पर अधीकार था वह हस्तिनापुर सामराज्य का हिस्सा नहीं था
16:49अता ये कथा आती है कि जब कर्ण के समक्ष शहत्री और राजा होने का प्रस्नाया था
16:56हम सब जानते हैं कि दुर्योधन ने उसे अंगधेश का राजा गोशित करके या था क्योंकि दुर्योधन का वह चेतर
17:04था दुर्योधन को किशी को देशकने का अधीकार था था हस्तिनापूर का हिस्सा नौर के घर्ण
17:10और अंग के सैनिकों का महावारत के युद्ध में बड़ी भूमी का भी है लेकिन अंग का इतिहास सिर्फ सम्रिधी
17:20का नहीं संखर्ष का भी है इसका सबसे बड़ा प्रतिद्वन्दी था मगद कई युद्ध हुए और आखिरकार मगद के राजा
17:27बिम्बिसार ने अंग को ज
17:38ये क्षेत्र पुर्शासन और व्यापार का एहम केंदर बना रहा गंगा के किनारे होने से क्रशी और व्यापार दोनों फलते
17:46फूलते रहें
17:48अंग भागलपुर को केंदरित करते हुए जिसकी अंग महाजनपत की राजधानी उस कालखंड का चंपा था जिसका विस्तार आज चंपा
18:01रण्ये तक थोड़ा जाता हुआ दिखाई देता है
18:05और वज्जी छेत्र में भी विस्तरित होता है भासिक समानता के आधार पर इसको समझाया सकता है अर्थात विहार का
18:13एक बड़ा हिस्सा आज आधुनिक विहार का बड़ा हिस्सा और जारखंड का भी एक हिस्सा अंग देश में आता था
18:22विहार के एक बड़े हिस्से को मग�
18:24मगद के रूप में जाना गया है, मगद यानी कर्मनासा के उस पार, जो आज भी उत्तर प्रदेश और विहार
18:32की सीमा बनाती है और पाटली पुत्र तक गंगा के किनारे तक, यह मगद है, मागद ही यहां की भासा
18:40है, अब अंग और मगद इन दोनों को मिला करके आज का आधन
18:46अंग सिर्फ सत्ता और व्याबार तक सीमित नहीं था, इसकी अपनी एक अलग सांस्कृतिक पहचान भी थी, यहां बोली जाने
18:54वाली अंगी का भाषा आज भी इस क्षेत्र में जिंदा है, लोग गीत, मेले और परंपराएं सब में झलकता है,
19:01हजारों साल पुराना इतिहा
19:03भागलपूर को आज सिल्क सिटी कहा जाता है, रेशमुद्योग की ये परंपरा कोई नई नहीं, बलकि प्राचीन अंग काल से
19:10चली आ रही है, यानि इतिहास आज भी यहां की अर्थ्वियस्था में सांस ले रहा है
19:21भागलपूर एक बहुत प्राचीन, एक बहुत ही खूपसूरत शहर है, जिसका अपना एक ऐसा इतिहास है, जहां पर पौरानिक कथाएं
19:29भी हैं, और ये देखिए, ये जैसे मंजुशा आर्ट आप यहां पर देख रहे हैं
19:35मंजुशा आर्ट जो है वो अंग प्रदेश की पहचान है, क्यों ना हम आगे बढ़ते हुए आपको कुछ ऐसी जगे
19:41लिए चलें जहां पर ये पेंटिंग्स बनाई जाती है, अभी हाला कि मुझे लग रहा है कि ये भी कैन्वस
19:48अधूरा है, दो हिस्सों में हुआ है और �
19:51अभी पेंटिंग बाकी है, नाम कहां से आता है मंजुशा एक बहु मंजलिये नौका है, जिसमें सती बिहुला अपने मिर्थ
20:07पती को रखे, देव सकती को चिनौती देकर सुरग गई और अपने मिर्थ पती और छे भैसूर को जिवित कर
20:15लाई, तब से ये मंजूसा, पती क
20:18बड़े भाई, जेठ जिनको कहता है, और वो जब वहां से सब को जिवित कर लाई, तब यहां पर एक
20:25खुशी का महल हुआ, और बिहुला का जे जेकार हुआ, बिहुला सती कहलाई, तब भगवान सिब के आदेश पर, चंदरधर
20:34सावदागर, माम मंसा का पूजा किये, और �
20:37यहां पर एक लोग परवी की सिरुवा थी, बिहुला बिशहरी, और मंजूशा कला, यहां कि लोग परवी, बिहुला बिशहरी पाधारित
20:43लोग कला, वो पारंपरी कला है, जिसे एस्या की पहली कथा चित्रमानी जाती है,
