00:00Vishal Megamart's security guard after the world's second exam is UPSC,
00:07where every day aspirants are young and celibus.
00:10And I am the UPSC, where I am the UPSC,
00:27Indian Polity by Lakshmi Kant.
00:30I am the UPSC,
00:34where I am the UPSC,
00:35where I am the UPSC,
00:39where I am the UPSC.
00:40Give me this UPSC,
01:12और संदीप ने इस motivation के लिए क्या कुछ नहीं किया
01:15राजेंद रगर में अपना घर होते हुए भी
01:18वो छोटे से किराय के कमरे में रहा
01:20ताकि मकान मालिक की गालिया ही उसे UPSC निकालने पर मजबूर कर दे
01:24मगर मकान मालिक ने तो जैसे उसे अपना बेटा ही बना लिया
01:37जब इससे भी काम नहीं बना तो वो पहुँच गया एक UPSC टीचर के पास
01:41जिसने उसे ऐसा मोटिवेट किया
01:44कि वो किताब कॉपी की जगा खरीद लाया देसी कट्टा
01:51जब पता चला आएस जादातर बिहार से बनते हैं
01:54तो वो खुद को बिहारी बताने लगा
01:56ताकि लोग उसे मजदूर कहें और वो गुसे में UPSC क्लियर कर दे
02:00लेकिन बिहार सुनते ही लोग पहले से ही उसे कलेक्टर सहाब बुलाने लगे
02:19संदीप ने ना जाने कितनी ही गल्फरेंट्स बनाए
02:22इस उम्मीद में कि कोई तो उसे धोका दे
02:24और अपना प्यार ठुकराने का इंतिकाम लेने के लिए ही वो UPSC निकाल दे
02:28लेकिन उसकी सारी गल्फरेंट्स तो ऐसी लोयल निकली
02:31जैसे RCB के फैंस
02:33और तो और उसकी एक गल्फरेंट्स ने खुद उससे धोका खाने के बाद UPSC निकाल दिया
02:39खुद को मोटिवेट करने के लिए संदीप ने मेरे हर कुछ पन्नों के बाद
02:43जो सिग्रेट्स रखी थी उन पर आज मेरी स्याही छपकई है
02:53और वो आज भी बेसबरी से संदीप का इंतजार कर रही है
02:57और जब ये सब करके भी संदीप को मुझे खोलने का मोटिवेशन नहीं मिला
03:00तो संदीप ने चलाया भ्रमास्त्र और अपने पिता को दिला दिया रिक्षा
03:11ऐसे ही मोटिवेशन की तलाश में बीट गए दिन, हफते, महीने और संदीप बन गया संदीप भाईया
03:21इस कमरे में मैंने सब कुछ खुलते देखा, नहीं खुला तो बस मैं
03:29बहुत आस्पिरेंट्स की तरह मेरा भी एक साल और निकल गया
03:33मगर क्या करें, ये UPSC का नशाही ऐसा है
03:36अटेंट्स खतम हो जाते हैं, उमीद में ही
03:39इसलिए अब फिर एक उमीद के साथ कि किसी ऐसे आस्पिरेंट के पास जाऊं
03:43जिसके पास संसाधन हो ना हो, मुझे खोलने के लिए मोटिवेशन जरूर हो
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