00:09बिहार की नालंदा जिले के दो छोटे से गाउं सकरोड़ा और मो करमपुर आज पूरे देश के लिए मिसाल बन
00:17चुके हैं यहाँ देश भक्ति सर्फ शब्द नहीं बलकि हर सांस में बस्ती है इसलिए अब इन गाउं को कहा
00:24जाता है सैनीकों का गाउं
00:26यहाँ सुभा की शुरुवात अलार्म से नहीं बलकि दस्तूर फिल्ड में गूंजती कदमों की आवास से होती है
00:33सुभा निकलने से पहले ही दर्चनों युवा मैदान में पहुँच जाते हैं कोई दौर लगा रहा है कोई हाई जम
00:41और हर किसी का सपना एक ही शरीर पर देश की वर्दी
01:03आकड़े भी इस चुनून की गवाही देते हैं सकराड़ा के 600 घरों में से करीब 125 घरों में फौजी या
01:11पुलिस कर्मी है
01:12वहीं मोकरमपुर में 65 में से 35 घरों से स्टैनिक निकले हैं यानि यहां हर गली में देश की सेवा
01:21की कहानी मिलती है
01:22इस परंपरा की नियो रखी गाउं के बुजुर्ग ने 83 साल के रिटार्ड कैप्टन कौशल किशोर प्रसाद जिन्होंने 1961 में
01:31सेना जॉइन की और भारत पाकिस्तान योद 1965 और भारत पाकिस्तान योद 1971 जैसे योदों में देश की रक्षा की
01:40इस दोरान करीब देड़ साल तक कौशल किशोर प्रसाद घर नहीं आये थे
02:17गाउं के लोग बताते हैं कि जब फॉजी छुटी में वर्दी पहन कर घर लोटते हैं तो छोटे-छोटे बच्चों
02:23की आँखों में भी वही सपना जन्म लेता है यही वज़ा है कि यहां देश भक्ती पीड़ी दरपीड़ी चलती आ
02:29रही है
02:37गाउं के खरी 95 प्रतिशत ती युवा आज भी सेना या पुलिस में जाने की तैयारी कर रहे हैं
02:42खास बात यह है कि रिटाइर जवान खुद मैदान में उतर कर युवाओं को ट्रेनिंग देते हैं यानि यहां कोचिंग
02:49नहीं अनुभर सिखाता है
02:50सकरोड़ा के प्रमोट सिंग जिन्होंने 22 साल से ज़्यादा सेना में सेवा दी बताते हैं कि सियाचीन ग्लेशियर जैसे कठीन
02:57इलाकों में ग्यूटी करना आसान नहीं होता
03:00लेकिन देश सेवा का जिनून हर मुश्किल को आसान बना देता है
03:32आज भी इस गाउं के युवा पीशे नहीं है
03:34हर साल 2-6 युवा सेना या अन्य सरकारी सेवाओं में चैनित हो रहे हैं
03:40कई युवा अगनी बीर सेना के तहट देश सेवा के लिए आगे आ चुके हैं
03:45नालंदा से ETV भारत के लिए महमूद आलम की रपोर्ट
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