00:00बढ़ती गर्मी और लगातार घटे भूजल स्तर को देखते हुए, किसानों को सूझ बूज के साथ फसल का चैन करना
00:05चाहिए।
00:05क्रिशी एक्सपर्ट्स के मताबिक, पानी की स्थिति के अनुसार खेती करने से न केवल नुकसान का जोखिम कम होता है,
00:10बलकि उत्पादन भी बढ़िया हो सकता है, जिन क्षेत्रों में सिंचाई के साधन सीमित हैं, वहां किसानों को कम पानी
00:15में उगने वाली और सूखा सहन क
00:17करने वाली फसलों की बुवाही करनी चाहिए, कम पानी वाले स्थानों में मूंग, मोट, उडद तिल, ग्वार और बाजरा जैसी
00:22फसलें बहतर विकल्प मानी जाती हैं, ये कम सिंचाई में भी अधिक उपश देती हैं, इन फसलों की खेती करने
00:27से किसानों को उचित-दाम म
00:28मिलने की संभावना बढ़ जाती है और मुनाफ़ा भी होता है वहीं जिन किसानों के पास बहतर जल व्यवस्था है
00:33उनके लिए मक्का, मूंग फली और मौसमी सबजियों की खेती फायदेमंद है।
00:37एक्सपर्ट्स ने ऐसे क्षित्रों में ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक सिंशाई तकनीकों को अपनाने की सलादी है जिससे पानी की बचत
00:42के साथ साथ फसल की गुनवत्ता भी बहतर हो सके।
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