20:58जैनरली हम लोग मधुबनी पेंटिंग के पारे में जाधा सुनते हैं, इसलिए लेकिन यह मंजूशा बिलकुल अलग कला है, पस्तिनी
21:06कलर है, जी, तीनी कलर होता है, एक पेंटिंग में इस तमाल, अच्छा,
21:18मतलब अब आप लुक विस्तार कर रहे हैं, अलग अलग चीजों पे भी इसको बनाते हैं, सारी हुआ, टेबर कलाउथ
21:25हुआ, आपका कोवर बनता है, वह बनाते हैं, अच्छा, अब तो साधिव जहां, जिसे साधिम जाते हैं नहीं तो गिप्त
21:33ही करते हैं, पेंटिंग ही �
21:34मन्जुशा पेंटिंग ही आज अंग कोई अलग राज्जी नहीं है, लेकिन इसकी पहचान आज भी कायव है, बिहार के इस
21:51हिस्से में इतिहास और वर्तमान साथ साथ चलते हैं,
21:59जहां अतीत की विरासत आज की विकास की नीव बनती है, जब आज राजनीती में अंग बंग और कलिंग की
22:05बात होती है, तो उसमें अंग का नाम इसलिए शामिर होता है, क्योंकि ये ख्षेत्र कभी पूर्वी भारत की ताकत
22:11का केंदर रहा है, एक ऐसा इलाका जिसने इतिह
22:17अतीत में जब भारत सम्रुद्ध था, तब उसके तीन मजबूत स्थम्प्म थे, अंग, बंग और कलिंग
22:37आजंग सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ताकत, संस्कृति और संघर्ष की कहानी है, इतिहास के पन्नों से
22:46निकल कर, आज भी हमें ये अपनी जड़ों की याद दिलाता है
22:57बंग, सिर्फिक राज नहीं, बल्कि इतिहास, विचार और व्यापार की ताकत है
23:03पर्शम मंगार से लेकर पूरे प्राचीन बंग शेतर तक इस धर्ती ने देश को दिशा भी दी है और द्रिश्टी
23:09भी
23:10कभी ग्लोबल ट्रेड हब रहा ये लाखा, आज फिर नई संभावनाओं के केंद्र में
23:20अंग, बंग और कलिंग, इतिहास का वो त्रिकोन जिसने कभी हिंदुस्तान की तकदीर लिखी
23:34बंग वो सामराज्य था, जहां से चली सोच, जहां से उठा विरोध, और जहां से बनी देश की दिशा
23:48ये आज का पश्शिम मंगाल, लेकिन कहनी इससे कहीं बड़ी है, क्योंकि इतिहास में यही लाखा बंग था
23:54एक ऐसा अक्षेत्र जो सिर्फ नक्षे पर नहीं, बल्कि भारत की पहचान में बसता था
24:09अर बंग वो सांस्कृतिक धरती थी, जहां से भारत की आत्मा की आवाज उड़ती थी
24:30आज का बंगाल और उससे कहीं बड़ा था प्राचीन बंग, जहां आज है भारत और पांगलादेश, कभी एक ही सांस्कृतिक
24:38खेत्र था
24:41संब्रिद्ध था, ताकतवर था और असरतार था, गंगा, ब्रह्मपुत्र और उनका विशाल देल्टा
24:49यह वही जमीन है जिसने बंग को बनाया, जो भारत का सबसे उपजाओ इलागा था
24:54खेती ऐसी कि पेट पूरे ख्षेत्र का भरता था और व्यापार ऐसा था कि दुन्या तक बंग की चर्चा होती
25:01थी
25:01एक तो कारण जीओपोलिटिकल था और जीओ बहगोलिक भी था जो एक प्रकार से वहां का जो सीमा विस्तार है
25:14वुझ विस्तार बहुत बड़ा है, वहां से काफी देशों में जाना संभव था
25:22काफी प्रदेशों में जाना भी संभव था
25:25तो आज तो हम किवल बंगाल याने हमारे पास जो छोटा सा टुकड़ा है वो वास्ता में वो इतना नहीं
25:34था पूरा बंगाल था
25:35और उसके साथ जुड़ा हुआ था आसम भी उसके साथ अलग प्रदेश भी जुड़े हुए थे तो एक बड़ा बंगाल
25:42था
25:43और वड़ाका हो या कॉलकत्ता हो या फिर वो तो अपने पूरा नए नाम है लेकिन पूराने नाम मैंने जो
25:50बताए इस प्रकार की बंगाल की जो रचना थी वो शाशक की अद्रिश्टी से एक बड़ा प्रभावी डंग से काम
26:02करती थी
26:05समुद्र से कनेक्शन बंग की सबसे बड़ी ताकत थी एक दो नहीं कई बंदरगा थे जहां से निकलते थे जहाज
26:12सीधे दक्षिन पूर्व एश्या तक
