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कश्मीर घाटी की शांत जिंदगी से आतंक की दुनिया तक का सफर—यह कहानी है फ़ारूक़ खान उर्फ ‘सैफ़ुल्लाह’ की, जिन्होंने वन इंडिया' के साथ इस सनसनीखेज़ इंटरव्यू में कई बड़े खुलासे किए हैं। 1986 के कथित धांधली वाले चुनावों के बाद कैसे हालात बदले और पाकिस्तान व ISI ने युवाओं को आतंक की राह पर धकेला, इसका जिक्र इस इंटरव्यू में किया गया है। फ़ारूक़ खान ने बताया कि किस तरह अलगाववादी संगठनों ने कश्मीरियों को इस्तेमाल किया और हिंसा का जाल फैलाया। यह कहानी सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि आज के हालात को समझने की एक अहम कड़ी भी है।


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~PR.338~HT.408~GR.510~

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00:001980 के आखरी सालों में जब जमू कश्मीर पे आतंग के बादल मंड़ा रहे थे तो हजारों यूवक यहां से
00:08पाकिस्तान चले गए आमस ट्रेनिंग के लिए
00:10और ऐसी एक यूवक थे फारुब एहमद खान जिनका कोड नेम सैफला था
00:17जानते हैं उनसे उनी का सफर उनी की जुबानी इस वन इंडिया एक्स्प्लोसिव इंटर्वियू में
00:30तो फारुक सब आप से जाना चाहेंगे कि आपका सफर कैसे रहा बंदोग से सियासत तक आप क्यूं मजबूर हुए
00:42बंदोग उठाने के लिए
00:45देखिए अब मैं जादा गहराई में नहीं जाओगा सबसे पहले मैं अल्ला के शुपर का अदा करता हूँ
00:51कि अल्ला ने मुझे जिन ना रखा बंदोग उठाने के मावजूद भी ये बंदोग नसले तबाह कर देती है ये
00:59बंदोग पूरी दुनिया में आग लगा देती है आपकी वसातत से मैं उन लोगों से कहना चाहूँगा जिनके कंदों पर
01:08बंदोगे हैं
01:09कि मेरे भाईयो इस बंदोग को तरक कर दो ये बंदोग किसी बात का सिलूशन नहीं है किसी बात का
01:19हल नहीं है आप कोमी दाएरे में आओ अगर आपका कोई मसला है आप बैट कर बात करो ये बंदोग
01:55इसी के साथ मैं कुछ और भी जोड़ना चाहूंगा जो इसलाम वजूं के अंदर
02:00पानी कम खरच करने के लिए कहता है
02:02वो इसलाम किसी बेगुना का खून बहने के लिए कैसे जाज़ा दे सकता है
02:09तो जब आपने आम से लिए और जब आपने हथियार उठाए
02:14तब ये सोच नहीं आए आपको कि नहीं शायद ये गलत रास्ता है
02:19क्या भुजवाथ रही कि आपको बंदूक उठानी पड़ी
02:23देखिये मैं यही कहूंगा कि ये मेरी बदकिस्मती थी कि मुझे बंदूक उठानी उठानी पड़ी
02:29क्याश के नाइटी एटी सिक्स का अलेक्शन ना हुआ होता तो शायद कश्मीर के अंदर बंदूक नहीं होती
02:33मैं उस अलेक्शन की तरफ भी नहीं जाओंगा
02:35मैं किसी की मुखालफत नहीं करना चाहता हूँ
02:38मैं चाहता हूँ कि मेरी कौम अमन और इन्सानियत के रास्ते पर आए
02:42और तरकी की तरफ जाए और एक दूसरे के जखमों पर मरहम लगाए
02:49देखिए बंदूक मैं आपसे ये कहना चाहूँगा कि कुछ ऐसे शातिर हजरात कश्मीर के अंदर थे
02:55लोग थे जिन्हों ने अपने आपको इंटरनेशनल हीरो बनाने के लिए हम जैसे
03:00मासूम बच्चों का इस्तमाल किया और वो खुद हीरो इंटरनेशनल हीरो बन गए
03:05और जिकर उसके अंदर नाम गिलानी साब का सुना होगा आपने वो मरते दम तक हिंदुस्तान से
03:13MLA की पेंशन लिया करते थे
03:16खुनाम नभी सुमजी का नाम सुना होगा
03:19हुरियत कांफरंस के बहुत बड़े लीडर है
03:20वो आज भी हिंदुस्तान गवर्मेंट से पेंशन लेते हैं MLA की
03:25आपने यासीन मलिक का नाम सुना होगा
03:28जिसने अपने आपको इंटरनेशनल हीरो मनाने के लिए
03:311996 के अंदर
03:33उमर खान
03:35शबीर हुसेन
03:39रियाज बॉंबे
03:40इन सब को कतल कराया
03:44तो कश्मीर के अंदर
03:46एक मौत का नाच नाचा जा रहा था
03:48और हम जैसे बेवकूफ
03:50क्योंकि हम टीनेजर थे
03:52हम जैसे बेवकूफ उसमें इस्तमाल हो रहे थे
03:54हम नहीं हो रहे थे पूरी कौम इस्तमाल हो रही थी
03:56फरुक साब आपने जिक्र किया
04:001986 के इलेक्शन्स का
04:02क्या हुआ 1986 के इलेक्शन्स में
04:05जिसने आपको जंजोड के रख दिया
04:07और आपके जैसे युवाँ को जंजोट के रख दिया दिखिए नाइटी नाइटी एड़ी सिक्स के अंदर एक और्गनाइजेशन बनी हम
04:13मुस्लिम युनाइटर के नाम से इसको जमात इसलामिया ने बनाया था और यह जमात इसलामिया की पुल्टिकल निंग थी और
04:20इसका च
04:33कि प्षमीर के अंदर एक्षन उस एक्षन के अंदर वो अमीरा कदल से एक्षन लड़ रहे थे और मैं उनका
04:40पॉलिंग एजन्ट था मैं था फिर दोश्या था और इश्वाक मजीद साथ थे बाकी लोग भी थे चार बजे तक
04:48तो हमें यह पता था कि यह एक्षन हम जीत रह
