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  • 2 months ago
अंधकार और मौन में माया का साम्राज्य -गुलाब कोठारी

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00:02नमस्कार मैं श्वेता दिवारी आप सभी का अभिनंदन करती हूँ आईए आज आपको सुनाती हूँ राजिस्थान पत्रिकार की प्रधान संपादत
00:10विद्या वाचसपती गुलाक उठारी जी का शरीर की ब्रह्मान श्रिंखला में पत्रिकायन में प्रकाशित आले जिसका �
00:18अंदकार और मौन में माया का सामराच्य ब्रह्म निराकार है रित सोम है रित से स्रिष्टी नहीं होती मात रिश्वा
00:27वायुद्वारा सोम की अगनी में आहुती दी जाती है प्रथम सत्य विवर्त अव्यपुरुश बनता है ब्रह्म और माया का अर्द
00:35नारिश्वर रूप
00:54maya
00:56maya
01:00maya
01:01maya
01:02maya
01:03maya
01:04नहीं प्रकाश, अतहर सारे तत्ल, शब्द, शुनिय, धरातल पर ही कारे करते हैं। ब्रह्म और माया, निराकार और गुनाती तवस्था
01:13में हैं। जहां कोई ज्यान, अज्यान, प्रकाश, अंधकार या ध्वनी मौन का भेद नहीं है। के लोप निशत शुति के
01:20अनुसर वह
01:34ना विद्मो, ना विजानिमो, या थेतत अनुशिश्यात। ब्रह्म और माया के मूस्वरूत में कोई ध्वनी या वाक नहीं है। शब्द
01:42तों आकाश तत्व से उत्पन्य होता है, जो माया की एक अभिश्यक्ति है। ब्रह्म का मौन शब्द शुन्यता नहीं, बलकि
01:49पू
02:03अभिव्यक्त करते हुए कहती है, यतो वाचो निवर्तंते अप्राप्य मनसास अर्थात, जहां से वाणी मन के साथ लौट आती है,
02:12मौन सकारात्मक और नकारात्मक, दो दिशा में विचारों के प्रवाह को ले जाता है। यह व्यक्ति की प्रकृति वातावरन पर
02:19निभर क
02:32मौन शब्द का आत्मा है, सुप्षम शरीर में ले जाता है, व्यक्ति की वहाँ विचारों की गती तेज और गहन
02:40हो जाती है, बाहर से संपर्क कट जाता है, स्वयम से बात करने का माथ्यम है मौन, शब्द शरीर का
02:47क्षेत्र है, मौन, मन का और शब्दातित अवस्था आत्
02:52कारण शरीर आत्मा का धरातल है, वहाँ भी अंदकार है, संपून स्ष्टी मौन से अंदकार से शुरू होती है, सूर्य
03:00रात्री के अंदकार से निकलता है, जन्म भी मौन है, मौन माया की खिट्र का प्रवेश द्वार है, शब्द और
03:08मौन एक ही केंद्र से उठते हैं, श�
03:15चारभी स्वयम पर गहनता से केम्रित होते जाते हैं.
03:19शब्दातीत अवस्था हैं, जैसे अंधकार की गर्भ में ही प्रकाश रहता है, वैसे शब्द के गर्भ में ही मौन रहता
03:26है, इसी शब्दि से श्राप और बढ़्दान दिया जाता है.
