00:00वीडियो गेम जैसी बैटिंग, हाईवे जैसे पिछे, आईपियल दोज़शब्श क्यूं हुआ बेमज़ा?
00:06अब हाल ये है कि जब तक कोई रील या वाइरल मॉमिंट डेंड ना करे, लोग खुद मैच देखने ही
00:11नहीं बैटते.
00:12इसके दो बड़े कारण है. पहला ये कि क्रिकेट बहुत ही ज़्यादा हो रहा है और आईपियल मैच के लिए
00:17तीन घंटे स्क्रीन के सामने बैठे रहना.
00:19और दूसरा सबसे बड़ा कारण ये है कि आईपियल का गिरता इस तर आईपियल अब किसी वीडियो गेम जैसा लगने
00:26लगा है जहां बस छख्के मारने की होल है. यही आईपियल की बुरियत का कारण है. क्रिकेट के मैदान में
00:35कॉम्पेटिशन गायब हो चुका है. मैदान
00:37पर अब दो टीमों के बीच मुकाबला नहीं होता बलकि सिर्फ इस बात की होल लगी रहती है कि कौन
00:42सा बल्लेबास गेम को जादा दूर और जादा बार बाउंडरे के बार करता है. लेटा बताता है कि ये टूर्नमेंट
00:48अब सिर्फ बल्लेबासों का बन कर रह गया है. बस �
00:51200 रन बनाना किसी टीम के अपशक्ती नहीं बलकि उसकी मजबूरी बन गई है. अगर आपने 220 रन नहीं बनाए
00:57तो आप सुरक्षित नहीं.
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