05:01थे तो हमारे इलाके में एक इंस्पेक्टर साब हुआ करते थे बल उनका नाम था नंदलाग उन्होंने मेरे घर पर
05:09चावा मारा और मुझे उठा लिया तो मैं बला डर गया मने का भाई मैंने क्या किया बोला थाने चले
05:14वहां बात करेंगे चोटी सी उमर थी जब मैं थाने
05:31की गई और उसके बाद हमें जेल भेजा गया और सत्रा साल की उमर में मैं पहली दफ़ा जेल गया
05:37वहां से छूटने के बाद फिर हम यहां SP कॉलेज में तिरकट खेलने जाया करते थे इससे पहले मैं आप
05:48से यह जाना चाहूँगा कि जेल क्यों हुए आपको इंटरोगेश
05:59हम लोग इस वाजे से किया गया क्योंकि हम यहां पर देखिए जमात इसलामिया है यह इसलाम को रिप्रेजन करती
06:06है यह दीन को रिप्रेजन करती है और जो मैं नाम नहीं लेना चाहूँगा जो यहां पर उन दिनों सियासतदान
06:13थे उनको यह खत्रा लगने लगा कि कहीं य
06:29जैसे हमारे साथ वो टॉर्चर और वो तश्दुत किया गया कि कहीं यहां पर पाकिस्तान को रिप्रेजन ना करें
06:35तो उस के बाद जब मैं जेल से वापस आया तो फिर यहां पर एक बगावत की आंक सी जलने
06:40लगी हम कुछ लड़कों के अंदर
06:42तो क्या हम यह मानने कि जैसा कहा जा रहा है जैसा इल्जाम लगा जा रहा है सालों से कि
06:471986 एलेक्शन्स थे फारुक अबदुला की जम्मात नाशनल कॉंफरेंस ने रिख किये देखिए नेशनल कॉंफरेंस नहीं की बात नहीं करूंगा
06:59मैं आपसे यह कहना चाहूंगा कि मुस
07:12कश्मीर के अंदर बंदुक नहीं होती बंदुक नहीं होती शायद और यह कौम उस दहाने पर नहीं पहुंचती कि हमारे
07:22लाग़ों लोग एदगा के कपरस्तान में दखन हैं तो कहीं नहीं आप वाज़ तो पर फारुक अबदुला को इस गन
07:31कल्टर जो कश्मीर में शुर�
07:36जी हाँ बिल्कुल मैं उनको जिम्मेदार ठहरा रहा हूं मैं खुले अलफाज में यह कहना चाहता हूं कि फारुक अबदुला
07:42ने अगर उस अलेक्शन में धांदुली नहीं की होती तो शायद बंदुक यह नहीं होती और शायद एक सत्रह साल
07:50का मुहमत फारुक खान आज क
08:05तो आप हमें यह बता सकते हैं कि जब आपको राजबाग डिटेंशन सेंटर से छोड़ा गया और आप घर पोहँचे
08:11आपके जहन में क्या चल रहा था दिखिए मुझे डिटेंशन सेंटर से नी चोड़ा गया मुझे सेंटर जेल से छोड़ा
08:18गया तो मैं वही आ रहा हूं �
08:20तो जब मैं वहाँ से आया तो कुछ यह हमारे पुराने यार दोस्ते श्वाक साथ थे या हनी फैदरी साथ
08:26थे या अबदुल्ला बंग्रू साथ थे हम सब एस्वी कॉलेज में बैठा करते थे लेकिन मुझे इस बात का पता
08:32नहीं था कि इन्होंने प्रोग्राम बनाया है कि ह
08:34हम पाकिस्तान जाएंगे और वहां जाकर बंदू पलाएंगे और फिर यहां इनकी हुकूमत की ऐसी की तैसी करेंगे तो उन्होंने
08:42एक दिन मुझे का कि यार चलिए हम लोग ज़रा गोमने चलते हैं ठीक है हम भी चले गए मैंने
08:48घरवारों से कहा कि मैं थोड़ा बाहर जा
09:02और आपके साथ कितने और लोग थे और जो पाकिस्तान चले गए और साल आपको याद है कि कुन सा
09:09साल रहा था है जी हाँ यह एटी एट या एटी नाइन का साल होगा इतना देखिए उस ताइम काफी
09:14काम उमर थी मेरी अब मैमोरी का भी तकाजा है तो ऐसा हुआ कि हनीफ है
09:19पाजरी साथ मेरे साथ थे और अबदुला बंगरु साथ थे और वी कुछ लोग थे नाम मुझे पूरी थास्याद नहीं
09:25है और हम प्योजे के पॉचे मुझे अ मुझछाफराबाद और वहाँ पर घड़ी दोपत्ता एक जगा है घड़ी दोपत्ता में
09:33हमने ट्रेनिंग की
09:34और मार्च इसफेक्ट्वी में हमें अकॉमडेशन दी गई रहने के लिए और हमने वहाँ ट्रेनिंग की और एक फोटी सावन
09:44चलाना सिखा हमने वहाँ पिस्टल चलाना सिखा और गरनेर धुरू करना सिखा तो आप वहाँ और कोई कश्मीरी थे जिम
09:54को ट्रेन किया जा रह
10:04लेकिन जो हमारे बड़े हज़रात थे असली उनकी बात हुई थी पाकिस्तान गोवर्मेंट के फूर्मेंट के आयर्मी के औा थी
10:15थे जो वहांपर इस पाकिस्तानiben आ हमें पिस्तान के एवादा भी कि अति यह वादा के शगपके ऑ गोली चलाएं
10:25और हम आप लाल चौक में
10:27एक गोली चलाएंगे तो आपके पीशे हमाज आजाएंगे यहां लेकिन वो दोखा था एक। किश्मीरी कौम को इस्तमाल करने का
10:33एक नया तरीका उन्होंने ढूना था और देखिए मैं आपसे एक बात और भी कहना चाहूंगा खुले अलफाज में जब
10:39बात कर रहे हैं तो ब
10:53पार्खा नहीं रहा क्योंकि जब यहां पर वो खबायल लोग आय थे तो किश्मीरी ओने ही उनको पकड़वाया था आप
11:00यहाद होगा शायद तो पाकिस्तान ने वो बदला हमसे लिया हमारे ज़मानों के हाथ में बंदूग दे कर अपनी हार
11:08का बदला इनोंने हमसे लिया �
11:11तो फारूक साब आप कितने दिन, कितने महीने, कितने हफ्ते रहे पाकिस्तान में और किस तरीके की ट्रेनिंग दी जाती
