00:34ुपूरु बोला इसे पी और तू देखेगा जीवन के पार क्या है कापते हाथों से आरव ने वो कटोरा उठाया
00:44जैसे ही उसने एक घूंट लिया पूरी गुफा घूमने लगी दीवारों पर उभरने लगे चेहरों के आकार
00:53कानों में गुंजा, स्वाहा, अंधेरा, बस उसकी सासों के आवाज, वो अब गुफा में नहीं था
01:01एक खुली जगे में खड़ा था, जहाँ चारों तरफ राख उड़ रही थी
01:06आकाश लाल था, और जमीन पर पड़े थे सैकडों शरीर, बिना चेहरों के एक आवाज आई, तू जीवन को लिखने
01:16आया था, अब मृत्यों तुझे लिखेगी, वो भागने लगा, लेकिन हर दिशा में वही चेहरे, वही राख, वही गूंज, फिर
01:26उसने खुद को देख
01:27उसका ही शरीर
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