26:14मतलब साफ है कि बंग उस दौर का ग्लोबल ट्रेड हब था बंग सिर्फे की लाका नहीं था येक सिस्टम
26:21था जहां खेती व्यापार और संस्कृती तीनों साथ साथ दोड़ते थे
26:28जिसकी जलक आज कुछ धुन्दली नजर आने लगी है
26:39अन्रेजों के दौर में बंग सत्ता का सेंटर था कोलकाता तब का कलकत्ता था और बिटिश भारत की राजधानी बन
26:46गया और यहीं से चलता था पूरा हिंदुस्तान
26:52लेकिन बंग यानी पंगाल सिर्फ सत्ता नहीं सोच भी देता है यहीं से उठी क्रांती की लहर जहां से बदली
27:00सोच बदला समाज और बदला देश
27:06आजादी की लड़ाई में बंग सबसे आगे था
27:08क्रामतिकारी आंदोलन हो या जन आंदोलन
27:11हर बार बंग ने दिखाई रह
27:16बंग का मतलब रंग, राक और रस
27:21दुर्गा पूजा, संगीत, साहित
27:27यहां हर चीज में एक अलग ही जुनून है
27:30आज राजनिती की वज़ा से बंग विकास में थोड़ा पीछे है
27:33लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच
27:36बंग को एक बार फिर से बहतर बराना है
27:39पोर्ट, इंडस्ट्री और कनेक्टिविटी, यहां सब कुछ मौजूद है
27:42कभी देश के अर्थोय अस्था में बंग का बड़ा रोल था
27:45पी-म फिर से वही चाते हैं
27:59अंतरराश्टी सीमा से सटा ये इलाका
28:01सुरक्षा से लेकर व्यापारतत हर लिहास से एक गेम चेंजर है
28:11कलिंग जहां इतियास न सिर्फ एक राज नहीं बल्कि एक सोच को जन दिया
28:15आज का उदीशा कभी समुद्री ताकत, व्यापार और परिवरतन का केंद था
28:20कलिंग युदे ने एक समराठ को बदल दिया और उसी धर्ती ने भारत को एक नई दिशा दी
28:38कलिंग एक ऐसा नाम जो सिर्फ इतियास का हिस्ता नहीं बल्कि भारत की पहचान का एहम अध्याय है
28:50आज का उडिशा लेकिन कलिंग की कहानी सिर्फ उडिशा की नहीं है
28:55कुछ हिस्सा आज के आंध्रपरदेश का भी था
29:06इतियास में यही लाका कलिंग कहलाता है
29:08एक ऐसा क्षेत्र जिसने युद्ध भी देखा और बदलाव भी
29:17ये है आज का उडिशा लेकिन हज़ारों साल पहले इसी धर्ती पर बसा था शक्तिशाली कलिंग
29:24समुद्र किनारे फैला हुआ रणीती तौर पर बेहत एहम और व्यापार के लिहाज से बेहत सम्रिद
29:32समुद्र पर सासन जो करेगा वो पूरी दुनिया जीतेगा ये एथिहासिक तक्तिए
29:40कलिंग को याद करना यानि समुद्र की लहरों पर सासन करने वाले सासों की महान परमपरा को याद करना है
29:49साथ समंदर तक व्यापार कर सकने वाले उन महान व्यापारियों को सार्थवाहों को याद करना है
29:58कलिंग भारत के दुनिया के साथ होने वाले व्यापार का द्वार था
30:05कलिंग की सबसे बड़ी ताकत थी इसका समुद्र से चुड़ा
30:09लंबा समुद्री तट और उससे जुड़ा व्यापार
30:11यही वज़त थी कि कलिंग सिर्फ भारत में नहीं
30:14बलकि दक्षिन पूर्व एश्या तक अपनी पहचान बना चुका था
30:18यहां से निकलते थी जहाज जो जाते थे श्रिलंका, इंडोनीशिया, म्यामार और थाइलेंड तक
30:24मसाले, हाथिदांत, कपड़े और कई कीमती चीजें कलिंग को बनाती थी उस दौर का एक बड़ा क्लोबल ट्रेड हब
30:36लेकिन कलिंग की कहानी सिर्फ यापार तक सीमित नहीं है, यह कहानी है उस युद्ध की जिसने पूरे भारत की
30:42दिशा बदल दी
30:46करीब 261 इसा पूरू, एक शक्ति शाली राजा थे समराट शोक, उनका सामराज्य लगातार बढ़ रहा था
30:54अंग और बंग प्रदेश को जीतने के बाद अब उनकी नजर थी कलिंग पर, कलिंग एक मजबूत और समरिध राज्य
31:02था, जो आसानी से जुकने वाला नहीं था