11:19थी और आपको क्या बोला जाता था उन ट्रेनिंग कैंप्स में देखिए मैं आप से एक बात और भी कहना
11:26चाहूँगा मैं वहां शायद दो ढ़ाई म
11:29महीने रहा हूँ और दो ढ़ाई महीने में आठ दिन की ट्रेनिंग होती थी या तीन दिन की होती थी
11:34क्योंकि उस टाइम जल्दी भेजा करते थे वापस क्योंकि यहां पर टेररिजम को इनको रिप्रेजेंट करना था जिहाद के नाम
11:40पर और वहां पर भी कुछ ऐसे लोग �
11:44जो दीन जानते थे और वो जिहाद की बातें चाथ है और जिहाद की फजीलत बायान करते हैं लेकिन जब
11:52मैं जियएल पहुछा हूं तब मुझे पता चला है जिहाद और फसाद में काफी जजदा अगर आप अगर आप
12:13किसी के साथ हुसन सलुक का मझाहिरा करते हैं तो वो भी जहाद है
12:19गतल करना जहाद में नहीं है
12:24किताले फी सबीलियल्ञ तेरवे नम्म्मर पर आता है
12:26यह हमारे अल्माओ एकराम को अभी शायद पता नहीं है
12:29या तो वो बताना नहीं ऐड़ा है
12:32किताले फिसमी लिल्लाह का मतलब ये है कि अर्ज लिल्लाह वा लुक्म लिल्लाह जब ल्लाह की सरजमीन के ओपर जल्म
12:39हो तब आप कतल कर सकते हैं
12:42लेकिर यहा तो नमाज भडने की भी अजाजत थी, हम इद भी मनाते थे हम भी मेस पाते थे हम
12:47कशेंशली पंड़तों के अखरोड बिखा थे
12:50वह हमारी एद की शिवाईयां भी खाते थे, थो हमारी कुर्बाणी का गोश्
12:58यहां कुछ ऐसे शातिर लीरर हजरात थे यहां पर जिन्हों ने अपने आपको इंटरनेशनल हीरो मनाने के लिए इस जिहाद
13:06को कश्मीर के रिप्रेजेंट किया मैं जिहाद का जिहाद नहीं कहूंगा ऐसे लाँ तो वह लाँ तो जिहाद बहुत अफजल
13:13चीज है यह फसाद
13:15थे इस फसाद को इनन ने बरवाया और लॉक ओलो को यहां बच्चों को यहां पर भार बच्छों को यहां
13:23बच्चों को जब आप आप से आम्स ट्रैनिंग कर गया है तो च्या आप ने टर एक्टिविटीज में हिसा लिया
13:32और प्या एसा कोई इनकाॉंटर सा जहाँ बो छि
13:36तेखिए मैं आपसे यह बाद बताना चाहूँगा जब मैं ट्रेनिंग करके यहां वापस आया
13:43तो यहां माहौल बिलकुल बदला हुआ था वो 89 का दौर था
13:48और सड़क के उपर इतने फौजी नहीं हुआ करते थे जितने मिलिटन्ट खड़े रहते थे
13:56चारों तरफ बंदूकी बंदूक नजर आती थी एक दस साल का बच्चा और एक सौ साल का बुड़ा भी यही
14:02कहता था
14:03कि हम क्या चाहते आजादी जो यहां पर आजादी के नाम पर जलसे जलूस निकलते थे
14:08उनके अंदर वाखों लोग शिरकत किया करते थे आपने भी वो दोर देखा होगा मुझे आपको बताने की जरूरत नहीं
14:15है
14:15लेकिन हाँ अलहमदलिल्ल्ला अल्ला का लाख लाख करम है कि अल्ला तबार को ताला ने मुझे किसी ऐसी एक्टिविटी करने
14:22से रोक लिया
14:23जिसके लिए मैं शायद अल्ला की आँ पकड़ा जाता या अल्ला की आँ मेरी पकड़ा होती और मुझे फिल्ड में
14:31कोई ज़्यादा टाइम भी नहीं मिला
14:33साथ सेप्टमबर नाइटी नाइटी वन को मैं अरेस्ट हुआ और
14:38यहां से फिर मेरी वो कहानी शुरू हुई जो एक जद्व जहद की थी एक दर्द की थी एक दुख
14:44की थी
14:46तो 1901 में जब आप एरेस्ट हुए तो कितने सालों की सजा आपको ही और कितने साल आप जेल में
14:52रहें देखिए मैं 90 साथ सेप्टमबर 1997 को मैं अरेस्ट हुआ और मुझे पापा टू लाया गया तो जब मैं
15:02वहां लाया गया तो बड़े-बड़े ओफिसर्स मुझे मिलने आ
15:15लेकिन जब एड़ी जी वहां आए और आई वी के बड़े ओफिसर्स आए और रौ के बड़े ओफिसर्स आए उन्होंने
15:21मुझे बात की तब मुझे लगा किया तो काफी फहमस चीज हूँ
15:27बारहाल उनसे मेरी बात हुई तो उन्होंने भी मुझे समझाया कि यार सफ़ल्ला साब ये रास्ता गलत है
15:33लेकिन आप समझ सकते हैं कि उस टाइम इतना माटिवेट किया हुआ था हमें
15:37कि हमने उनकी आखों में आखें डालकर कहा कि आपको एक दिन यहां से जाना पड़ेगा
15:43एक दिन आपको कश्मीर से जाना पड़ेगा
15:46मैं आपके इंटर्वी में ये बात कह रहा हूँ
15:50तो सैफल्ला साब कश्मीर के तारीख में एक सिया दाग या काला अध्याई जो है
16:07क्यों उनको यहां से बागाया किया देखिए यह हमारे एक बड़े लीडर साहब थे हैं यहां यासीन मलिक का नाम
16:14सुनाओगा आपने उन्होंने अलसफा के अंदर एक प्रेस नोट निकाला था कि जो भी गयर रियास्ती लोग हैं यहां वो
16:22लोग किश्मीर स्कॉप पर चले ज
16:36यहां हूं जैसे जक्ती कैम्प है यह जैसे जक्ती कैम्प है यह जैसे जक्ती कैम्प है यह जैसे जक्ती कैम्प
16:47है यह जैसे कैम्प में गया हूं और उनके मैंने हालात बड़े खराब देखे हैं मैं गवर्मेंट सेपील करना चाहूंगा
16:54कि उनकी रहेबिलिटेशन के उनक
