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  • 7 minutes ago
मुरादाबाद का सलावा गांव बना बदलाव की मिसाल, बरसों पुरानी प्रथा को क्यों कहा अलविदा, सुनिए नट समुदाय की जुबानी.

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00:02उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिला मुख्याले से 20 किलोमेटर की दूरी पर है सलावा गाउं जहां नट समुदाय के 200
00:10घर हैं
00:11वैसे तो इस समुदाय के लोग किसी के मरने के बाद गाउं के पास इस्थित 5 बिगा जमीन में बने
00:16कबरिस्तान पर ले जाकर भू समाधी यानि दफन करते थें
00:19लेकिन अब यहाँ जमीन कम पढ़ने लगी है और यह लोग बरसो पुरानी अपनी परंपरा को छोड़ रहे हैं और
00:26दासंसकार करना सुरू कर दिया है
00:43जब इस बारे में गाउं के दूसरे लोगों से बात की गई
00:48तो वे लोग भी अरजून पाल की बातों से सहमत दिखे
01:30इस बदलाओं के पीछे दूसरी वज़ा जो लोगों ने बताई वो गरीबी और उनके पास जमीन नहीं होना जिसकी वज़ा
01:37से यह अपनी सालों पुरानी परंपरा छोड़ने को मजबूर हैं
01:50इतिहासकार बताते हैं कि नट समुदाय के लोग रास्थान से पलायन कर यहां पहुचे जिसमें कुछ लोग हिंदू धर्म को
01:56मानते हैं और कुछ लोग इसलाम को मानते हैं
01:59इनमें कुरोना के वक्त से कुछ समाजिक बदलाओ देखा गया
02:26एक तरफ जहाननत समाज के लोग समाधी परंपरा
02:29को त्यागने के पीछे जमीन की कमी बता रहे हैं वहीं दूसरी तरफ इतिहासकारी से समाजिक बदलाओ के रूप में
02:35देख रहे हैं
02:36ज्यादातर घुमन्तु जीवन जीने वाले लोग सालों से बदहाली में जीने को मजबूर है
02:41जरूरत है इन्हें सरकारों द्वारा संबल देने की जागरुकता लाने की ताकि बदलते वक्त में इनके बच्चे भी आम लोगों
02:49के साथ कदम से कदम मिला कर जिन्दगी जी सकें
02:52हमें जानकारी दी हमें बताया तो उसके मताबिक इनकी बढ़ती हुई आबादी एक एहम वज़ा है सबसे बड़ी वज़ा है
02:59दूसरी चीज़ यह कुछ नोजवानों से हमने बात की यहां पर उन्होंने बताया कि वो समाजिक बदलाओ भी चाते हैं
03:05कुछ पिर्था है यह जो जिस तरह की पिर्था थी दफनाने की पिर्था को इन्होंने उसको एक सामाजिक बदलाओ के
03:23तोर पर चेंज किया है
03:26मुर्दवा से एवी भारत के लिए मुहम्मस साजर
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