31:06युद्ध शुरू हुआ और इतिहास की किताबें बताती हैं कि बहुत भायानक युद्ध हुआ
31:14तलवारे थकराई, सैनिक भिड़े, हर तरफ चीख पुकार मजगई, हजारों नहीं, लाखों लोग पर गए, हजारों घर उजड़ गए, परिवार
31:23बिखर गए, आखिरकार अशोक ने कलिंग को जीत लिया
31:31जीत अशोक के नाम हो गई, लेकिन जब युद्ध के बाद अशोक मैदान में पहुँचे, तो उन्हें चारों तरफ सिर्फ
31:37तबाही नजर आई
31:38घाय लोग, रोते हुए बच्चे, अपनों को खो चुके परिवार, अशोक ये सब देख कर अंदर से हिल गए, उन्हें
31:46समझ आया, कि ये कैसी जीत है, जिसमें सिर्फ दर्द और फिनाश है
31:50कहते हैं, यही वो पल था, जब एक योध्धा पदलने लगा, अशोक ने तै किया, कि अब वो तलवार से
31:56नहीं, शांती से राज करेंगे
31:58उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया, और बौध धर्म को अपनाया
32:05जो नहीं था वेद में, वेसे स्लोक उनमें सामिल कर दिये गए, और इसकी आधार पर कुछी लोगों का अधिकार
32:19ज्यादा और बाकी सब का नहीं, ऐसा कहा गया, इस तरी को वेद नहीं पट्रकती, अरिजन वेद नहीं पट्रकता, केवल
32:29ब्रामनों का ये अधिकार है, ये
32:31सब था नहीं, वेद दर में कभी नहीं था, बाद में दीरे दीरे अलग अलग जो वेस्टेर इंट्रेस्ट वाले स्थापित
32:38वाले लोगों थे उन्होंने ये गुशा दिया, स्लोक उते थे और संस्क्रीट थे सामानी आद्मी को तो आती नहीं थी,
32:46इसलिए सामानी आदमी म
33:00जाता है बहुत दर्म इसी प्रकार कांदोलन था यानि कलिंग की धर्ती पर हुआ ये युद्ध सिर्फ एक जीत हार
33:08की कहानी नहीं था बलके एक राजय के दिल और सोच के बदलने की कहानी बन गया जिसने इतिहास की
33:14दिशा बदल दी यहीं से शुरू हुआ परिवर्तन यु�
33:30समुद्री व्यापार, खनी संपदा और रर्णीतिक स्थिती तीनों ने इसे हमेशा खास बनाये रखा
34:00वो स्री लंका में, जावा में, सुमात्रा में, बरमा में, शाम में सरवत्र प्रसरीत होता हुआ दिखाई देता है और
34:12इसलिए कलिंग की जो लिपी है उसे लिपी के असर में दिखाई देते हैं
34:19आज का उडिशा यानि प्राचीन कलिंग देश के सबसे अधिक खनी संपन राज्यों में से एक है लौह अयस, कोईला,
34:27बाकसाई ये सब यहां प्रचूर मात्रा में मिलता है यानि जहां एक तरफ इतिहास है वहीं दूसरी तरफ भविश्य की
34:35संभावनाए भी
34:37कलिंग की पहचान सिर्फ युद्ध और व्यापार नहीं इसकी संस्कृती भी उतनी ही सम्रिद्ध है पुरी का जगरनात मंदिर, रत्यात्रा
34:44और सधियों पुरानी परंपराएं ये सब शेत्र की आत्मा है जहां की कला, वित्य और परंपराएं आज भी उसी कौरव
34:53की कहनी
34:54कहती हैं, जो हजारों साल पहले शुरू हुई थी
35:01आज जब विकास की बात होती है, तो अडिशा यानि कलिंग फिर से चर्चा में है, पोर्ट्स, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और
35:08इंफ्रस्ट्रक्चर, ये सब इसे पूर्वी भारत का पावर हाउस बना सकते हैं
35:17रणीतिक तोर पर भी ये इलाका बेहत एहम है, समुद्र के रास्ते व्यापार और पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी
35:23आज जब अंग बंग और कलिंग की बात होती है, तो इसमें कलिंग का जिक्र इसलिए जरूरी है, चूंकि ये
35:30त्रिकोन सिर्फ इतिहास नहीं, बलकि भारत के भविश्य का ब्लूप्रिंट भी माना जाता है
35:40फिलाल कहानी हैं बस इतना ही, अगले हफ्ते फिर हाजर होंगे एक नई कहानी के साथ, तब तक देखते रहिए
35:44आज तक
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