16:56किया जाए वो एक ही कमरे के अंदर सास भी वही रहती है बहू भी वही रहती है बेटी भी
17:03वही रहती है और उसका खामद भी वही रहता है तो एक हया और एक शरम का दाइरह होता है
17:10उस हया और शरम को उस पर्दे को आप मिसमार न किया करें उनको उनकी रिलीव को बढ़ाएं
17:17आप उनको थोड़े बड़े घर प्रोवाइड कर आए और ज्यादा बेहतर ये रहेगा कि आप उनको वापस कश्मीर बेज़ें और
17:27देखें ये मेरा मकान है अगर वो लोग वापस आते हैं तो एक फैमिली को एक कमरा में अपने मकान
17:34में से दे सकता हूं रहने के लिए लेकिन
17:37फारुक साब कहिने की आप उस माहोल में पले बड़े हैं जहां कश्मीरी बंडित हुआ करते थे आप मिल जुल
17:44कर रहा करते थे उस बस्ती में जहां के आप निवास ही है तो कहिने की आपको ये अफसोस नहीं
17:50हो रहा है कि इस बंदू की वज़ा से जो बंदूक आपने भी �
17:53कश्मीरी बंडित को यहां से जाना पड़ेगा देखिए सर ये वाबा थी इसके पीछे यही कहूंगा कि यह एक बीमारी
18:03फैली थी कश्मीर में जैसे करोना फैल जाता है या उन दूसरी बीमारियां यह बंदूक की एक बीमारी यह फैल
18:08गही थी और कश्मीरी बंदोरो गी �
18:10किसमत में मुसीबत लिखी थी और हमारी में मुसीबत लिखी थी ये बातें तो मैं आप से अब कह रहा
18:17हूं उस ताइम तो मेरा भी दिमाग कहीं और था आप समझते हैं ना मैं भी कटर बन था लेकि
18:23इन चीजों देखिए जो मैं आज आप से अमन की बात कर रहा हूं ना इसके
18:27पीचे बड़ा रीजन है हम उस रीजन पर अगर आ जाए आप इजाज़त दे तो उस रीजन पर हम आ
18:32जाते हैं जी जी जब मैं सा जब मैं कोड बिल्वार जेल पहुचा हूं जब मुझे
18:37इंटरोरागेशन मेरी खतम हुई और मुझे डिटेंशन के लिए कोड बिल्वार बेजा गया वहां जागर मैं ने देखा कि मैं
18:43पागल खाने आ गया हूं
18:46हिस्बlà मुझाहिदीं J.K.L.F.S. से लल रही है
18:50अल्ला का करना है यह रहा है भायजान के
18:52मैं याजा के बना परिशान हुआ
18:54मैंने तोचा मैं किन से लड़ों पर
18:57आज कल तक तक तो मैं भारती फोजां से लल रहा थका
19:00आज मैं अपने भाईों से लड़ों
19:02एक नंबर बारक की, SEL के अंदर मैंने अबना कमरा बनाया
19:07और मने वहों कुरान पढ़ना शुरू और प्रोभी
19:11कि जो मैंने पड़ा है न महाईजां
19:13तो आप यकिन मानें महांजान कि मुझे फखर हुआ कि मैं
19:17मुसल्मान हूँ अल्हम्दलिल्ला
19:19और मैं इस खुबसूरत दीन का मानने वाला हूँ
19:22मैं उस अजीम प्रॉफिट का उमती हूँ
19:26जिसने पूरी दुनिया के अंदर अमन के चिराग जलाए हूँ
19:30तो क्या हम ये माने कि कहने की आपकी आँखे जो खुली
19:34वो कोडबलवाल जील में खुली
19:36जी हाँ कोडबलवाल जील में खुली
19:38मैं आपसे बताना चाहूँ कि जो इसलाम
19:43जो इसलाम वजू के अंदर पानी कम खरचा करने के लिए कहता है
19:48कहां कहेगा आप किसी का खून महाँ है
19:52जो गुरान के अंदर
19:53अल्ह तबारक वताला फर्माता है
19:55कि जिस इन्सान ने किसी बेगुना
19:57इन्सान की जान ली उसने आलम
19:59इन्सानियत को कतल कर दिया
20:01जिस इन्सान ने किसी इन्सान की जान
20:03बचाई उसने आलम इन्सानियत की जान बचाई
20:06मैंने देखिए मेरे जहन में एक वाकिया याद आ रहा है
20:09अगर आप कहें तो मैं सुना दूँ आपको
20:10आपके पास टाइम तो होगा
20:15मेरे प्रॉफिट के पास एक शक्स आया
20:17सल्ह लिए लिए लिए लिए लिए लिए लिए लिए
20:21मुझे कलमा सिखाएं
20:22तो रसुल अल्लाष सुना असको कलमा पड़ाया
20:25और मुबारक उसको मुबारक बात दी
20:27कि आप एमान में आए हैं
20:30तो बात चलती रही तो रसुल अल्लाष समय ने उन से कहा
20:51इस काम करने के लिए जाना पड़ा तो जब मैं वहां से वापस आया तो मैंने आंगन में देखा कि
20:57एक बच्ची खेल रही है बहुत खुबसूरत बच्ची थी वो और जल्दी जल्दी मैं उससे ये पूछना भी भूल गया
21:03अपनी बीवी से कि ये बच्ची कौन है तो जब उ
21:19जाने के बाद ये बच्ची कादा हुई गया बोला जब उसने मुस्से ये बात कही तो मेरी रूख आप गए
21:26रूख आपना समझते हैं क्योंकि अरब जहालत के कल्चर में अरब के कल्चर में उस ताम बेटी का होना एक
21:31बड़ी हकारत वाली बात होती थी के बई कोई मेरा भ
21:48गुमाने के लिए जब गुमाने के लिए ले गया तो बीवी ने इसे कहा कि भाई कहीं आप इसको मारोगे
21:56तो नहीं बोला नहीं मैं नहीं मारोगा बोला मैं इसको जंगल में ले गया और मैंने कबर खोदने शुरू की
22:00बहुत बड़ी बात कहने जा रहा हूं मगर अगर आ�
22:17बेटी को कबर के अंदर उतार दिया और उपर से मिटी डाल दिया मैं यहां पर शायद इमोशनल हो जाओं
