00:05ये कोई फिल्म की कहानी नहीं है ये उस इंसान की सची दास्ता है जिसे लोग एक वक्त पर सीधा
00:12कह दिया करते थी कि तू हीरो बनने लाइक नहीं है और तू ये नहीं कर सकता
00:16दिल्ली की गलियों में चोकीदारी करने वाला लड़का मॉंबई पहुचता है और मॉंबई में भीड में कहीं खो जाता है
00:23लेकिन उसे जैसे ही कोई जगा मिलती है तो वो दिखना शुरू होता है और आज वो ही लड़का मॉंबई
00:28की पूरी सोच बदल चुका है और बॉलि�
00:46हम बात कर रहे हैं नवाजुदेन सिद्धिकी की नवाजुदेन की शुरूआत की बात करें तो वो बहुत आसान नहीं थी
00:52मुंबई की भीड में उन्हें बहुत चोटे चोटे रोल शुरूआती दोर में मिले जिने अकसर लोगों ने नूटीस भी किया
00:58सरफरोश और मुन्न
01:11से दूर तक कहीं फिट नहीं बैठते थे लेकिन उन्होंने कभी खुद को बदलने की कोशिश नहीं की ना फेक
01:17हीरो बनने की कोशिश की ना ही स्टाइल कॉपी करने की बस फोकस था एक्टिंग पर उन्होंने किरदार को समझना
01:24शुरू किया उसे फील किया और स्क्रीन पर �
01:26जी कर दिखाया साल 2012 में आई गेंक्स ओफ वासिपुर की बात करें तो वो उनकी करियर की टर्निंग पॉइंट
01:33बनी फैजल खान का किरदार जैसे ही सामने आया उसने इंडस्ट्री का पूरा नजरिया ही बदल दिया आप बॉलिवूड को
01:40समझा गया कि एक्टिंग सिर्फ ल�
01:53दिमाग से नहीं निकाल पाए हैं नवाज दिन आज भी एक्टिंग के मास्टर कहलाते हैं वो सिर्फ डायलोग नहीं बोलते
02:00बलकि किरदार को अंदर से जीते हैं उनकी आखों के एक्सप्रेशन बॉड़ी लैंग्वेज और साइलेंस एक आलगी कहानी कहती है
02:06एक बार नव
02:21लांसाद से एक अइक्टर नहीं बलकि कम मोटिवेशन है उन्हों निसाबद कर दिया है कि बॉलिवुड में अब वरस
02:26सिर्फ फेस से नहीं बलकि टैलेंट से तै होता है इसके साथ ही उन्होंने बताया कि असली स्तार वो नहीं
02:32होता जो परफेक्ट दिखे बलकि वो होता है जो किरदार को सच में बना दे आज नवाज बॉलिवुड की उस
02:37पॉजिशन पर बैटे हैं जहां पोचने में कई बरस ल
02:56झालना का जबड़ से साथ हो उन्होंने फॉलिवू प्रहित की बाता है जह झालना को उन्होंने से, लिए जालना के
03:05लाज़ होता है
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