03:29Mohan की साधना से ही जीवात्म का सूतर ब्रह्म से जुड़ता है
03:33यही महत ब्रह्म का क्शेत्र है जिसे कृष्ण अपनी योनी कह रहे हैं
03:38तस्मिन गर्भं दधाम में हो
03:40माया के एक शरीर से दूसरे शरीर में जाने का मार्ग महत लोग ही है
03:44मण्यागनी की यत्रा में सुर्य परजन्यम प्रित्वी शरीर के मह लोग में ही माया प्रवेश करती है
03:51प्रंव माया का क Souls कोकैरते सिट्व ऊबरेत रहता है
03:58प्रृमयन सर्व भूतान रूडान यंद्रा रूडनी, माया, विश्व की आकरतियां माया निर्मित भी होती है
04:19ॐ ॐ ॐ
04:44आगे चलकर उसका शिक्षन उसे बुद्धिमान भी बनाता है
04:48शरीर और बुद्धी दोनों ही आक्रामकता के साथ तथा एहनकार के पोशक तत्वत बन जाते हैं
04:55मन से कमजोर भी है और समवेदना की अलपिता भी एक पौरुशय रक्षन रहता है
05:00कमजोर मन होने से पौरुश भीतर संकल्प वान कम ही होगाता है
05:05उसके संकल्प पौरुशय अधिक होते हैं
05:08मन पर इस्त्री का सामराज्य अधिक होता है
05:10इस्त्री सौम्या है, मन सौम्या है
05:12दोनों का ही पोशन भी सोमराजा चंद्रमा से ही होता है
05:16dousari or who wei para、
05:18mayas he,
05:20yω khi vishtham to
05:30eek maatri brahm ka hi ho ta hai,
05:32uusi ka dahid pasa hai,
05:33istri ke anta dh hai,
05:35isri ka sanchanan bhi
05:37pan cam ting haadik rahtai,
05:38awapati ke saad bendhi rhanati hai,
05:40atah pranamayi koush
05:42aur akshar k e dharatal par hi jiti hai,
05:44Puraš ke leye šarir hi pradhaan gartta hai
05:47Istri Puraš ke saat antrangh bhaav me jiti hai
05:50Dek ke sambandh pittri greh me chhut jatai hai
05:53Tampatya bhaav me puraš šarir se jitata hai
05:55Tathah istri man se jiti hai
05:58Bheitar Purašwat Sankalpavan bhi hooti hai
06:01Ataha, her istititi me vahhi sanjali ka bani rheti hai
06:05Puraš me aahut honne ke liye aati hai
06:07Vivarth banane ki bhumi ka me
06:09Maya Brahm ki shakti hai
06:11Pathisvaruak me bhi vah Maya rup shakti hai
06:14चुकी Maya के सभी कर्म अंधिकार में होते हैं
06:17और preparedness निश्पन किये जाते हैं
06:19अगर Istri रूप में Maya की दिव्यता गौन रह जाती है
06:23यहां पुरुषमि यदि अपने Maya भाव को समझता है
06:26वहाः siistití दूसरी हो जाती है
06:28उसे Istri के के गर्भ में
06:30Brahmya दिखाई देता है
06:44Bhramr ko Purush Shariar Se Swayam Ki Shariar Me Laakar Pratishtit Karna,
06:47Parivar Ke Anurup Sanskarit Karke Somp Dena,
06:50Yeh Sabhi Kare Bhi Anandakar Me Hini Sampan Hote Hake.
06:54Mauna Ki Istiti Me Puriar Ko Bharag Bhi Nahi Pardti
06:56Ki Maaya Uski Shariar Se Kya Chura Kar Lengi?
06:59Uska Jeevaanish Bhi Brahmaanish Ke Saat Gaya,
07:02Drono Ke Kriyao Ke Rakshya Bhinne Raha Teh Hai.
07:04Maaya Rupi Istri,
07:06Apeni Dhe Se Jeevaatma Ke Liyye Naye Dhe Ka Nirmand Kerti Hake.
07:09Kone Dekh Paata Hai?
07:10Jeevaatma Me Eek Pita Ka Ainsh Ho Ta Hai,
07:13Dousra Aane Waala Aatma Ka.
07:15Naya Jeeva Ki Shariar Ko Chhoڑ Kar Aaya,
07:17Usi Anusasar Shikshit Karke Pariwari Me Jee Nae Rayaak Bunaatii Hai.
07:21Aaj Chuki Istri Nae Aapna Yeh Kare Bhandi Kar Diyaya Hai,
07:24Atah Naya Jeeva Bhi Puraane Sanskaro Ke Saathe Naye Dheh Me Prawesha Kar Jata Hai.
07:29Vyaisa Hii Samaaj Ka Svaroop Ban Jata Hai,
07:32Jaisa Aaj Charao Orr Dikhaai Deta Hai.
07:34Namaskar.
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