22:24रसूल लासलों रोने लगे जो उनके नैन मुबारक थे उनके अंदर आसू आ गया और उन्होंने हिच्कियां लो लो लो
22:34कर कहा एक दफ़ा और सुनाओं फिर उर रो �
22:38फिर उन्होंने कहा एक दफ़ा और सुनाओं तो आप देखिए मुझे इसलाम की खुबसूरती तब पना चली यह वो उस
22:46पेगंबर का दीन है जिसने मासूमों का कतल करने से रोका हम जिसने हमें इनसानियत के चिराग जलाना सिखाया अल्लह
22:58का लाक लाक शुकर अजा करता ह
23:02हैं कि मैंने जेल के जेल में दिन गुजा रहे हैं बड़े बुरे लेकिन आप यकीन करें भाईजान उन दिनों
23:08पर मेरी सारी खुशिया गुर्बान जो मैंने जेल में गुजा रहे हैं इतने हसीर इतने खुबसूरत मैं आप से बता
23:16नहीं सकता मतलब मेरे पास अलफाज नह
23:32और फिर मैंने ये सोच लिया कि अब मैं इस बंदू के रास्ते को तरक करूंगा और जो इस रास्ते
23:38पर जा रहा है मैं उसको कोशिश करके रोकूंगा
23:42अब देखिए इबराहिम अले सला तो असलाम को जो बाग में डाला गया तो कुछ परिंदों का जुण उपर से
23:48जा रहा था एक परिंदे ने का ठीक है मैं जाता हूं पानी लेके आता हूं और मैं डालूँगा बाकी
23:53कबूतरों ने उसे का यार तेरे पास कौन सा वो फायर सर्
24:11आज उस परिंदे का नाम दुनिया के अंदर रोशन है एक और परिंदा था शिपकली वो साग को फोग रही
24:20थी बढ़का रही थी आज उसको को ही आत नहीं करता है लेकिन उसका बूतरों से भी आत करते हैं
24:26तो मैं भी कोशिश कर रहा हूं कि अमन हो शानती हो अब नहीं हो �
24:32तो मैं नहीं किया सकता लेकिन हाँ कोशिश कर रहा हूं अल्ला के सामने ये जरूर कहूंगा या ला मैंने
24:37कोशिश की थी नहीं कर पाया तो फारूक साब जेहल में कितने साल रहे आप और ये भी कहा जाता
24:45है कि आप जैशे मुहम्मद फाउंडर मॉलाना मसूद अजहर से भ
25:03हरकतलमजाइदीन को जोइन किया उन दिनों जैशे मुहम्मद नहीं हुआ करती थी हरकतलमजाइदीन हुआ करती थी तो महाँ पर ये
25:09कुछ लोग आए जिसके अंदर नसरुला लंगड़याल मॉम्मद खान गजनवी का नाम सुना होगा आपने स्याफुला खालिद मॉला न
25:32से बात करके उनका वो जो उनको बाहर निकालने का प्रोसिस था कि भाई इनको थोड़ी जर बाहर भी छोड़ा
25:38जाए तो उस वर बात की और उनको बाहर भी छोड़ा जाने लगा तो कमांडर तो वो मेरे वैसे भी
25:42थे तो वहां मेरी मुला नाजर मसूद साब से मुलाकात ह�
25:48मेरी उस हजर वसूद से बात हुई
25:50जो कुरान जानता है
25:52जो दीन जानता है
25:56जो दुनिया के अंदर जिहाद की बात करता है
25:58लेकिन जब उसके मुँझे आप कुरान सुनते हैं
26:01तो उस जिहाद को डिफाइन करता है अमन के साथ
26:08उसने मुझे कुरान पढ़ाया है
26:10मैं उसे सपोर्ट नहीं कर रहा हूँ
26:13उसने जितने भी हमारे खिलाब कारवाई की है
26:16उसके सजा मिलनी चाहिए
26:18मैं उसको सपोर्ट नहीं कर रहा हूँ
26:19लेकिन हाँ
26:20उनके साथ मैं रहा हूँ
26:21उनके साथ मैंने खाया है
26:23उनके साथ मैंने पिया है
26:24आज भी अगर वो मेरा इंटर्विव देख रहे होंगे
26:26अगर आज भी वो मेरा इंटर्विव देख रहे हैं
26:28तो मैं उनसे यही कहना चाहता हूँ
26:30मौलाना खुदा के वास्ते
26:32शायद आप पहचाने ना पहचाने
26:34आप मेरी दाड़ी नहीं है
26:36मौलाना इस जिहाद ये जिहाद जिहाद मत करें आप
26:39बिल्लाज कि वास्थे आप उस दीन को लेकर चलें
26:42जो रसूल आलला का दीन है
26:46आप
26:47मक्का को याद कीजिये
26:49उस दिन रसूल आलाह अलम ने अपने
26:50अपने चशां हवजरत हमजा के कातल को भी
26:53माफ कर दिया था उस दिन आप सलेल लाँ सम्मने अबू सुभयान के घर में गुसने वाले को भी पना
26:59दी थी मत में मुचाईए ये मत खेलिए मुद का नंगा नाश ना आपके लिए अच्छा है ना हमारे लिए
27:05अच्छा है ये दुनिया है ये चार दिन की दुनिया है यहां �
27:09अपर आराम से रहे कल दुनिया से जाएंगे यहाप आल्लह तबार्श को ताला के सामने खड़े होंगे, कोई आपका गिरिवान
27:15पकड़ेगा, कोई माँ का आके आपका दामन पकड़ेगी, गिरिवान पकड़ेगी, बोलेगी है, मौलाना तुने मेरा बेटा मरवाया था, त�
27:39तो क्या चल रहा था आपके जहन में, क्या चल रहा था आपके दिल और दिमाग में?
27:43ओ, बना खतरनाक सवाल पूछ लिया आपने.
27:45जब मैं जेल से आया, भाई जान मैं आपको बता नहीं सकता, इस पर मैं एक शेर कहूँगा आपसे.
27:50एक शक्स कल मिला था कड़ी धूप में मुझे, पानी के आवज खोने जिगर बेचता हुआ.
27:57इसका मतलब आप समझ सकते हैं.
28:00इस कडर सख्टी मैंने देखी हैं, अपनों ने साथ चुड़ दिया, पराई हो ने साथ चुड़ दिया.
28:08चारों तरफ पन्धेरा, ने जेब में पैसे, ना तन पे कपड़ा, जिन्नों ने हाथ में हाथ लेकर कहां था?
28:19ना तुम हमें दोखा देना ना हम तुम्हें दोखा देंगे
28:22बाद में वो भी दोखा देंगे
28:25और ये जिन्दी की तनहा हो गई भाई जान
28:28ये जिन्दी की तनहा हो गई और फिर
28:31मुसीबतों का एक सिलसला चालू हुआ
28:34पुलीस ने काफी परेशान किया
28:36आहरमी ने काफी परेशान किया
28:39और
28:42बहुत कुछ देखा
28:44अलवाज नहीं है बाते याद करने का दिल नहीं करता
28:47आज आज आला ने मेरे हाला सुदार दिये है
28:51मैं आपसे क्या कहूं भाई जान
28:53कि कभी कभी
28:55मैं सिग्रेट का बड़ा शौक दिन हूँ
28:57कभी कभी मुझे मिरे पास सिग्रेट के लिए पैसे नहीं हुआ करते थे
29:00कभी मैं बिमार होता था मिरे पास
29:03लवाई के लिए पैसे नहीं हुआ करते थे
29:06मैं कहना चाहूंगा गिलानी साहब
29:08अल्लह तबारक वताला आपको
29:10कियामत के दिन जरूर पकड़ेगा
29:12और मैं आपका गिरेबान पक्ड़ूंगा यासीन मलिक तेरा गिरेबान मैं पक्ड़ूंगा अल्ला के सामने
29:18शबीर आमश्या तेरा गिरेबान मैं पक्ड़ूंगा अल्ला के सामने
29:35कि इस बात में हकीकत है कि जब फारुक साहब को जील से रिहा किया गया जब आपको जील से
29:42रिहा किया गया तो आपकी हालात माली हालत ऐसी थी कि आपको आटो तक चलाना पड़ा
29:48जी हाँ बिल्कुल भाई जान मैंने आटो भी चलाया
29:51मैंने पेंटिंग का काम भी किया
29:53भाई जान मैंने क्या कहूँ आपसे
29:56मैंने वैल्डिंग का काम भी किया
29:57मैंने जिन्दिगी का हर वो स्ट्रगल देखा
30:00जिन्दिगी का मैंने वो हर स्ट्रगल देखा
30:03जो अल्ला किसी को न दिखाए
30:07लेकिन फिर वहाँ पर एक हिम्मत आती थी गिरते हैं
30:09शेह सवार ही मैदान जंग में
30:11वो तिफल क्या गिरें जो खुटनों के बलचने
30:14जहां भी गिरा वहाँ फिर खड़ा हुआ
30:16जहां गिरा फिर वहाँ खड़ा हुआ
30:17लेकिन किसी ने हाथ नहीं थामा
30:20किसी ने हाथ नहीं थामा
30:23फिर जिंदीगी के अंदर
30:24अल्ल्ह तमार्त को अधर अधिर धिरे धिरे थिरे जो चुटनाओ की बानलाओ शुरू किये और
30:29अन लिडर हज� reach को में ये कहना शाय हूँगा कि अगर
30:33तो अगर तुम्हें हंदोस्तान ग� expansy भी देती है ना खुदा की कसम तो शायद मुझे कौई अफस्स हो
30:39क्योंकि तुम्हारे हात उन बेगुनाओं के खुन से रंगे हुए है
30:43यासीन मलिक के हात उन बेगुनाओं के खुन से रंगे हुए है
30:46गिलानी सहाब के दामन पर लाखो कश्मिरियों के खोन के धबे हैं
30:57मुझे तब नफरत हुई इस जिहाद की जिहाद की जिहाद तो महत अबजल चीज़ है
31:03इस फसाद की मुझे तब नफरत हुई जब मुश्ताक लटरम जो अलुमर का शीफ कमाडर था
31:09उस कमभखत इनसान ने एक शक्स के गले के अंदर बम बांद कर उसको उड़ा दिया
31:16आथ ये कहा के ये मुबिर ये इनफार्मर है आप कौन होते हैं किसी को मौत की साज़ा देने वाले
31:23टरम आप भी एक दिन उसी मौत मरोगे जो मौत तुम ने बाटी है वोही मौत तुम भी मरोगे
31:31और मैं तो हिंदुस्तान गौवर्मेंट से कहता हूं जितने भी आपको सेपरेटिस्ट नजर आते हैं इनको जेलों में डालिये इनके
31:37सारे पुराने पर्चे खोलिये इनको तखते दार पर पहुँचाईए ये कश्मीरी कौम के कातिल हैं ये उनके कातिल हैं जिनको
31:50मुरगा क
32:01हैंगे आपका सफर मुहमद फारुग खान से साफ बला और साफ एक मेंस्ट्रीम पॉलिटिशन क्या सुच कर आपने इलेक्शन लड़ा
32:11और कैसे ये आपका मेंस्ट्रीम पॉलिटिक्स में इंट्रेस्ट बढ़ा तेकि बहाएं जब जब ज़्या तग आगया मुझे बहुत
32:19तंग करती थी पुलीस मुझे बहुत जाना पुलीस तंग किया करती थी
32:23तो एक दिन मैं मैं बना परेशान हुआ और मैं यहां एक S.S.P. साहब हुआ करते थे ता
32:41आशिक
32:52तो एक साहब से मिलना है। मैं थीक है अप अपना नाम बता है मैं थो कफी देर बैठा रहा
33:02हुआ है।
33:04अपना नाम कागज पर लिक लिए ने लिक कर आए इनको नाम दिया तो साथ के पास गए और साहब
33:10ने मेरा नाम पढ़ते ही मुझे अंदर बलाया।
33:11आया मैं अंदर गया और उन्होंने मुझे देखा मुझे माशालला हमारे पास आए हैं बैठी मैं बैठ गया जैसा कि
33:19उनके बारे में सुना था कि बड़े सख्त सख्त आफिसर हैं अल्ला उनको अच्छा रखे मेरे मेरे साथ नेगी की
33:23है मैं उनके अच्छा वोलूँगा तो �
33:27चाइ भी पिलाई यूने मुझे और बूला क्या बाता है मैंने का सर मुझे ऐसे ऐसे तंग किया है बूला
33:33देख तंग तो आपको हम करेंगे क्यूंकE आपके लंहोंने ख़ता की है सज़ा आपकी सदियों को जरूर मिलेजी मैंने ठीके
33:41सर अब अब ये बताए इसके बचले
33:55रखिये और अमन के लिए काम कीजिए तो मैंने का ठीच हज़र तो उन्होंने मुझे आईजी कश्मीर SM साहिस साथ
34:04साथ से मिलाया और SM साहिस साथ साथ साथ से मुझे कहा कि वह आप इन लोगों को जमा कीजिए
34:12और हमसे मीटिंग कराइए फिर यहां संतूर होटल का नाम सुना
34:16होगा आप मैंने वहां पंद्रह सोलह सो मिलिटन्ट जमा किये और उनको वहां बुलाया और अपने सारे मुझे सामने रखें
34:24तो उन्होंने का इसे आप रेजिस्टर भी कराइए तो जी एंड के हूमन वेलफेर एस्सेशिशन के नाम से मैंने एक
34:30और और इसको मैं चलाने ल
34:46पन्होंना आता है आपका इनयनोब्रह साब आप मिलना चाहते है गवरनर साभे मैं सोचता हूं यार कल तक पुलीस मुझे
34:56उठा की ले जाता है आज मुझे राजगो tipping से फहन मिलने आए तो मुझे पहले यकिन झुए फिर मैंने
35:04अस नंबर पे दूेरा काल किया लेकिन काल �
35:07फिर सुबह ग्यारा बजे का उन्होंने टाइम दिया था तो उन्होंने मुझे साड़े नौ बजे कॉल किया कि भाई आप
35:11आ रहे हैं तो मैंने कहा मैं आ रहा हूं लेकिन मुझे पता नहीं है उन्होंने कोई नहीं आप डलगेट
35:15पहुंचे हम आपके लिए गाड़ी बिजव
35:20आपके भी बड़े इसान है मेरे उपर उन्होंने बड़ी मदद की मेरी और फिर तो एक सिलसला चालू हो गया
35:26मदब बड़े से बड़े ओफिसर से में मिला जो क्या कहूं मैं आप से जो पुलिस वाला मुझे घर से
35:34उठा के लिए जाता था वही बाद मेरा पी एसो बना और
35:38स्कोल्टी मेरी बहुत तगड़ी होगी और अल्लह ताला ने मेरा टाइम बड़ना शुरू कर दिया फिर 2018 में मैंने बीजेपी
35:46के साथ अलेक्शन लड़ा और उस अलेक्शन में मैंने हबा कदल कॉनिस्टेंसी चे पार्टिस्पेट किया और उसके बाद ये सिलसला
35:55चलता र
36:07ऐसा कि फारुक साब जैसे एक्स मिलिटेंट को बीजेपी में कोई आशा की किरन नजर आई देखिए मैं आपको एक
36:15बात बताओं भाईजान बीजेपी मैं रिप्रेजेंट नहीं करना हूं किसी को आप ये याद रखिएगा ना मैं किसी की तारीफ
36:23करूँगा ना रिप्रे
36:37तब से आज तक गोली नहीं चली गहीं कोई बेगुना नहीं मरा वो पत्थराओं नहीं हुआ वो वो जो यहां
36:45पर कलंडर निकलते थे वो उन कलंडरों का सिलसिला खतम हो गया जो यहां के टेरिस्ट बड़े-बड़े सेपरेटिस्ट बनके
36:52बैठे हुए थे हुरियत कॉं�
36:54फ्रेंस के अंदर और बड़ी-बड़ी सियासते चलाते थे और कश्मीर बंद की कॉल करते थे उन सब को इन्हों
36:59ने उठा के जेल में बंद कर दिया इसके लिए मैं उनका बड़ा तहे दिल से शुकर गजार हूं और
37:05मुझे भी यह लगा कि यार यह लोग कश्मीर को आगे �
37:10जा सकते हैं हाँ बीजेपी के साथ अलेक्शन लना मेरा यही मकसद था कि अगर मैं यहां पर आके एरजिस्ट
37:21हो जाता हूं तो मैं उन लोगों को सुधार सकता हूं उन लोगों के लिए काम कर सकता हूं जो
37:27लोग बंदू का रास्ता चुनते हैं लेकिन शायद मेरी किसमत मे
37:33बारहाल बीजेपी अच्छी पार्टी है मैं उनको रिप्रेजन नहीं कर रहा हूं अच्छी पार्टी है उनके लीडर हजरात अच्छे हैं
37:41हाँ आप कुछ देखिए गलत लोग हर जगा होते हैं में उनकी उनके बड़े लीडरों से भी एक चाहता हूं
37:48कि अगर आप कश्मी
37:49में बी जेपी को रिप्रेजिन्ट कर रहे हैं, बी जेपी चला रहे हैं.
37:54आपकी लाखों के अंदर मेंबर्शिप है.
37:56तो आप जीते क्यों नहीं है?
37:58उसकी एक बड़ी बजा है.
38:01कि आपके पास वो फेस नहीं है.
38:05आपने उन लोगों का साथ नहीं दिया,
38:07जो लोग कश्मीरी कौम को आगे ले जा सकते थे
38:13मैं मुखालफ़त नहीं कर रहा हूँ
38:14मैं अपने पियम परधान मंतरी से
38:19जो इस देश की आन और बान और शान है
38:23जो अंदर घुसके मारते हैं
38:25मैं उन से ये बात कहना चाहता हूँ
38:27कि आप कश्मीर की बीजेपीजी सियासत में उन लोगों को लाइए
38:31जिनके अंदर दम हो जिनके अंदर जजबा हो
38:36जो मुलक और कौम के लिए कुछ करना चाहते हो
38:40जो आखों में आखें डाल के बात करना जानते हो
38:45यहां पर आपको अपनी लीडर्शिप चेंज करने की जरूरत है
38:50तो जहां आप चेंज की बात कर रहे हैं
38:52कि यहां जमू कश्मीर में बीजेपी को एक चेंज की जरूरत है
38:56एक नए चेहरों की जरूरत है
38:58तो क्या आप कहीं ने कहीं असंतुष्ट है जो यहां पर BJP नेता नियुक्ति किये है?
39:05जी हा, बिलकुल मैं असंतुष्ट हो उन्यताओं से, उन्यताओं से मैं हिंदी में असंतुष्ट ही बोलते हैं, मैं मुतमई ही
39:16नहीं हूं न्यताओं से, बड़े शहरे लाईए कश्मीर के, आप ऐसे लोगों को लाईए जिनकी मौशरे के अंदर बात बनती
39:25हो, पंदरा साल, �
39:30very, बीजेपी साल से आपके पास एक स्पोक्स्परसंन है. आप कितने सालों तक आप há publicly ही जेपी के सास्ण
39:50एस
40:00membership है, मुझह कोई निकाल सकता बीजेशें haji निकाली नहीं सकता बीजेशी से
40:06डाव्ची बीजेशें निकाली निकाली नहीं सकता बीजेश भी साथू जो भी के यहां। है कश्मीर में अबिलकुल विजेशी साथ के
40:14ओपर कंग Blue urge
40:18का हूँ, लकिन हा, बीजेपी मेरे, बीजेपी ने मुझे एक लाम दिया, बीजेपी मुझे एक रुतबह दिया,
40:26अगर आज में आप मेरा इंट्र्यु�adelू कर रहे हैं, तो बीजेपी की बज़ सही कर रहे हैं आप.
40:29तो फारुक साब बीजेपी से क्यों नाराज है यहां की लीडर्शिप से जमु कश्मिर की लीडर्शिप से
40:34नहीं नहीं नहीं नहीं देखें मैं किसी से नाराज नहीं हूँ मैं पीस अमन का पुजारी हूँ
40:39मुझे किसी से कोई नाराज़गी नहीं है मेरी
40:41मैं यही कहना चाहता हूँ कि अच्छा काम कीजिए, अच्छे लोगों को लाइए, काम करने का मौका दीजिए आप, एक
40:49दूसरे की जड़े मत खो दिए आप, आप एक दूसरे की जड़े मत खो दिए, आप एक दूसरे को आगे
40:54लाइए, एक दूसरे को काम करने दीजिए
40:57फारुक साब आपने रिसेंटली भी एसेंबली एलेक्शन्स लड़े हैं जी हाँ और इस बार भी आप असफल रहें तो आगे
41:06का प्लान के है फारुक खान का देखिए जी तो मुकद्रों की बात है अल्लह दबारक वदाला ने मौदी साब
41:16को उन्होंने भी बड़ा स्पेगल �
41:19दिखा है। उन्होंने भी चाए बेची है संक के ऑफिस में खाना बनाया है और बहत कुछ उन्होंने विक्षा लेकर
41:28भी खाना खाया है जब आल्लह तहला उनकी मुकद्र बदल सकता है तो क्या पता मेरा भी मुकद्र बदले और
41:35मैं भी किसी अच्छे वदे पर आजाओın ल
41:49जिन बेहनों के सर से चादर उतारी गई है मैं उन माओं का बेटा बनने की कोशिश करूंगा जिनके बेटे
41:55कबरों में सो रहे हैं तो फारुक साब 36 साल आपकी लाइफ के जो गुजरे है चाहे वो आपकी एरेस्ट
42:05होई डीटेंशन होई पोलिंग एजेंट के तोर पर और अ�
42:19दो ढ़ाई साल बुरे गुजरे हैं नहीं दो ढ़ाई साल भर मेरी जिल्दीगी का पुरा हुजरा है जब मैं पाकिस्तान
42:27से यहां ट्रेनिंग करके आया वो वो टाइम बरा बरा हुजरा है लेकिन मैं आप से फिर यही कहूँगा कि
42:33जेल के दिन मेरे इतने खुबसूरत है �
42:36माई जाल मैं क्या को हूँगा आपसे मैं किताब लिखा शेल के दिनों पर वो जेल के दिन इतने हसील
42:42है डा मैं आपको बदा नहीं सकता है बदा नहीं सकता मैं आपको उस्टेयर मेरे अमर होगी 2019 साल 59
42:49साल के जवान के जो जजजवात होते हैं उसकी जिल के अंदर ऑंанов होती
42:54हो कितनी खुब्सूरत होती है उसका दिल करता है मेरी भी गल्ट्रेंड हो मेरे भी यार दोस्त हो मैं ब्रेंड
43:01के कपड़े पहनूं मैं बाइक चलाओं मैं गाड़ी चलाओं और खुब्सूरत अंदाज में घूमू मेरे अंदर ये चीज़े नहीं थी
43:13मेरे दिल को तसकीन थी कि मैं जेल में हूँ मुझे अल्ला मौका दे रहा था मुझे अल्ला मौका दे
43:22रहा था अपनी तरफ बुलाने का मैं गंदी नाली में पड़ा हुआ था बाई जब मैं जेल गया अल्ला ने
43:32मुझे पानी से दोया मेरे गुनाहों को दोया अल्ला मेरे ग�
43:36बानाओं को ठंडे पानी से दोए, उसे दोया मुझे ऐच्कुरान बढ़ाया और मिंबर पर बिटा लिया, �放心,
43:43आप यकीजिए मैं कोर्ड बल्वाड के और दर से कुर्ण दिया करता था लुम्हें यक्सार का
43:57बड़ी बात तो मेरे अंदर चेंज की, एक बड़ी वजय यह है, कि सबसे बड़ी बात है कि मैंने रसूल
44:02आसलला स्वेम की जिन्दगी को पड़ा है।
44:05लिकिन जब मैंने वह जिन्दगी पड़ी है भाजार में आपको बता नहीं सकता, मेरे पास आए नो वर्ड।
44:12इन 36 सालों के इस सफर में अगर एक चीज का अफसोस हो फारुक खान को तो वो क्या चीज
44:20होगी हाँ
44:27अफसोस एक चीज का है भाहिजा अफसोस यह है कि मैं उन दिनों जेल में था
44:35यहां मुशीर अलहक साब की किड्नैपिंग होती है आपने सुना होगान का नाम वाइस चांसलर थे वो कश्मीर उनिवर्स्टी में
44:44और इसी कंबख़ जेके अलफ के यासीन मलिक और वो दूसरा क्या नाम है इसका अभी वो जेल में है
44:52यासीन बठ इन दो कंबख़तों का उसमें हाथ था इन्होंने उनको उठाया ती लोगों को और कुछ टेरिरिस्ट की मांग
44:59की और फिर गवर्मेंट ने उनको नहीं चोड
45:03तो इन्होंने उनको कतल कर दिया और वो भी माहे रमजान के महीने में रमजान के महीने में जबके रमजान
45:08के अंदर कतल करना होना है कितना मौजज महीना है जब मैंने ये बात को और मिलवार के जेल के
45:16अंदर सुनी तो मैंने इसके ओपर दरस दिया महाँ पर उसके ओपर मे
45:32साध्राजे ने गई आज भी मजार शोहदा के अंदर लोग जाते हैं अगर जहाद की अगर जंग आजादी की जंग
45:40हमारी थी
45:41मुशिर अल्हक ने कौन सा गुना किया था उसको क्यों कटल किया गया जाए नब पूरी काम मुशिर अल्हक के
45:47घर माफी मागया उससे
45:48जब तक मुशिर अल्हक के घरवाले आपको नहीं माफ करेंगे आपके ओपर ये सजा बनी रहेगी
45:54आपको ये सजा बिलती रहेगी
45:55क्योंकि आपने एक तिसी बेगुना का कतर किया है
45:58और ये यासीन बठ है इखवान अल्मस्लिम इखवान का जो चीप रहा है
46:02इसका बख़त का उसमें हाथ था
46:04इसको ये भी ये भी जेल में इसके ओपर भी खो लिए आप उपर चाए लगाई ये इसके ओपर पर
46:08चाए
46:10तो 1990 और 2025 कितना बदला है कश्मीर
46:16जमीन अस्माल जमीन अस्माल ये मोदी सरकार की बहुत बड़ी एक कामियावी है
46:24कि उन्होंने लाल चोक को स्मार सिटी बना दिया
46:26जिस घंटा घर के उपर 26 जन्वरी और 15 अगस्त को पाकिस्तान का जंडा लहराया करता था
46:32वहां आज 14 अगस्त से ही हिंदुस्तान का जंडा लहराया जाता है
46:37आप देख सकते हैं कोई स्टोन पेलिटिंग नहीं होती
46:39आप देख सकते हैं किसी बेगुना का गतल नहीं होता
46:42है छोटे मोटे वाकियात होते हैं उनको रोकने की कोशिक की जाती है
46:46हमारी एजिंसिया मुत्हीथ है
46:48हैं हमारी स्कोर्टी फोर्सिस मुतहिद हैं हमारे कश्मीर कश्मीर
46:52पुलीस मुतहिद हैं रोकने की कोशिश की जाती है लेकिन अब इतने
46:56इतने को तो दिहान नहीं रख सकता है इसान लेकिन हां हम अमन की
47:19ये थे हमारे साथ खुसूसी बात जीत करते हुए फारुक अहमद खान साथ श्री नगर से वान इंडिया के लिए
47:26मैं इजार अली
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